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दुखी पिता की आस टूटी,,, नहीं रहा शिव,,,, बनारस में यूपी पुलिस की अभिरक्षा से गायब पन्ना के शिव की डीएनए से मौत की पुष्टि,,,, हाईकोर्ट के दखल के बाद वह मामले का खुलासा

दुखी पिता की आस टूटी,,, नहीं रहा शिव,,,, बनारस में यूपी पुलिस की अभिरक्षा से गायब पन्ना के शिव की डीएनए से मौत की पुष्टि,,,, हाईकोर्ट के दखल के बाद वह मामले का खुलासा

दुखी पिता की आस टूटी, नहीं रहा शिव

 पन्ना के शिव की बनारस में मौत, पुलिस की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में

प्रियंका गांधी वाड्रा के ट्वीट के बाद मामला सुर्खियों में आया

दुखी परिवार की गुहार के बाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से हुआ खुलासा

गरीब पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की

यूपी की लंका पुलिस की कस्टडी से लापता पन्ना का शिव अब नही लौटेगा अपने घर,

-डीएनए टेस्ट में हुआ मौत का खुलासा

दो वर्ष तक पिता ने यूपी की गलियों में की अपने पुत्र की तलाश,हाईकोर्ट की शरण मे भी पहुँचे,

प्रियंका गांधी ने ट्वीट से मामला गरमाया

(शिवकुमार त्रिपाठी पन्ना) -यूपी बनारस के बीएचयू में पढ़ने वाला पन्ना के बड़गड़ी गांव निवासी शिव दो साल से लापता है दो वर्ष से तलाश करते करते एक पिता हार गया। यूपी पुलिस की अभिरक्षा से गायब शिव कुमार त्रिवेदी को मृत घोषित कर दिया गया है डीएनए टेस्ट में मौत का खुलासा हुआ है।इसलिए अब कभी पन्ना का शिव बनारस यूपी से बापिश अपने घर नही आ पाएगा।वही शिव का परिवार की शिव की तलाश करते करते इतनी बुरी हालत हो गई है।कि अब परिवार के सामने दुखो का पहाड़ टूट पड़ा है। और एक पिता जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई हार चुका है।कैसे पिता अपने पुत्र तलास में फिरता रहा गरीब पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कार्यवाही की गुहार लगाई है

 पन्ना जिले के बड़गड़ी गांव के रहने वाले शिव कुमार त्रिवेदी को पिता ने पढ़ने के लिए बीएचयू वाराणसी भेजा था वह बीएससी की पढ़ाई कर रहा था।लेकिन 13 फरवरी 2020 को शिव बीएचयू से अचानक गायब हो गया।जिसे वाराणसी की लंका थाना पुलिस ने पकड़ा था।और थाने लेकर आई थी। जिसके बाद से शिव लापता हो गया।पिता को जैसे ही जानकारी लगी तो वह यूपी वाराणसी के लिए रवाना हो गए।और लंका थाने में जाकर पता किया। लेकिन कुछ संतोषजनक जबाब पुलिस के द्वारा नही दिया गया।एक पिता ने अपने पुत्र की तलास के लिए वाराणसी के कलेक्टर एसपी से गुहार लगाई।लेकिन शिव का कोई पता नही चला।फिर

उन्होंने 19 अगस्त 2020 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक वकील से जनहित याचिका लगवाई।जिसके बाद सीबीसीआईडी को जांच सौंप दी गई।अदालत में इस केस को लेकर वाराणसी के तत्कालीन पुलिस कप्तान अमित पाठक तक को पेश होना पड़ा।अब तमाम जांच के बाद पुलिस ने ये स्वीकार कर लिया है।कि शिव को लंका थाना पुलिस के द्वारा लाया गया था।जांच में यह भी पता चला है।कि शिव के लापता होने के 3 दिन बाद वाराणसी के जमुना तालाब में जो अज्ञात शव मिला था।वो शिव का ही था। शिव के इस शव की पहचान डीएनए और विसरा की जांच से हुई है।मध्य प्रदेश के पन्ना के रहने वाले प्रदीप त्रिवेदी की पुत्र की तलाश का संघर्ष अब हार गया है।पुलिस वालों का एक और क्रूर चेहरा उजागर हुआ है। गंगा के किनारे अपने बेटे को खोजते खोजते एक पिता को अब पता चला है।कि उसका बेटा तो उसी दिन मर गया था।लेकिन पुलिस के बयानों पर उलझते उलझते दो वर्ष तक पिता ने अपने पुत्र की तलाश की। और आखिरकार पिता को वह खबर सुनने को मिली।जिसे एक पिता कभी सुनना नही चाहता था ।अब ऐसे में सवाल है कि शिव ने अगर आत्महत्या की है।तो उसने लंका थाने से निकलने के बाद 5-6 किलोमीटर दूर तालाब में ऐसा क्यों किया।जबकि 1 किलोमीटर दूर गंगा का पुल मौजूद था। दूसरा ये कि ऐसा क्या हुआ कि कैंपस में घूमता शिव अचानक थाने से निकलने के बाद मृत मिला।साथ ही क्या शिव की मानसिक स्थिति सही नही थी।अगर हां तो पुलिस ने अपनी कस्टडी से बिना बीएचयू प्रबंधन को सूचना दिए क्यों छोड़ा।

समाचार पत्रों की सुर्खियां बना शिव की मौत का मामला

हालांकि शिव के पिता प्रदीप त्रिवेदी ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। क्योंकि शिव की मौत के मामले में अभी कई राज खुलने बाकी है।जिसमें जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
अपने जिगर के टुकड़े की मौत के बाद से दुखी पिता प्रदीप ने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराए जाने की मांग की है और कहा है कि जो भी दोषी हो उन पर पड़ी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए पिता का संघर्ष ही था कि मौत के राज खोलने को प्रशासन विवश हुआ है और हाईकोर्ट के दखल के बाद दुख ही गरीब परिवार को न्याय की आस जगी ह

कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटना को ट्वीट करते हुए पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं सरकार को घेर ते हुए दोषियों पर कार्यवाही की जैसे ही मांग की मामला सुर्खियों में आ गया पर पीड़ित परिवार को अब भी न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है उसने सीबीआई जांच की मांग की है

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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