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IAS के मनोरंजन के लिए बाघों से खिलवाड़ और पन्ना टाइगर रिजर्व में ठेंगे से कानून

IAS के मनोरंजन के लिए बाघों से खिलवाड़ और पन्ना टाइगर रिजर्व में ठेंगे से कानून

IAS के परिवार ने बाघों को घेरकर घंटों किया गया मनोरंजन,,

एसीएस के परिवार के मनोरंजन के लिए नियम विरुद्ध खोल दिए टाइगर रिजर्व के द्वार, घंटो आवभगत में लगा रहा पार्क प्रबंधन

(शिव कुमार त्रिपाठी)

बरसात के सीजन यानी मानसून सीजन में पन्ना टाइगर रिजर्व सहित प्रदेश के सभी पार्क 1 जुलाई से 30 सितंबर तक भ्रमण के लिए पूरी तरह से बंद रहते हैं बाघ दर्शन हो या जंगल भृमण किसी को पार्क के अंदर जाने की अनुमति नहीं रहती सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण और एनजीटी के स्पष्ट आदेश और निर्देश है कि किसी के मनोरंजन के लिए वन्य प्राणियों की निजता के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाएगा लेकिन लगता है कि पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन के सामने सभी नियम बोने पड़ जाते हैं तभी तो पन्ना टाइगर रिजर्व के आला अधिकारियों ने एसीएस के परिवार को खुश करने सभी नियम ताक पर रख दिए और हाथी में बैठा कर खूब मनोरंजन कराया
घटना 15 सितंबर 2018 की है जब वन विभाग के एसीएस ए के सिंह पन्ना आए और खजुराहो मैं परिवार सहित रुके इसके उनके साथ दो बच्चे और 3 महिलाओं का परिवार भी था सुबह जंगल सफारी में टाइगर रिजर्व पहुंचे मडला गेट से प्रवेश करने के बाद भ्रमण करते हुए हिनौता रेंज पहुंचे और जब टाइगर का दीदार नहीं हुआ तो पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने पन्ना रेंज की कटारी में हाथियों से घेरकर टाईगर पी-141 को दिखाया गया बहुत देर तक सभी लोग इससे मनोरंजन करते रहे जानकारी के अनुसार पहले से ही इस बाघिन को घेर कर रखा गया था एसीएस परिवार के मनोरंजन के लिए सुबह से ही बाघों को घेरा गया इसके बाद एसीएस का परिवार गणेश और रूपकली हाथी में सवार होकर बाघ दर्शन करता रहा इनके साथ फील्ड डायरेक्टर KS भदोरिया भी थे इस दौरान बरसात के सीजन में जिस तरीके से टाइगर रिजर्व के अंदर भ्रमण की गतिविधियों को रोका गया है इसके बावजूद टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अधिकारियों ने स्वयं उपस्थित होकर मनोरंजन के लिए बाघों को खदेड़ा और बैठाकर बाघ दर्शन कराएं जानकार इसे नियम विरुद्ध बता रहे हैं कहां किसी भी अधिकारी के परिवार के लिए इस तरीके से बाघों की निजता के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए

टाइगर शो गलत :- दीक्षित
इस घटना के बाद वन्य प्राणियों की जानकारी और वाइल्ड लाइफ में गहरी रुचि रखने वाले अधिवक्ता राजेश दीक्षित ने कहा कि टाइगर शो किसी भी तरीके से करना नियम विरुद्ध है और किसी के परिवार के लिए इस तरीके से टाइगर को घेर कर दिखाया जाना गलत है और नियमों का उल्लंघन है टाइगर रिजर्व प्रबंधन को इस तरह के कार्यों से बचना चाहिए

इस संबंध में जब टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बात करने का प्रयास किया गया तो फिर डायरेक्टर KS भदोरिया का मोबाइल बंद था पता चला कि वह देहरादून ट्रेनिंग में गए हैं डिप्टी डायरेक्टर श्रीमती बासु कनौजिया ने फोन पर कहा कि मॉनसून सीजन में सभी के लिए पार्क पूरी तरीके से बंद रहता है उस दिन में ऑफिशियल काम से जबलपुर गई थी इसलिए इस मामले में मैं कुछ नहीं कह सकती फील्ड डायरेक्टर ही कुछ बता सकते हैं
जो टाइगर रिजर्व का मैदानी अमला है वह घेरकर बाघ देखे जाने और हाथी में सवारी की पुष्टि करता है लेकिन कहता है कि हम प्रतिक्रिया नहीं दे सकते जेडी श्री सक्सेना ने कहा कि इस मामले में प्रतिक्रिया देने के लिए अधिकृत नहीं है और पन्ना रेंज ऑफिसर राजकुमार कहते हैं कि मैं उस दिन उपस्थित नहीं था विडंबना इस बात की है कि जब इस तरीके से बाघों के मामले में टाइगर रिजर्व में खिलवाड़ होगा आखिर कब तक पन्ना टाइगर रिजर्व के बाघ बचेंगे

पहले भी हो चुकी है ऐसी घटनाएं
टाइगर रिजर्व प्रबंधन बाघों के साथ खिलवाड़ पहले से ही करता चला आ रहा है सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने भले ही चाहे जितने सख्त आदेश और निर्देश दिए हो पर पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन इनके साथ खिलवाड़ ही करता है इसके पूर्व तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा के मनोरंजन के लिए बाघ को बेहोश किया गया था और पूरे टाइम मंत्री हाथी पर सवार रही और इसका वीडियो सामने आने के बाद टाइगर रिजर्व प्रबंधन की पूरे देश में खूब किरकिरी हुई थी इतना ही नहीं इसके पूर्व तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव IAS प्रवीर कृष्ण के परिवार के मनोरंजन के लिए इसी तरह घेरकर बाघ दर्शन कराए गए थे और समय-समय पर यह मामला उठता रहा है वाइल्ड लाइफ से जुड़े लोग इस तरह की गतिविधियों का विरोध भी करते हैं पर लगता है टाइगर रिजर्व प्रबंधन सुधरने का नाम नहीं ले रहा

गायब हो चुके हैं पूरे बाघ
2009 में पन्ना टाइगर रिजर्व के सभी टाइगर खत्म हो गए थे बाघ बिहीन होने के बाद सरकार के प्रयास और स्थानीय लोगों के सहयोग के बाद बाघ पुनर्स्थापना योजना सफल हुई है अब 35 से अधिक टाइगर पन्ना टाइगर रिजर्व और लैंडस्केप में भ्रमण करते हैं लेकिन जिस तरीके से टाइगर रिजर्व प्रबंधन ही लापरवाही पूर्वक काम कर रहा है तो यह बाघ कब तक बचेंगे यह एक गंभीर चिंता का विषय है इस पर टाइगर रिजर्व से जुड़े बड़े अधिकारियों को गंभीरता से कार्यवाही करनी होगी और ऐसी अनैतिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना होगा जब वन विभाग का इतना बड़ा अधिकारी ही इस तरीके की अनैतिक गतिविधियों में शामिल हो तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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