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पन्ना टाइगर रिजर्व में संदिग्ध परिस्थितियों में बाघ की फिर मौत, 15 दिन में दो टाइगरो की मौत 2009 की शुरुआत तो नहीं,,

पन्ना टाइगर रिजर्व में संदिग्ध परिस्थितियों में बाघ की फिर मौत, 15 दिन में दो टाइगरो की मौत 2009 की शुरुआत तो नहीं,,

बफर क्षेत्र के डाला नाला में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला बाघ का शव

15 दिनों में दूसरी घटना,

पन्ना टाइगर रिजर्व में फिर बाघ की मौत

 (शिवकुमार त्रिपाठी)  आंध्रप्रदेश टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश से बाघ मांग रहा है  जब से यह डिमांड आई है तब से प्रदेश सरकार फूली नहीं समा रही कि हमने खोया हुआ टाइगर स्टेट का दर्जा वापिस पा लिया लेकिन बाघों के जीवन से संकट डाला नहीं है  पूरे मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व से बाघों के मौत की खबर आ रही है जो गंभीर चिंता का विषय है एक बार फिर मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से दुखद खबर सामने आई है। जहां एक युवा बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई है बाघ का शव बफर क्षेत्र के हांथी डोल इलाके में मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पीटीआर के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे, इस युवा नर बाघ का शव बरामद किया । बाघ की मौत के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि यह वही बाघ है जो तारा गांव के आसपास घूमता रहता था।और उसे 26 अप्रैल को ट्रेंकुलाइज कर वापिस जंगल में छोड़ा गया था। ऐसे में बाघ की मौत पर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। बीते 15 दिनों के भीतर यह दूसरी घटना है 

पन्ना टाइगर रिजर्व फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि 26 अप्रैल 2026 को इसी बाघ का तारा गांव से रेस्क्यू किया गया था फिर रेडियो कॉलर पहनाया गया 24 घंटे निगरानी की जा रही थी लेकिन दुर्भाग्य है आज इसकी मौत हो गई तमाम प्रकार के पहलुओं की जांच की रही की जा रही है जो भी तत्व सामने आएंगे उस पर कार्रवाई की जाएगी, प्रथम दृष्टा उन्होंने फाइटिंग की संभावना जताई है, वरिष्ठ वन विभाग प्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव गुप्ता ने 100 का पोस्टमार्टम किया और अंगों की बिसरा प्रिजर्व कर  वैज्ञानिक परीक्षण के लिए  भेजे जा रहे हैं जिससे मौत की कर्म का पता चल सकेगा  इस नर बाघ की मौत बेहद चिंता का विषय है जो पन्ना टाइगर रिजर्व की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है कई ऐसे प्रश्न खड़े हैं जिसकी जवाब खोजना बहुत जरूरी है

1  24 घंटे निगरानी और रेडियो कॉलर होने की बावजूद इस न बाघ की मृत्यु कैसे हुई

2-  जब यह टाइगर लगातार आबादी बस्ती में जा रहा था और इस पकड़ लिया गया तो कुछ समय के लिए बदगडी स्थित एंक्लोजर में क्यों नहीं रखा गया

3- जंगल से पुनः आबादी बसती की ओर इस टाइगर को क्यों जाने दिया गया

4- जांच कब पूरी होगी और दोषियों पर क्या कार्यवाही होगी

5- क्या वातानुकूलित कमरों में बैठे अधिकारी भी निगरानी की जिम्मेदारी लेगे 

 ज्ञात होगी 2009 में पन्ना बाघ विहीन हो गया था बाहर से लाकर टाइगर बसाए गए और अब इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है बीते कुछ दिनों से टाइगरों की मौत बड़ी लापरवाही की ओर इशारा कर रही है, अगर प्रबंध नहीं चेता तो इसकी गंभीर परिणाम सामने आएंगे


✎ शिव कुमार त्रिपाठी

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