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बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर ने पन्ना में रोपे पौधे,,, सवा11 लाख पेड़ लगाने और बचाने का संकल्प

बागेश्वरधाम सरकार ने पन्ना में रोपे पौधे

सवा 11 लाख वृक्ष लगाने और बचाने का संकल्प

गांव गांव बागेश्वर बगीचा बनाने का दिया संदेश

बागेश्वर वाटिका में पौधा रोपते हुए महाराज श्री

(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना में आज अचानक बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर श्री धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज जेल के पास पुरुषोत्तमपुर पहुंचे और उन्होंने 51 पौधे रोपे है धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज ने पीपल और बरगद का पेड़ लगाने के बाद कहा कि कोरोना की इस भीषण महामारी में ऑक्सीजन की कमी से लोगों को कष्ट उठाना पड़ा है यह ऑक्सीजन की कमी लगातार वृक्षों की कटाई के कारण निर्मित हुई है और इसी कारण कोरोना जैसी महामारी ने गंभीर रूप धारण किया बागेश्वर धाम से शिष्य मंडल ने यह फैसला किया है कि इस वर्ष पूरे बुंदेलखंड में सवा ग्यारह लाख वृक्ष लगाए जाएंगे और सभी वृक्षों को बचाया भी जाएगा

बागेश्वर वाटिका का उद्घाटन करते हुए धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज

पन्ना जेल परिसर के बाजू में बागेश्वर वाटिका का उद्घाटन करते हुए धीरेंद्र कृष्ण महाराज जी ने पूरे विधि-विधान और पूजन पाठ के साथ सबसे पहले पीपल का वृक्ष लगाया और इसके बाद बरगद पौधा रोपा सभी शिष्यों से अपील की कि एक शिष्य इस वर्ष 5, 11 , 21 या 101 वृक्ष लगाने और इनको बचाने का संकल्प लें और हनुमान जी महाराज को साक्षी मानकर यह वादा करें कि इन सभी वृक्षों को पाल पोस कर बड़ा करेंगे और इन वृक्षों की सेवा के साथ अपने नजदीकी मित्रों और परिजनों को वृक्षों के महत्व को बताएंगे जिससे पूरे बुंदेलखंड को हरा-भरा किया जा सके महाराज श्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहां आज से 20 वर्ष पहले जंगल हुआ करता था

पौधारोपण का दृश्य

अब वह इलाका वीरान हो गया है लगातार वृक्ष कट रहे हैं ऐसे में मानव जाति के साथ प्रकृति में संकट पैदा होगा प्राकृतिक नुकसान के कारण महामारी आ रही हैं इसलिए उन्होंने अपील की कि प्रकृति को बचाना है गौ माता की भी सेवा करना है उन्होंने संकल्प दिलाया कि गौशाला नहीं उपाय एक हिंदू एक गाय के संकल्प से ही गाय को बचाया जा सकता है और वृक्ष लगाकर प्रकृति की सेवा की जा सकती है इस मौके पर बागेश्वर धाम शिष्य मंडल के भक्तगण सतानंद गौतम , मनीष मिश्रा, संविदाकार वशिष्ट उर्फ मनु चौबे, नरेंद्र शुक्ला तरुण पाठक शिवकुमार त्रिपाठी, उदय मिश्रा, विष्णु पांडे, रामअवतार उर्फ बबलू पाठक कल्लू रावत , अज्जू गर्ग, शैलेश नगायच ,बड़े बेटा यादव, अरविंद यादव संजय तिवारी उर्फ मंटू सौरव अरजरिया, दीपक रावत, गौरी शंकर गुप्ता भारतेंदु रावत सहित बड़ी संख्या में बागेश्वर धाम से जुड़े भक्तों और शिष्य गण मौजूद रहे

बधाई देने तक सीमित न रहे पर्यावरण दिवस,,

स्वच्छ वातावरण ही अच्छे स्वास्थ्य का आधार

 

( शिवकुमार त्रिपाठी) आज पूरी दुनिया पर्यावरण दिवस मना रही है 1972 में पर्यावरण के महत्व को समझा और उसे बचाने की प्रयास शुरू किए गए पर भारतीय संस्कृति पुरातन समय से ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती रही है यही कारण है कि हिंदू धर्म में वृक्ष को देवता के समान माना गया है कई त्योहारों में वृक्षों की पूजा की जाती है बट सावित्री में बरगद की पूजा, अक्षय तृतीया ऑवला के पेड़ की पूजा , हरछठ मैं  पलाश और बेरी के पेड़ की पूजा जैसे यह त्यौहार है जिनमें वृक्षों की ही पूजा की जाती है और इन्हीं के आशीर्वाद से सुखद जीवन और समृद्धि की कल्पना  लोग करते हैं  लेकिन जिस तरीके से भौतिकवादी सोच और बलात दोहन ने पर्यावरण को क्षति पहुंचाई है अब बेहद खतरनाक स्थितियां निर्मित हो रही है ग्लोबल वार्मिंग , प्राकृतिक आपदाओं , बढ़ते तापमान जैसी घटनाएं तो सामने दिख ही रही है पृथ्वी में ऐसी हल चल  होती हैं जो चिंताजनक है लेकिन यदि भारतीय संस्कृति के अनुसार जीवन पद्धति को लोग अपना ले तो पर्यावरण को संरक्षित ही नहीं स्वच्छ बनाकर चिंरजीवी किया जा सकता है भौतिक सुख सुविधाओं और लग्जरी सोच ने पर्यावरण पर कुठाराघात किया है आज फेसबुक, व्हाट्सएप , टि्वटर के माध्यम से लोग पर्यावरण दिवस की बधाइयां दे रहे हैं  यह मात्र 5 जून तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए अगर सुखमय जीवन जीना है तो पृथ्वी, नदी , जल , पेड़ सभी को स्वच्छ बनाना होगा और हर व्यक्ति को स्वयं की जिम्मेदारी का एहसास करना होगा

प्रकृति को नजदीक से निहारते ,,, पन्ना टाइगर रिजर्व

पर्यावरण संरक्षण की संस्थाएं  भी गैर जिम्मेदार

 पर्यावरण संरक्षण के लिए देश में कई वैधानिक संस्थानो का निर्माण किया गया है जिसमें सरकार करोड़ों रुपए प्रतिवर्ष खर्च करती है पर इन संस्थाओं पर बैठे जिम्मेदार लोग अपने मूल कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर रहे यही कारण है की नदियों में बढ़ते प्रदूषण , रेत का अवैध उत्खनन , पेड़ों की कटाई ,  अवैध खनन तमाम मामले सामने आने के बावजूद इन संस्थाओं द्वारा कोई कठोर कदम नहीं उठाए जाते इस कारण पर्यावरण और अधिक क्षति होती  हैं नदियां सूख रही है धरती बंजर होती जा रही पर्यावरण संरक्षण संस्थाएं शांत दिख रही है


पूजनीय बट वृक्ष के सामने

भारतीय हिंदू संस्कृति में  पीपल बरगद  जैसे पेडो की लकड़ियां  आज भी लोग नहीं काटते न ही जलाऊ में इसका उपयोग करते हैं मतलब साफ है  कि हिंदू संस्कृति  पर्यावरण के प्रति  जिम्मेदार रही है  अब लोगों को स्वयं की जिम्मेदारी का एहसास भी करना होगा तभी सच्चे मायने में पर्यावरण दिवस  की सफलता होगी

 

 पर्यावरण दिवस

देश में ऐसे दृश्य दिखे तो बचेंगे जंगल

अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में मनाया जाता है  जो प्रत्येक वर्ष 5 जून को, विश्वभर में पर्यावरण के नकारात्मक प्रभावों को रोकने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। इस अभियान की शुरुआत करने का उद्देश्य वातावरण की स्थितियों पर ध्यान केन्द्रित करने और हमारे ग्रह पृथ्वी के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव का भाग बनने के लिए लोगों को प्रेरित करना है।

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

प्रदूषण रहित सदानीरा केन नदी,, जिस पर अब हो रहा है आघात

विश्व पर्यावरण दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा मानव पर्यावरण के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अवसर पर 1972 में हुई थी। हालांकि, यह अभियान सबसे पहले 5 जून 1973 को मनाया गया। यह प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है और इसका कार्यक्रम विशेषरुप से, संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किए गए वार्षिक विषय पर आधारित होता है। 1987 में इसके केंद्र को बदलते रहने का सुझाव सामने आया और उसके बाद से ही इसके आयोजन के लिए अलग अलग देशों को चुना जाता है। इसमें हर साल 143 से अधिक देश हिस्सा लेते हैं और इसमें कई सरकारी, सामाजिक और व्यावसायिक लोग पर्यावरण की सुरक्षा, समस्या आदि विषय पर बात करते हैं

 

एमपी में 12वीं की परीक्षाएं रद्द

श्रेणी सुधार के लिए दोबारा दे पाएंगे परीक्षा

Cm  शिवराज ने की घोषणा

फाइल फोटो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

(शिवकुमार त्रिपाठी) – भोपाल मध्य प्रदेश में इस साल 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएगी प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज इस बात का ऐलान किया है मुख्यमंत्री ने कहा है कि बच्चों की जिंदगी अनमोल है केरियर की चिंता बाद में कर लेंगे।इस समय जब सभी कोरोना का संकट झेल रहे है। बच्चो पर परीक्षा का बोझ डालना उचित नही है। 12 का रिजल्ट कैसे बने इसके लिए मंत्रियों का एक समूह बनाया गया है।जो विशेषग्यों से चर्चा कर यह तय करेगा कि रिजल्ट के लिए आंतरिक मूल्यांकन हो या अन्य कोई आधार अपनाया जाए। उस आधार पर तय करेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 वी की परीक्षा पहले ही न करने का फैसला किया गया है। उनके रिजल्ट आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर होगा।

सीएम ने की घोषणा, श्रेणी सुधार की परीक्षा दे सकेंगे छात्र

फोटो – CM शिवराज

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12वीं की परीक्षाएं निरस्त करने के बाद यह भी बयान जारी किया है कि जो छात्र बेहतर रिजल्ट के लिए दोबारा परीक्षा देना चाहते हैं उन्हें कोरोना की समप्ति के बाद दोबारा अवसर दिया जाएगा यानी श्रेणी सुधार की परीक्षा छात्र दोबारा दे सकते हैं ज्ञात हो कि कल सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं रद्द की गई थी तभी से उम्मीद लगाई जा रही थी कि मध्यप्रदेश में अपने बोर्ड की सभी परीक्षाएं निरस्त कर देगा