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पद्मावती शक्ति पीठ :- बुंदेलखंड की शारदा माता है पन्ना की बड़ी देवी

पद्मावती शक्ति पीठ :- बुंदेलखंड की शारदा माता है पन्ना की बड़ी देवी

पन्ना देश दुनिया में हीरो के लिए जितना प्रसिद्ध है उससे भी कहीं ज्यादा सांस्कृतिक विरासत के लिए भी मशहूर है भगवान राम के चरण यहां पड़े थे आदि शक्ति पीठ मां पद्मावती देवी का स्थान भी पन्ना में है जहां हर भक्तों की मनोकामना को पूर्ण होती ही है बुंदेलखंड के लोग पन्ना की पद्मावती देवी को बड़ी देवी के नाम से जानते हैं और इनका स्थान मैहर की शारदा माता जैसा ही है लोग बड़ी देवी को पन्ना की शारदा माता मानते हैं मां के दर्शन करने पूरे बुंदेलखंड से लोग आते हैं
। जिसे लेकर मान्यता है कि यहां जो भी मनोकामना की जाती है उसे मां भगवती जरूर पूरा करती है। पन्ना में मां सती के पदम यानि पैर गिरे थे और इसीलिए इस शक्तिपीठ की नाम पद्मावती शक्तिपीठ पड़ा।

यहां मां का जो प्राचीन मंदिर है उसे लेकर मान्यता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में पद्मावत नाम के राजा हुए थे जो शक्ति के उपासक थे। उन्होंने अपनी आराध्य देवी मां दुर्गा को पद्मावती नाम से इस प्राचीन मंदिर में स्थापित किया। कालांतर में इस क्षेत्र का नाम इसी मंदिर के कारण पद्मावतीपुरी हुआ, जो बाद में परना और वर्तमान में पन्ना के नाम से पहचाना जाता है। पद्मावती देवी का उल्लेख भविष्य पुराण तथा विष्णु धर्मोत्तर पुराण में भी है। ये मंदिर गौण नरेशों का आराध्यस्थल भी था।

पद्मावती शक्तिपीठ के प्रति भक्तों की असीम श्रद्धा और विश्वास है। जानकार कहते हैं कि भक्त इसलिए यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं क्योंकि यहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।

मंदिर की खास बातें

– पन्ना में किलकिला नदी के पास मां का यह प्राचीन देवी मंदिर है। इस मंदिर को स्थानीय बोली मे बड़ी देवन कहा जाता है।
– मंदिर के पुजारी राम कुमार शुक्ला के अनुसार, नवरात्रि में यहां बड़ा आयोजन होता है और देशभर से भक्त आते हैं।
– इस दौरान मां के दरबार में क्षेत्रीय बुंदेली भजन गीत गाए जाते है। मान्यता है कि देवी पद्मावती के आशीर्वाद के कारण ही पन्ना इतना समृद्ध है।

यह है मां सती के टुकड़े-टुकड़े होने की कहानी

मां सती भगवान शिव की पहली पत्नी थी। वह राजा दक्ष की बेटी थी जिसने भगवान शिव को अपनी पुत्री से शादी के लिए मना कर दिया था। उनके इंकार के बाद भी मां सती ने भगवान शिव से शादी की। एक दिन दक्ष राजा ने बड़े यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने सभी ऋषियों और देवताओ को बुलाया लेकिन भगवान शिव को नहीं आमंत्रित किया क्योंकि वे भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे।

मां सती ये अपमान नहीं सहन नहीं कर पायी। जब वे पिता से इसका उत्तर जानने यज्ञ स्थल पहुंची तो पिता ने उनका अपमान किया भगवान शिव को भला बुरा कहा। मां सती अपने पति भगवान शिव का अपमान सहन नहीं कर पायी और उन्होंने अपने आप को यज्ञ की अग्नि में भस्म कर दिया।

जब भगवान शिव को इस बारे में पता चला तो क्रोधित शिव ने यज्ञ को नष्ट कर दिया और राजा दक्ष को मार डाला। इसके बाद भगवान शिव मां सती को अपने कंधे पर बिठाकर सम्पूर्ण भूमंडल पर विचरण करने लगे। भूमंडल को स्थिर रखने के लिए भगवान विष्णु ने पीछे से अपने सुदर्शन चक्र से मां सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। जिस-जिस स्थान पर मां भगवती के शरीर के टुकड़े गिरे, उन स्थानों पर शक्तिपीठ स्थापित हुए। पन्ना में मां के दाहिना पैर गिरा था, इस कारण इस शक्तिपीठ का नाम पद्मावती शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।

पन्ना की पद्मावती देवी, मैहर की शारदा माता और पबई की कलेही माता का चमत्कारिक त्रिकोण संबंध

पन्ना शक्तिपीठ और मैहर की शारदा माता का मंदिर और पबई की कालिका माता का मंदिर अपने आप में समानांतर त्रिकोण बनाते हैं। पन्ना से पबई की दूरी 45 किलोमीटर और पबई से मैहर की दूरी 45 किलोमीटर है यानि ये तीनों स्थानों की आपस में दूरी 45 किलोमीटर है। इस तरह ये तीनों देवी स्थान आपस में त्रिकोणीय समानांतर कोण बनाते हैं।
पन्ना के पद्मावती शक्तिपीठ पर देश-दुनिया से लोग दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर की ये भी खास बात है कि यहां गंगा जमुनी संस्कृति की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। मंदिर में हर जाति, धर्म के लोग मां के चरणों में माथा टेकने आते हैं। बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी यहां कई मन्नत लेकर आते हैं।
नवरात्रि शुरू होते ही कन्या भोज शुरू हो जाता है भक्त प्रतिदिन मौजूद कन्याओं को श्रद्धा अनुसार दक्षिणा देकर भोज कराते हैं

ऐतिहासिक महत्व
925 ईसवी में आए तुर्क यात्री इबने कुरदान ने इस स्थान का अपने यात्रा अभिलेख में वर्णन किया है कालिंजर से आगे की यात्रा में लिखा कि परना एक स्थान है जहां गोंड राजाओं का राज्य है शहर की छोटी-छोटी गलियां है और वहां कुलपूज्य देवी मौजूद है साथ ही इस स्थान में एक शिलालेख भी मौजूद है जिसे मैं ब्राम्ही लिपि में कुछ लिखा गया है जो लोग आज पढ़कर नहीं समझ पाते संभवत इसी स्थान का महत्व या निर्माण का समय लिखा है

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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