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आचार संहिता की दहशत और योजनाओं पर कालिख, कितना सही या गलत,,,?

योजनाओं के नाम पर पोत ढ़ी कालिख़
संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत हो रही कार्यवाही कहां तक न्यायसंगत
(शिव कुमार त्रिपाठी)

मध्य प्रदेश सहित पांच राज्यों में चुनाव की तारीख की घोषणा होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है 28 नवंबर को mp में मतदान होगा और 11 दिसंबर को रिजल्ट घोषित किया जाएगा इसके पूर्व चुनाव की तैयारियां जोरों पर चल रही है इसके तहत संपत्ति विरूपण अधिनियम पर जिला प्रशासन ने जोरदार कार्यवाही शुरू कर दी लेकिन जो कार्यवाही हो रही और जो परिणाम सामने आ रहे हैं उससे असंतोष की स्वर भी पनप रहे हैं
क्योंकि सामान्य तौर पर किसी सार्वजनिक जगह पर किसी जनप्रतिनिधि का फोटो या नाम हटाए जाते रहे हैं जिले में जो कार्यवाही शुरू हुई है उसमें योजनाओं के नाम भी हटा दिए जा रहे हैं जिसके तहत महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना जो प्रधानमंत्री सड़क योजना का नाम है उसमें प्रधानमंत्री शब्द ही हटा दिया गया है जबकि प्रधानमंत्री शब्द किसी राजनीतिक व्यक्ति या दल का नाम नहीं है प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना उस योजना का नाम है जिसके तहत गांव में सड़कें बनाई जा रही हैं इस नाम से प्रधानमंत्री सड़क योजना का कार्यालय भी है जब सड़कों पर लगे सार्वजनिक बोर्ड से प्रधानमंत्री शब्द विलोपित किया गया तो क्या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना कार्यालय का नाम भी हटा किया जाना उचित होगा या जो सड़कों से योजना का नाम हटाया जा रहा है वह गलत है आपत्ति दर्ज कराने वालों का मानना है कि किसी राजनीतिक दल या राजनीतिक व्यक्ति के नाम को छुपाया जाना चाहिए था अब योजना को ही हटाया जा रहा है तो यह गलत है क्योंकि बहुत सारी योजनाएं हैं जो किसी दल या व्यक्ति के नाम पर नहीं है अगर ऐसा ही किया जाना है तो जवाहर नवोदय विद्यालय का नाम पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर है तो क्या जवाहर नवोदय विद्यालय से जवाहर शब्द हटाया जाएगा जो अब तक नहीं हुआ K
इसी तरह प्रधानमंत्री आवास के तहत जो गरीबों को भवन दिए जा रहे हैं उनके बोर्डों से भी प्रधानमंत्री शब्द हटाया जा रहा है इस पर निर्वाचन आयोग को भी पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई गई है प्रश्न यह है की आचार संहिता में किसी राजनीतिक दल का चिन्ह दल का नाम और राजनीतिक व्यक्ति का नाम हटाना उचित है या योजना का ही नाम हटा दिया जाना चाहिए
आपत्ति दर्ज कराने वाले राजनीतिक व्यक्तियों ने कहा इस पर कार्यवाही कर रहे जिला प्रशासन को पुनर्विचार करने की आवश्यकता है मुख्यमंत्री के नाम पर कई योजनाएं संचालित है जिसमें किसी राजनीतिक व्यक्ति का नाम नहीं है
स्पष्ट है कि जो सरकारी अमला कार्यवाही कर रहा हैं उनमें भ्रम की स्थिति है स्पष्ट रूप से आदेश दिए जाने चाहिए की राजनीतिक दल , व्यक्ति या राजनेता के नाम को या चित्र को छुपाया जाए और योजनाओं के नाम पर कार्यवाही या कहां तक न्यायसंगत है

ऐसा ही नहीं के शिलालेख पूरी तरह से ढक दिए गए हैं पन्ना शहर में ही सभी भवनों पर शिलान्यास और उद्घाटन वाली शिला पट्टिका लगी हुई हैं और उनमें तो वर्तमान जनप्रतिनिधियों या पूर्व जनप्रतिनिधियों के नाम लिखे हैं यदि किसी योजना का नाम हटाया जाता है या उस पर कालिख पोती जा रही है तो आखिर इन शिलालेखों का क्या होगा

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