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जिंदा जलाए गए युवक के परिजनों से मिलने पहुंचे भाजपा पदाधिकारी, आरोपियों को गिरफ्तार करें - ब्राह्मण संगठन पन्ना की कांग्रेस अध्यक्ष शारदा पाठक के जेष्ठ पुत्र का निधन, पन्ना में फिर कोरोना की दस्तक, 4 नये पॉजिटिव मरीज मिले,,, जिला चिकित्सालय में भर्ती लाश रखकर नेशनल हाईवे में चक्का जाम,,, एक्सीडेंट के बाद मारने और जलाने का आरोप,, यात्री परेशान,, हंगामा जारी

प्रदेशाध्यक्ष VD ने दिया BJP कार्यकर्ताओं को सेवा का मंत्र,,,, तो आपदा प्रबंधन की बैठक में दिखी अनलॉक की छटपटाहट

 जिले के दौरे में पहुंचे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा

मंत्री  ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह के साथ कोरोना प्रबंधन व अस्पतालों की व्यवस्था का लिया जायजा

केंद्र सरकार के 7 वर्ष पूर्ण होने पर भाजपा कार्यकर्ताओं से गरीबों की मदद का आह्वान किया

जिला चिकित्सालय में बाढ़ का उद्घाटन करते हुए सांसद विष्णु दत्त शर्मा एवं मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह

जिला चिकित्सालय में वार्ड का उद्घाटन करते हुए सांसद विष्णु दत्त शर्मा एवं मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह

(शिवकुमार त्रिपाठी) भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा अपने एक दिवसीय panna प्रवास पर आए और उन्हें तीनों विधानसभा पन्ना गुनौर और पवई मैं अपने कार्यक्रम किये  भाजपा कार्यकर्ताओं से गरीबों की मदद करने और सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार की अपील की वही मध्य प्रदेश शासन के मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह के साथ  पुलिस लाइन जाकर पुलिस कर्मचारियों के लिए बनाए गए कोविड अस्पताल का उद्घाटन किया  जहां 14 बैड लगाए गए हैं  ऑक्सीजन युक्त इन बैड़ों में उन पुलिस कर्मचारी और उनके परिवारों का इलाज होगा जिन्हें ड्यूटी के दौरान बीमारी का संक्रमण हो सकता है इसके बाद वे पन्ना जिला अस्पताल पहुंचे जहां उन्होंने बच्चों के इलाज के लिए बनाए जा रहे वार्ड , सिटी स्कैन मशीन लगने के स्थान का जायजा लिया और जिला प्रशासन को आगे की तैयारियां करने के निर्देश दिए

क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक

कलेक्ट्रेट परिसर में आपदा प्रबंधन समिति की बैठक का आयोजन किया गया जिसमें सबसे ज्यादा व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधियों मैं  अनलॉक की छटपटाहट दिखाई दी उन्होंने कहा कि बीते डेढ़ माह से पन्ना का बाजार पूरी तरह से बंद है छोटे व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है रोजगार पूरी तरह ठप है लिहाजा कुरौना के साथ लोगों की रोजगार का भी ध्यान रखा जाए और  दुकानें खोलने जाने की अनुमति प्रदान की जाए जिस पर शहर को  खोलने पर सहमति तो बनी लेकिन यह तय किया गया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज शाम को जो निर्णय लेंगे वही लागू होगा बताया गया panna ग्रीन जोन पर है लिहाजा खुलने की उम्मीद है 

पुलिस लाइन में पुलिस कर्मचारियों के लिए ऑक्सीजन युक्त अस्पताल का उद्घाटन

 रक्तदान

भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष अमित गुप्ता एवं  कृष्ण प्रताप सिंह उर्फ कानहु राजा ने नरेंद्र मोदी सरकार के 7 वर्ष पूर्ण होने पर रक्तदान किया

सांसद और मंत्री का स्वागत करते हुए कलेक्टर संजय कुमार मिश्रा एसपी धर्मराज मीणा

कमलनाथ सीडी दो या जेल जाओ,

पन्ना दौरे पर आए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा कहा की कमलनाथ ने संवैधानिक गोपनीयता की शपथ और पद का दुरुपयोग किया है वे सीडी रखकर लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं पूर्व मुख्यमंत्री को BD ने चेताया कि वे वह सीडी दे मध्य प्रदेश  की जनता से  अपने बयान के लिए माफी मांगे या सलाखों के पीछे पहुंचो , उन्होंने कहा अपनी महिला मित्र के आत्महत्या मामले में फंसे पूर्व मंत्री को बचाने कमलनाथ मध्य प्रदेश सरकार को ब्लैकमेल कर रहे हैं इसीलिए अनर्गल बातें करने लगे है उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ झूठ की खिलाड़ी है और यह अंतरराष्ट्रीय झूठे लोग है इनसे प्रदेश के विकास और सहयोग की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती

कोरोना वैक्सीन लगवाने की अपील

उस स्थान का निरीक्षण जहां सिटी स्कैन मशीन लगाई जानी है

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा एवं मध्य प्रदेश शासन के मंत्री गजेंद्र प्रताप सिंह आम लोगों से अपील की एक कोरोना के इस विकट संकट में वैक्सीन ही बचाव है इसलिए सभी को तत्काल टीका लगवाना चाहिए पन्ना में पर्याप्त मात्रा में सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए टीका मौजूद है इसलिए सिर्फ अपने नजदीकी सेंटरों में जाएं और टीका अवश्य लगवाएं

पुलिस लाइन में बरगद का पौधा रोपण करते हुए

भाजपा कार्यकर्ताओं को कहा संकट के इस दौर में जरूरतमंदों की मदद करें और विपक्षी दलों से अपील की इस संकट के इस दौर में कुछ रचनात्मक कार्य भी करें जिससे समाज का कल्याण हो  इसके बाद उन्होंने देवेंद्रनगर अस्पताल का निरीक्षण किया कुलगवां मढैया में जरूरतमंदों को सामग्री वितरित की कल्दा पहुंचकर आदिवासी को सामग्री वितरण की  लोगों से कोरोना वैक्सीन लगवाने की अपील की उनके साथ  मध्यप्रदेश शासन में मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह, भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष राम बिहारी चौरसिया पूर्व जिलाध्यक्ष  सतानंद गौतम,  जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के पूर्व  अध्यक्ष संजय नगायच, जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज यादव पूर्व विधायक राजेश वर्मा भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष तरुण पाठक वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता रामअवतार पाठक , ब्रजेन्द्र मिश्रा  डब्बू,  पूर्व भाजपा अध्यक्ष जयप्रकाश चतुर्वेदी , अंकुर त्रिवेदी , अधिवक्ता एवं वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता विनोद तिवारी, पूर्व भाजपा अध्यक्ष व बाबूलाल यादव महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष आशा गुप्ता चंद्रप्रभा तिवारी रूप नगायच सहित बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता  कार्यक्रम के दौरान उनके साथ मौजूद रहे

 

भविष्य की आहट

देश बन सकता है कोरोना के उपचार में सिरमौर

 

(डा. रवीन्द्र अरजरियाकोरोना महामारी का दौर मानवीय काया के लिए बेहद कठिनाई भरा है। इस कठिन दौर में जहां पूरा समाज परोपकार में लगा है वहीं कुछ लोगों लाभ कमाने के लिए मानवीयता को तार-तार करने में भी जुटे हैं। नकली दवाओं से लेकर ब्लैक मार्केटिंग तक के अनगिनत मामले सामने आ रहे हैं। अधिकांश निजी अस्पतालों में मरीजों के आर्थिक शोषण की कहानियों कही-सुनी जा रहीं हैं। वहां लाखों का बिल तो एक मामूली सी बात हो गई है। सरकारी अस्पतालों में सीमित संसाधनों के मध्य जहां चिकित्साकर्मी जी-जीन से जूझता रहा वहीं प्रबंधन तंत्र स्वनियंत्रित होकर खोखले दावे करने में कीर्तिमान की प्रतियोगिता जीतना चाहता है। सरकारें निरंतर अपेक्षित बजट उपलब्ध करा रहीं हैं परन्तु उत्तरदायी अमला अपने ढर्रे पर ही काम कर रहा है। पीपीई किट से लेकर सुरक्षा संसाधनों तक की घटिया आपूर्ति ने अनेक चिकित्साकर्मियों की हत्या कर दी। देश के बाहर से आने वाली सहायता भी सरकारी तंत्र के मनमाने क्रियाकलापों के कारण अधिकांश स्थानों पर उचित समय और मात्रा में नहीं पहुंच सकी। अन्य देशों की बात करें तो चीन ने तो कोरोना फैलाने से लेकर उसका निदान करने तक की पूरी परियोजना को पूर्व निर्धारित कर रखा है। यह उसकी व्यवसायिक नीति का महात्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में भारत यदि दूरगामी नीतियों का निर्धारण करके कोरोना का समाधान ढूंढता, तो विश्व मंच पर सर्वोच्च स्थान पा सकता था। वैदिक साहित्य में महामारी से निपटने के अनेक उपायों का उल्लेख है। यह ज्ञान आज भी विज्ञान के सीमित संसाधनों और अनुसंधानों पर भारी है परन्तु अपने ही देश में अपनी ही विरासत पर प्रश्न चिंह लगाने वालों की कमी नहीं है। देश की अपनी आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा (नेचरोपैथी) और सिध्दा जैसी चिकित्सा पध्दतियों को होम्योपैथी और यूनानी के साथ आयुष मंत्रालय के अंतर्गत दोयम दर्जे पर रखा गया है। आईएमए यानी एलोपैथी के जानकारों का समूह। चिकित्सा का अर्थ केवल एलोपैथी तक ही सीमित होकर रह गया है। शब्दों के वास्तविक मायनों का अपहरण कर लिया गया है तभी तो व्यक्तिगत दूरी रखने के निर्देशों को सोशल डिस्टैंसिंग नाम देकर सामाजिक दूरी बनाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जब नीति निर्धारकों ने शब्दों को अर्थविहीन करके उन्हें विकृत करने का जानबूझ कर प्रयास किया है। वास्तविकता तो यह है कि परतंत्रता के दौर में इंग्लैण्ड से आई इस एलोपैथी के अनगिनत गुलाम आज भी अंग्रेजियत के पक्ष में स्वयं के गौरवशाली अतीत को कोसने से बाज नहीं आ रहे हैं। मौके की तलाश में रहने वाले ऐसे लोग जयचंदों के वर्तमान अवतार बनकर निरंतर सक्रिय रहते हैं ताकि देश आंतरिक समस्याओं के मकड जाल में निरंतर व्यस्त रखा जा सके। इन जयचंदों को अनेक देशों से न केवल आर्थिक मदद मिलती है बल्कि राजनैतिक संरक्षण भी मिलता है। स्वाधीनता के बाद भी एलोपैथी को निरंतर बढावा देना इसी षडयंत्र का एक महात्वपूर्ण हिस्सा है। मेडिकल कालेज यानी चिकित्सा महाविद्यालय का अर्थ ही एलोपैथी की बडी संस्था हो गया है। अप्रत्यक्ष रूप में अन्य पैथी को चिकित्सा पध्दतियों के बाहर कर दिया गया है। कोरोना की पहली दस्तक के बाद यदि आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा (नैचरोपैथी) और सिध्दा के जानकारों को प्रोत्साहित करके महामारी के निदान हेतु अनुसंधान में लगाया होता तो आज हमारे पास न केवल स्थाई उपचार होता बल्कि विश्व को कोरोना का सुरक्षा कवच भी उपलब्ध कराने का गौरव प्राप्त होता। वैदिक ग्रंथों में सबसे पहले स्थान पर सिध्द पध्दति को रखा गया हैं जहां तक की कल्पना भी विज्ञान के लिए संभव नहीं है। ऊर्जा हस्तांतरण पध्दति (इनर्जी ट्रांसफर मैथड) से सिध्दों ने हमेशा से ही उपचार किया है। इस पध्दति पर अमेरिका सहित अनेक देशों में तेजी से काम किया जा रहा है और वह दिन दूर नहीं जब हम उसे वहां के पेटेन्ट पर हम इसे आयातित करें। भारत का ही योग विदेशों से योगा होकर लौटता है, तब हम उसे स्वीकार करते हैं। देश की धरती पर जन्मे कृष्ण का दर्शन हमें इस्कान से ही समझ में आता है। मानसिक गुलामी से बाहर आना होगा। चंद लोगों की चालों को समझना होगा। लाशों पर राजनीति करने वाले शायद आने वाले समय में लाशों का कारोबार शुरू करके सत्ता सिंहासन पर आसीत होना चाहते हैं तभी तो मौत के इस तांडवकाल में भी पीडित मानवता पर गिध्द भोज करने में जुटे हैं। राष्ट्रीय संरक्षण के अभाव में सिध्दा के जानकारों का निरंतर अभाव होता जा रहा है। प्राकृतिक चिकित्सा के लिए संघर्ष करने वाली संस्थाओं को दस्तावेजी पैंचों के मध्य निरंतर कसा जा रहा है। सिध्दा और प्राकृतिक चिकित्सा पध्दतियों को सरकारी संरक्षण के न देकर उन्हें समाप्त करने की चालें निरंतर चली जाती रहीं है। आयुर्वेद को यद्यपि कुछ सरकारों व्दारा पोषित करने की बात कही जा रही है परन्तु आयुर्वेद के नाम पर कुछ खास लोगों और कुछ खास संस्थाओं को ही चिन्हित करके लाभ देने के मामले हमेशा ही सुर्खियां बनते रहे हैं। अंग्रेजी में सोशल डिस्टैंसिंग को व्यक्तिगत दूरी का अर्थ बताकर प्रचारित करने वाले लोग सिध्दा, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद के संस्कृत भाषा में स्थापित ज्ञान को भी मनमानी परिभाषायें देने के योजनावध्द अभियान में आज भी हैं। वास्तविकता तो यह है कि यदि कोरोना का स्थाई निदान चाहिए तो हमें अपने वैदिक ग्रंथों की ओर लौटना पडेगा। इन ग्रंथों में तात्कालिक विशेषज्ञों ने सूत्र के रूप में ज्ञान का भंडार संरक्षित कर रखा है जिसे अनुसंधान के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। इस हेतु फिलहाल आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और सिध्दा के जानकारों के अनुसंधान हेतु अलग-अलग मंच प्रदान करके यदि कोरोना के बजट का मात्र 5 प्रतिशत ही ईमानदारी से खर्च कर दिया जाये तो आज भी देश बन सकता है कोरोना के उपचार में सिरमौर। फिलहाल इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी। ( लिखके बुंदेलखंड के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

26 मई को चंद्रग्रहण पूर्वी भारत में 18 मिनट दिखाई देगा।

20 जुलाई के बाद देश की स्थिति सुधरेगी :- ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री

(शिवकुमार त्रिपाठी) 26 मई 2021 वैशाख शुक्ल पूर्णिमा 20 जुलाई के बाद देश की स्थिति सुधरेगी :- ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री खग्रास चंद्रग्रहण भारतीय समय अनुसार 3:15 से 6: 23 तक होगा। समाप्त होते हुए ग्रहण भारत के पूर्वी संभागों में चंद्रोदय होने पर सायंकाल मात्र 18 मिनट के लिए, केवल अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में देखा जा सकेगा इस ग्रहण को अमेरिका, हिंद महासागर, ब्राज़ील, कनाडा, श्रीलंका, चीन रूस, आस्ट्रेलिया आदि देशों में देखा जा सकेगा इस आशय की जानकारी अजय शास्त्री ने दी उनके अनुसार केवल पूर्वी भारत में 26 मई को चंद्रग्रहण वृश्चिक राशि अनुराधा नक्षत्र के तृतीय चरण नू अक्षरोंपरी होने वाला है अतः इन राशि नक्षत्र वाले जातकों को हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड आदि का पाठ करना चाहिए।

शनिदेव 141 दिनों तक चलेंगे उल्टी चाल

ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार 23 मई 2021 को शनि वक्री हो चुके हैं 11 अक्टूबर 2021 तक वक्री रहेंगे। 5 राशियों पर रहेगी शनि की विशेष दृष्टि वर्तमान समय में धनु राशि, मकर राशि, कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती तथा मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैया चल रही है। इसलिए शनि वक्री होने पर इन राशियों के जातकों को सावधानी बरतनी चाहिए। शनि देव के उपाय व हनुमान आराधना करनी चाहिए।

*शनि वक्री से बन सकते हैं युद्ध जैसे हालात*

ज्योतिषीय गणना के अनुसार शनि ग्रह के इस परिवर्तन से 59 साल बाद ऐसी स्थिति बन रही है। जब मंगल और शनि आमने सामने आने वाले हैं पिछली बार ऐसा 1962 भारत-चीन युद्ध के समय हुआ था। शनि मकर राशि में वक्री हो गए हैं वहीं मंगल 2 जून से 20 जुलाई तक कर्क(नीचराशि) में मंगल गोचर करेंगे, शनि व मंगल की सप्तम ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय देश और दुनिया के लिए काफी मुश्किलों भरा रहेगा।
इस समय भीषण प्राकृतिक,विमान विस्फोटक, जीवहानी या अन्य बड़ी घटनाओं होने की आशंका रहेगी। 20 जुलाई के बाद कुछ हालातों में सुधार आएगा।

 

संपर्क करे

“महाविद्याक्षरा ज्योतिष संस्थान”
*ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री*
“धारूहेड़ा चुंगी रेवाड़ी”
मो•7206549883

 

अनाथ हो चुके शावकों का रखवाला बना नर बाघ

उजड़ चुके बाघों के संसार को पुनः बसाने और गैर जंगली बाघिनो को जंगली बनाने का लिख चुका है इतिहास

प्रकृतिक व्यवहार के विपरीत शावको की परवरिश कर रहा नर बाघ

नर बाघ पी-243 जो जंगल में नन्हे शावकों की कर रहा है परवरिश।

 

(शिवकुमार त्रिपाठी)  जंगल की निराली दुनिया में ऐसा कुछ न कुछ घटित होता रहता है, जिसे देख लोग अचंभित होते हैं और हैरत में पड़ जाते हैं। मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में इन दिनों ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है, जिससे वन अधिकारी आश्चर्यचकित तो हैं ही उत्साहित और प्रसन्न भी हैं। दरअसल कम उम्र में ही अनाथ हो चुके चार शावकों की मां बाघिन  पी-213 (32) की गत 15 मई को जब असमय मौत हो गई तो नन्हे शावक बेसहारा हो गये। इन शावकों की सुरक्षा व उनके भविष्य को लेकर हर कोई चिंतित था। लेकिन बाघों के स्वभाव व आचरण से अलहदा इन शावकों का पिता नर बाघ पी-243 नन्हे शावकों की न सिर्फ रखवाली करता है अपितु उनका पालन-पोषण भी कर रहा है। आमतौर पर जो कहीं भी देखने और सुनने को नहीं मिला, वह पन्ना टाइगर रिजर्व में साकार हो रहा है।   इस नर बाघ ने इन नन्हे साहब को को जंगल में संघर्ष कर जीने की तौर तरीके से खाना शुरु कर दिया है और अपना किया हुआ शिकार भी इन्हेंं खिलाया

बाघ पुनर्स्थापना योजना की चमत्कारिक सफलता के साथ-साथ अभिनव और अनूठे प्रयोगों के लिए भी पन्ना टाइगर रिजर्व देश व दुनिया में जाना जाता है। यह वन क्षेत्र दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों तथा वन अधिकारियों के लिए एक ऐसा केंद्र बन चुका है, जहां आकर वे यहां की कामयाबी व अनूठे प्रयोगों को न सिर्फ देखते और समझते हैं बल्कि अध्ययन भी करते हैं। अभी हाल ही में गत 15 मई को पन्ना टाइगर रिजर्व की 6 वर्षीय युवा बाघिन की अज्ञात कारणों के चलते मौत हो गई थी। इस बाघिन के चार नन्हे शावकों की जिंदगी में यह किसी वज्रपात से कम नहीं था। इन नन्हे शावकों की सुरक्षा, संरक्षण तथा उनके भविष्य को लेकर पार्क प्रबंधन ऊहापोह की स्थिति में था। प्रबंधन के सामने सिर्फ दो ही विकल्प थे, पहला यह कि उनका रेस्क्यू कर किसी सुरक्षित जगह में रखकर उनका पालन-पोषण हो। लेकिन यह उनके लिए किसी सजा से कम नहीं था क्योंकि चारों शावक स्वाभाविक प्राकृतिक जीवन से वंचित रह जाते। दूसरा विकल्प शावकों को जंगल में ही चुनौतियों के बीच संघर्ष करते हुए अपने आप को बचाने का अवसर प्रदान करना था, जो रिस्की और शावकों की जिंदगी के लिए खतरनाक था।

नर बाघ के व्यवहार को देख लिया गया साहसिक फैसला

चट्टान पर बैठे शावक तथा निकट ही मौजूद नर बाघ पी-243

नर बाघ पी-243 जो शावकों का पिता है, उसके अप्रत्याशित और शावकों के प्रति सकारात्मक व्यवहार को देख पार्क प्रबंधन ने शावकों को रेस्क्यू कर उन्हें किसी जू में भेजने के बजाय खुले जंगल में ही रखने का बेहद साहसिक निर्णय लिया है। क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व उत्तम कुमार शर्मा बताते हैं कि बाघिन की मौत के बाद से नर बाघ उसी इलाके में हैं जहां चारों शावक हैं। नर बाघ यह एरिया छोड़कर कहीं भी अन्यत्र नहीं गया। सबसे ज्यादा हैरत वाली बात यह है कि शावक भी नर बाघ के साथ सहज रूप से चहल-कदमी कर रहे हैं तथा उसके पीछे-पीछे घूमते और टहलते हैं। नर बाघ न सिर्फ शावकों की देखरेख कर रहा है, बल्कि उनके लिए खाने का भी प्रबंध करता है। श्री शर्मा बताते हैं कि आमतौर पर नर बाघों में इस तरह का व्यवहार देखने को नहीं मिलता। बाघों की जीवन चर्या व खुले जंगल में उनके व्यवहार पर जो भी शोध व अध्ययन हुए हैं, कहीं भी यह बात निकलकर नहीं आई कि मां की मौत होने पर अनाथ शावकों की देखरेख नर बाघ करता हो। लेकिन पन्ना में यह चमत्कार देखने को मिल रहा है। फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि मेने वन्यप्राणी शोध में कहीं भी ऐसा व्यवहार नहीं देखा न ही किताबों में पढ़ने को मिला मैं स्वयं इस व्यवहार से आश्चर्यचकित और आशान्वित हूं

  बाघ पी-243 को पहनाया गया रेडियो कॉलर

जंगल में नर बाघ के पीछे विचरण करते चारो शावक।

बाघिन की मौत के बाद अनाथ हो चुके शावकों के प्रति नर बाघ का अच्छा व सहयोगात्मक व्यवहार देखकर पार्क प्रबंधन ने बाघ पी-243 को रेडियो कॉलर पहनाकर सूझबूझ का परिचय दिया है। ऐसा करने से न सिर्फ नर बाघ पी-243 की मॉनिटरिंग हो रही है, बल्कि उसके साथ रह रहे चारो शावकों पर भी नजर रखी जा रही है। यदि सब कुछ सामान्य रहा और आने वाले तीन-चार माह तक नर बाघ इसी तरह शावकों की देखरेख करता रहा, तो शावक एक वर्ष के होने पर खुद ही शिकार करने व स्वतंत्र रूप से अपना जीवन जीने में सक्षम हो जाएंगे। पन्ना टाइगर रिजर्व का यह अभिनव प्रयोग यदि सफल रहा तो भविष्य में अनाथ शावकों के लिए यह एक मिसाल बनेगा। मालूम हो कि बाघिन की मौत के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि नर बाघ शावकों को मार सकता है, लेकिन फिलहाल यह आशंका निर्मूल साबित हुई है।

बाघ के साथ अठखेलियां करते शावकों का वीडियो जारी

जंगल में नर बाघ पी-243 के साथ चहल-कदमी व अठखेलियाँ करते शावकों का एक दिलचस्प वीडियो पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा जारी किया गया है। इस वीडियो को देखकर प्रतीत होता है कि चारों अनाथ शावक नर बाघ (पिता) के साथ सहज हैं। बाघ जंगल में जहां जाता है शावक भी उसके पीछे चलते हैं, जैसा मां के साथ चलते थे। बाघ के आसपास ही चारो शावक चट्टानों में बैठे नजर आते हैं। वन अधिकारियों ने बताया कि नर बाघ जब शिकार करता है तो वह इन शावकों को भी खिलाता है। अधिकारी बताते हैं कि नर बाघ व शावकों की सघन निगरानी की जा रही है। इसके लिए इलाके में दो प्रशिक्षित हाथियों सहित वन अमले को तैनात किया गया है।

वीडियो का अवलोकन करें –

(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना टाइगर रिजर्व में लॉकडाउन के बीच 4 शावक की मां एक युवा बाघिन

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p-213(32) की मौत हो गई है इस वयस्क बाघिन की मौत से प्रबंधन में खलवाली फैदा कर दी है पन्ना में ही पैदा हुई और यही के जंगलों पली-बढ़ी युवा बाघिन p-213(32) की टाइगर रिजर्व के गहरी घाट रेंज की कोनी बीट में मौत
हो गई थी इससे चार शावक अनाथ हो गए इन को सुरक्षित बचाने के लिए टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने तलाशी अभियान शुरू किया है पर अब तक सबको का कोई पता नहीं चला जंगल में टाइगर रिजर्व की टीमें दिन-रात सर्चिंग कर रही है क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि जिस जगह टाइग्रेस मृत्य मिली थी वही मेल टाइगर p-243 मौके पर मौजूद है इस कारण हमें खोजने में दिक्कत हो रही है मैदानी अमला पैदल सर्चिंग नहीं कर पा रहा है फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि 5 हाथियों की 3 टीम बनाई गई है तीन टीमों में हमारे मैदानी कर्मचारी और अधिकारी दिनभर सर्चिंग करते रहे क्योंकि कोनी नाले की लंबाई अधिक है छोटे-छोटे नाले भी आकर मिलते हैं कई जगह बहुत सारी गुफाएं हैं इस कारण शावको को खोजने में परेशानी हो रही है यदि यह शावक हमें मिल जाते हैं तो तत्काल रेस्क्यू करने का प्रयास करेंगे फील्डडायरेक्टर ने कहा जो बाघ मौके पर है वह शावको का पिता है क्योंकि इसमें दो नर और दो मादा शावक है इसलिए इन बच्चो को बचाना भी बहुत जरूरी है यदि नर बाघ इन बच्चों की मदद करेगा तो ज्यादा सुरक्षित रह पाएंगे पर जंगली जानवरों के व्यवहार पर कोई अंदाज नहीं लगाया जा सकता उत्तम कुमार शर्मा ने आगे कहा कि हमने लगातार ट्रेसिंग और ट्रैकिंग की योजना बनाई है 10 कैमरे भी लगाए हैं जहां भी इनकी फोटोग्राफ्स मिलेंगे वहां खोजने का प्रयास करेंगे संभव है मां की मौत के बाद यह शावक कहीं आस-पास गुफाओं में घुस गए हो हमें उम्मीद है कि यह शावक मिल जायेगे और हम इन को सुरक्षित बचा पाएंगे

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पन्ना टाइगर रिजर्व में युवा बाघिन की मौत

8 माह की 4 शावक हुए अनाथ

 (शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना टाइगर रिजर्व में लॉकडाउन के बीच 4 शावक की मां एक युवा बाघिन p-213(32) की मौत हो गई है इस वयस्क बाघिन की मौत से प्रबंधन में खलवाली फैदा कर दी है पन्ना में ही पैदा हुई और यही के जंगलों पली-बढ़ी युवा बाघिन p-213(32) की टाइगर रिजर्व के गहरी घाट रेंज की कोनी बीट में मौत हुई है इस खबर की पुष्टि करते हुए फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि यह वयस्क बाघिन 5 वर्ष 3 महीने की थी इसके आगे की पैर में चोट होने से लगड़ा रही थी जब हमें जानकारी मिली तो बीते 2 दिन से डॉक्टर संजीव कुमार गुप्ता इसका इलाज कर रहे थे कुछ एंटीबायोटिक दवा भी दी थी लेकिन आज सुबह कोनी बीट के नाले के पास मृत अवस्था में पाई गई थी क्षेत्र संचालक ने बताया कि इसका प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार किया गया है मौत का वास्तविक कारण पता लगाने के लिए शरीर के अंगों को जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है यह भी पता लगाया जाएगा कि कहीं बाघिन में किसी विषाणु का संक्रमण तो नहीं था पर इस बाघिन से की मौत से टाइगर रिजर्व में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है पन्ना टाइगर रिजर्व द्वारा जारी प्रेस नोट में बताया गया है कि आसपास कहीं संदिग्ध गतिविधियां नहीं मिली है और शिकार जैसी संभावनाएं नहीं है फिर भी हम समस्त पहलुओं की जांच कर रहे हैं

 

टाइगर के मृत अवस्था का चित्र

सूचना के बाद टाइगर रिजर्व प्रबंधन के मैदानी कर्मचारियों के अलावा फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर जरांडे ईश्वर रामहरी , बाघ विशेषज्ञ डॉक्टर संजीव कुमार गुप्ता सहित रेंजर और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और बरामदगी की कार्यवाही करते हुए पोस्टमार्टम कर शरीर के सभी अंगों को जला दिया गया

शावकों की जंगल मे तलाश शुरू

फाइल फोटो

इस युवा बाघिन की मौत के बाद से इसके 8 माह की 4 शावक जंगल में गायब है मां की मौत के बाद अनाथ हुए चारों शावकों की तलाश शुरू कर दी गई है फिल्म डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि अभी हम इन शावकों की तलाश कर रहे हैं पर अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है क्योंकि यह शावक अपनी मां के साथ ही रहते थे इसलिए अब जंगलों में स्वच्छंद सरवाइव कर पाना मुश्किल है ऐसे में हम शावकों का पता लगाकर रेस्क्यू करेंगे इसके बाद वाइल्ड लाइफ के विशेषज्ञ एवं उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन के आधार पर इन्हें कहां रखना है यह तय किया जाएगा फिलहाल हमारी चिंता इन सभी शावकों को सुरक्षित खोजने की है हमें उम्मीद है कि हम शीघ्र ही इन शावकों को खोज पाएंगे और सुरक्षित रेस्क्यू करने का प्रयास करेंगे उन्होंने कहा कि पन्ना में इंसाफ को को रखने का प्रबंधन नहीं है लिहाजा वरिष्ठ अधिकारियों की मार्गदर्शन के आधार पर ही तय हो पाएगा कि कहां रखना है

बरगडी के बाड़े में रखकर शावकों की जाए परवरिश

पन्ना टाइगर रिजर्व की बरगडी में एक विशाल इंक्लोजर बना हुआ है यहां शावकों को रखा जा सकता है क्योंकि जब सभी बाघ खत्म हो गए थे तब इन्हें यह एंक्लोजर शावकों और टाइगरों के रखने के लिए बनाया गया था पन्ना में जो टी-4 और टी-5 बाघिन कान्हा से लाकर छोड़ी गई थी वह ऐसे ही अनाथ हुई थी और मानवीय हस्तक्षेप में पली-बढ़ी इन बाघों को जंगली बनाया गया था यदि इन शावकों को यही पालकर जंगली बना कर पुनः जंगल में छोड़ा जाता है तो टाइगर रिजर्व के इतिहास में बड़ी सफलता मानी जाएगी जिसका प्रयास किया जाना चाहिए वाइल्ड लाइफ के जानकार और प्रकृति प्रेमियों ने सभी शावकों को पन्ना में ही पालने की व्यवस्था करने की मांग की है

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