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त्योहारी सीजन में अवैध प्लाटिंग – “स्क्वायर फिट” के नाम से बेच रहे प्लाट, पंपलेट बांटे,,,कॉलोनाईजर व रेरा लाईसेंस देखे नहीं खरीदें प्लाट

त्योहारी सीजन में अवैध प्लाटिंग – “स्क्वायर फिट” के नाम से बेच रहे प्लाट, पंपलेट बांटे,,,कॉलोनाईजर व रेरा लाईसेंस देखे नहीं खरीदें प्लाट

अवैध कॉलोनी में खुलेआम पम्पलेट बांट कर बेचे जा रहे प्लाट

सोशल मीडिया से लेकर पम्पलेट बैनर लगाकर बेचे जा रहे प्लाट

प्रशासन को खुली चुनौती दे रहे भू-माफिया

शहर से लगे जनकपुर में खुलेआम हो रही अवैध प्लाटिंग

प्रशासन की अपील- बिना कॉलोनाईजर व रेरा लाईसेंस देखे नहीं खरीदें प्लाट

(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना जिले भर में अवैध प्लाटिंग का कालाकारोबार जारी है। इन दिनों भू-माफियाओं ने प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए आगामी त्यौहारों पर लोगों को ठगने का तरीका निकाला है। बाकायदा शहर में पम्पलेट बांट कर अवैध कॉलोनी के प्लाट बेचने की तैयारी की जा रही है। गौरतलब है कि बिना कॉलोनाईजर लाइसेंस, अनुमोदित विकास योजना और रेरा अनुमति के बगैर कॉलोनी का विकास करना और उनमें प्लाट बेचना अवैध है। इस तरह के प्लाट पर भविष्य में रहने वालों को खासी परेशानी होती है। लेकिन पन्ना धडल्ले से बकायता पम्पलेट में लुभावने ऑफर देकर प्लाट बेचे जा रहे हैं। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर एकाउट बनाकर लोगों को पूरे शहर में प्लाट उपलब्ध होने के विज्ञापन दिए जा रहे हैं। शहर में पम्पलेट बांटने के साथ कई बैनर पोस्टरों के माध्यम से खुलेआम प्लाटिंग की जा रही है। स्क्वार फिट नाम से संचालित एक फर्म द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों सहित जनकपुर में विधिवत विकसित प्लाटिंग का मैप देकर प्लाट उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। जबकि शहर में 4 कॉलोनियों को छोड़कर कोई भी प्लाटिंग वैध नहीं है। जिसकी जानकारी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पन्ना द्वारा आरटीआई के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। गौरतलब है कि खुलेआम प्रचार प्रसार से आम लोग इन अवैध कॉलोनाईजरों के झांसे में आकर अपनी जमापूंजी इनकी अवैध प्लाटिंग में लगा रहे हैं और फिर उनके लिए प्लाटों का नामांत्रण अन्य सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। शायद आम लोगों से प्रशासन को कोई सरोकार नहीं है। यही कारण है कि खुलआम प्रचार कर की जा रही अवैध प्लटिंग को प्रशासन की मूक सहमति है। यही कारण है कि पन्ना में भू-माफियाओं का गोरखधंध तेजी से फल-फूल रहा है। विदित हो कि इन दिनों फेसबुक पर स्क्वार फिट पन्ना के नाम से पेज बनाया गया है। जिसमें पन्ना नगर में प्लाट के लिए संपर्क सूत्र 9425860782, 7000714780, 6232575757 नम्बर दिये गए हैं। हालकि इस नम्बर पर संपर्क करने पर किसी ने कोई फोन नहीं उठाया गया। इस पम्पलेट पर नए नए लुभावने विज्ञापन हैं। इस तरह खुलेआम भू-माफियाओं द्वारा दावे किए जा रहे हैं, बावजूद इसके ठगी के इस कारोबार पर किसी तरह का अंकुश प्रशासन की ओर से नहीं लगाया जा रहा। 

अवैध कॉलोनी में घर बनाना पड़ सकता है मंहगा

शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों एवं कॉलोनाइजर एक्ट व मध्यप्रदेश पंचायती राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के तहत नियम विरूद्ध बनाई गई कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों एवं घर बनाने वालों पर भी कार्यवाही के प्रावाधान है। साथ ही इस तरह की अवैध कॉलोनियों को बनाने वालों पर भी सख्त कार्यवाही हो सकती है। जिसमें जुर्माना सहित जेल की सजा का प्रावधान भी है। साथ ही ऐसी अवैध कॉलोनियों में घर बनाने वालों की रजिस्ट्री भी शून्य होने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने मप्र नगर पालिका विधि संशोधन विधेयक 2021 को मंजूरी दे दी है। इस नए विधेयक में अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को रोकने के साथ-साथ वैध कॉलोनियों में रहने वाले नागरिकों के अधिकारों को भी सुरक्षा दी गई है। इस विधेयक में वैध कॉलोनियों को लेकर 2 प्रावधान किए गए हैं। पहला है- यदि कॉलोनाइजर ने कॉलोनी में किसी तरह का विकास कार्य या सड़क अधूरी छोड़ी तो उस कॉलोनी में पड़े अपने किसी खाली प्लॉट को किराए पर देकर उससे मिली राशि से वह निर्माण कार्य पूरा कराना होगा या राजस्व नियमों के तहत राशि की वसूली होगी। दूसरा है- कॉलोनाइजर ने मंजूर ले-आउट का यदि उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी, सात साल तक सजा और दस लाख रुपए जुर्माना होगा। ऐसे में किसी भी कॉलोनी में घर खरीदने से पहले कॉलोनी के संबंधित समस्त दस्तावेजों का विधि जानकारों से प्रमाण उपरांत ही खरीदा जाना चाहिए, अन्यथा लोग अपने सपनों का घर बनाने के लिए लगाई गई जमापूंजी भी गंवा सकते हैं।

प्रशासन ने की अपील


पम्पलेट बांट कर अवैध प्लाटिंग में प्लाट देने के मामले पर तहसीलदार सुधीर कुशवाह द्वारा संज्ञान लिया गया है। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि यह मामला आज मेरे संज्ञान में आया है, रेरा लाइसेंस, कॉलोनाईजर का लाइसेंस, विकास की अनुमति के बिना कोई भी प्लाट विक्रय नहीं कर सकता। कॉलोनाईजर एक्ट में सिविल जेल का भी प्रावधान है। बिना रेरा के लाइसेंस के विज्ञापन भी जारी नहीं किए जा सकते हैं। आज यह स्क्वेयर फिट नाम से पंपलेट जारी किए गए हैं। इसकी जांच की जा रही है। आम जनता से अपील करना चाहूंगा कि पहले सभी प्रकार की अनुमतियों की जांच कर लें उसके उपरांत ही किसी प्रकार का क्रय विक्रय करें

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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