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पन्ना में डॉक्टर पिटाई मामला — स्वास्थ्य सेवाएं ठप,,, डॉक्टरों और कलेक्टर के बीच वार्ता विफल,,, प्रशासनिक पक्ष का इंतजार,,, एक बच्ची की मौत,, ओपीडी में ताला

पन्ना में डॉक्टर पिटाई मामला — स्वास्थ्य सेवाएं ठप,,, डॉक्टरों और कलेक्टर के बीच वार्ता विफल,,, प्रशासनिक पक्ष का इंतजार,,, एक बच्ची की मौत,, ओपीडी में ताला


(शिवकुमार त्रिपाठी)   पन्ना जिला में अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ मारपीट के बाद पैदा हुए हालात बेकाबू होते जा रहे हैं आज डॉक्टरों ने अपने सामूहिक इस्तीफे पर अमल करते हुए 2:00 बजे से काम बंद कर दिया जिससे जिले की समस्त स्वास्थ्य केंद्रों का काम प्रभावित हो गया है और लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं डाक्टरों के काम बंद कर देने से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं

ज्वाइंट डायरेक्टर पन्ना में मध्यस्था कर रहे हैं फिर भी इसका कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया दो डाक्टरों को मदर टेरेसा हॉस्पिटल से लाकर जिला चिकित्सालय में काम पर लगाया गया है पर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है इस बीच एक आदिवासी बालिका की इलाज के अभाव में जिला चिकित्सालय में मौत हो गई है वही कलेक्टर और डॉक्टरों के बीच हुई वार्ता का कोई परिणाम सामने नहीं आया वार्ता विफल रही है कलेक्टर से डॉक्टरों ने हरिजन एक्ट वापस करने की मांग की है वहीं डॉक्टरों का आरोप है कि जब डाक्टरों से पिटाई हुई तब प्रशासन ने 3 दिन तक मामला दर्ज नहीं किया जब हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं है तो हम कैसे काम करेंगे,, वहीं डॉक्टरों पर दर्ज हुई हरिजन एक्ट से पूरे स्वास्थ्य विभाग में नाराजगी है इसी कारण जिले की समस्त स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई हैं अभी तक चली वार्ता के दौरान कोई भी हल निकलते नहीं दिख रहा है जिसका खामियाजा स्वास्थ्य विभाग को उठाना पड़ेगा,,  2:00 बजे तक ड्यूटी करने के बाद समस्त नर्सिंग स्टाफ पैरामेडिकल स्टाफ कर्मचारियों एवं डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया और गेट पर खड़े होकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और फिर सभी अपने अपने घर चले गए अब स्वास्थ्य सेवाओं को देखने वाला कोई जिम्मेदार कर्मचारी नहीं है कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तो ताला लटकने लगे हैं

जिले के अजयगढ़ ,देवेंद्रनगर, गुनौर, शाहनगर, पवई सिमरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ताला लग गए हैं मरीज डॉक्टरों का इंतजार कर रहे हैं पर उन्हें देखने वाला कोई नही है

 

 

कल तक पूरा मामला

पन्ना में डॉक्टर पिटाई मामला — 21 डॉक्टरों सहित 228 अधिकारी कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा, शासन प्रशासन की

कांग्रेस नेता की एक्सीडेंट मैं मौत के बाद परिजनों ने की थी सिविल सर्जन की पिटाई

पिटाई करने वाला युवक संघ समर्थित स्वयंसेवक

3 दिन बाद हुई मारपीट FIR

दूसरे दिन सीएमएचओ सिविल सर्जन सहित पांच डाक्टरों पर हरिजन एक्ट दर्ज हुआ

डॉक्टरों ने इस कार्यवाही को फर्जी और बदले की कार्यवाही

(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना जिले का स्वास्थ्य विभाग इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है हर व्यक्ति डॉक्टरों की कार्यप्रणाली और जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्यवाही की समीक्षा कर रहा है  क्योंकि जिले के डॉक्टरों और चिकित्सीय स्टाफ की सामूहिक इस्तीफे के बाद दुविधा की स्थिति बन गई है 8 सितंबर के बाद जिले का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह काम करना बंद कर देगा क्योंकि पन्ना कोतवाली में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बीएस उपाध्याय सिविल सर्जन डॉक्टर एल के तिवारी सहित पांच सीनियर डाक्टरों के ऊपर एफ आई आर दर्ज की गई है हरिजन एक्ट की इस पुलिस कार्यवाही से डॉक्टर परेशान है छात्रों ने इस कार्यवाही को झूठा दबाव बनाने का प्रयास और चिकी स्वास्थ्य विभाग को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है

सामूहिक इस्तीफा देने के बाद नर्सिंग स्टाफ एवं स्वास्थ्य विभाग ने के कर्मचारियों ने कहा की ऐसी झूठी कार्यवाही से काम कर पाना मुश्किल हो गया है क्योंकि हरिजन एक्ट की यह कार्यवाही पूरी तरह से झूठी है और डॉक्टरों के ऊपर  दबाव बनाने का प्रयास है, जो किसी भी कीमत में सहन नहीं किया जाएगा ऐसी दवाओं की कार्यवाही से स्वास्थ्य विभाग काम नहीं कर पाएगा इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के समूह ने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह उठाए हैं

क्या है मामला

 

दरअसल  बीते दिनों एक कांग्रेसी नेता की एक्सीडेंट में मौत के बाद उसके भाई ने सिविल सर्जन डर LK तिवारी की पिटाई कर दी थी , मारने वाला युवक स्वयंसेवक है लिहाजा डॉक्टरों की रिपोर्ट पर पुलिस ने तत्काल एफ आई आर दर्ज नहीं की इसके बाद डॉकरों ने ज्ञापन दिया और कलेक्टर से कार्यवाही करने की मांग की तब कहीं जाकर आरोपी युवक को पर मामला दर्ज किया गया दूसरे दिन पन्ना कोतवाली में ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ बीएस उपाध्याय सिविल सर्जन डॉक्टर एलके तिवारी वरिष्ठ चिकित्सक डॉ आलोक गुप्ता प्रदीप गुप्ता डॉक्टर जितेंद्र यादव पर हरिजन एक्ट की कार्यवाही कर दी गई जिससे डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग का हर कर्मचारी नाराज है कहा यह झूठी कार्यवाही है ऐसी स्थिति में जिले में काम करना मुश्किल हो गया है, 

 

पूरे मामले की उच्च स्तर से होनी चाहिए समीक्षा

दरअसल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर शुरू से ही लोग प्रश्नचिन्ह उठाते रहे हैं यहां अधिकांश डॉक्टर बहुत कम ड्यूटी करते हैं अस्पताल में डॉक्टरों के ना मिलने से आम लोगों में असंतोष बना रहता है वहीं दूसरी ओर आज डॉक्टर के साथ जो मारपीट हुई वह भी न्याय संगत नहीं थी डॉक्टरों को सबक सिखाने के लिए यदि हरिजन एक्ट दर्ज कराया गया है यह भी सही नहीं है वहीं जिले के जिम्मेदार लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की सुविधाएं और समस्याओं के समाधान के लिए तत्परता से काम नहीं किया जिसका खामियाजा जिले की पीड़ित मरीजों को उठाना पड़ रहा है लिहाजा जिले की सभी सुविधाओं और मौजूदा सिस्टम को सुधारने के लिए उच्च स्तर पर समीक्षा होनी चाहिए और जो स्थिति निर्मित हुई है इसमें दोषियों पर  कार्यवाही होनी चाहिए तभी व्यवस्था में सुधार कर पाएंगे  इस मामले में शांत जिले के शक्तिशाली राजनेताओं को भी हस्तक्षेप करना चाहिए यदि ऐसा नहीं किया गया तो हालात बेकाबू हो जाएंगे 

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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