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देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार दोपहर को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार दोपहर को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया।

नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार दोपहर को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वह 93 वर्ष के थे। विगत जून माह से वे अस्पताल में भर्ती थे।  उनकी किडनी, नली में संक्रमण, सीने में जकड़न और पेशाब की नली में संक्रमण होने के चलते एम्स में भर्ती कराए गए थे। एम्स ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने 5 बजकर 5 मिनट पर अंतिम सांस ली|  अस्पताल में वाजपेयी जी को वेंटिलेटर पर रखा गया  था। उनके निधन की सूचना के बाद भाजपा के दिल्ली कार्यालय व अटल जी के निवास पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी तादाद में भीड़ बढ़ने लगी है। देश के अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री जिनमें शिवराज सिंह चौहान उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ सहित अन्य तमाम नेता भी दिल्ली पहुंच गए हैं।

आज सुबह एम्स की तरफ से हेल्थ बुलेटीन जारी किया गया था। बुलेटिन में उनकी हालत नाजुक बताई गई थी। पिछले 24 घंटे में उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू समेत कई बड़े नेताओं ने एम्स पहुंचकर उनका हाल जाना था। पिछले 3 दिनों से उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी। इसी को देखते हुए बुधवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम नेता उनके स्वास्थ्य जानने अस्पताल पहुंचे थे। रात में उनकी तबीयत और बिगड़ती चली गई। इसी बीच उनके तमाम परिजनों को खबर कर दिल्ली आने को कह दिया गया था और आखिरकार गुरुवार दोपहर उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन से ना केवल भारत बल्कि समूचा विश्व स्तब्ध रह गया। देश ने एक ऐसे नेता को दिया जो राजनीति की अभूतपूर्व मिसाल थे।

बता दे कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर, 1924 को जन्म अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं की किताबें खूब पॉपुलर रही हैं, और उनकी कविताओं को कई मंचों पर गाया भी जाता रहा है। भारतीय राजनीति में अटल-आडवाणी की जोड़ी हमेशा चर्चा में रहती थी। भाजपा के दोनों दिग्गज नेताओं ने मिलकर पार्टी को सत्ता के शिखर तक पहुँचाया। अटल बिहारी की भाषण शैली और उनकी बेबाकी के लिए विपक्ष भी हमेशा उनकी सराहना करता रहा है।अटल बिहारी वाजपेयी 3 बार देश के प्रधानमंत्री बने। सबसे पहले वे 1996 में 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने।  दूसरी बार वे 1998 में प्रधानमंत्री बने। सहयोगी पार्टियों के समर्थन वापस लेने की वजह से 13 महीने बाद 1999 में फिर आम चुनाव हुए। 13 अक्टूबर को वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 2004 तक अपना कार्यकाल पूरा किया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे हैं।

राजनीति से लेकर फिल्मों तक गहरा नाता

अटल बिहारी वाजपेयी की किताबों में ‘न दैन्यं न पलायनम्’, ‘मृत्यु और हत्या’ और ‘अमर बलिदान’ प्रमुख हैं, और उनकी कविताओं को युवाओं में खूब पढ़ा जाता है, उनकी किताबें युवाओं के बीच काफी पॉपुलर हैं। राजनीति में रहने के साथ-साथ उनका साहित्य, कविताओं और फिल्मों से भी खास नाता रहा है। अटल जी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री और मथुरा से बीजेपी की सांसद हेमा मालिनी के बहुत बड़े प्रशंसक थे। अटल जी को हेमा मालिनी की 1972 में आई फिल्म सीता और गीता इतनी पसंद आयी थी कि उन्होंने इस फिल्म को 25 बार देखा था। इस बात का खुलासा खुद हेमा मालिनी ने किया था। 

इंदिरा गांधी को कहा था ‘दुर्गा’

कहा जाता है कि 1971 में भारत-पाकिस्‍तान युद्ध की पृष्‍ठभूमि में संसद में अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने संबोधन में इंदिरा गांधी को ‘दुर्गा’ कहकर संबोधित किया। वह उस दौरान हालांकि विपक्ष के नेता थे लेकिन युद्ध में भारत की उल्‍लेखनीय सफलता और इंदिरा गांधी की भूमिका के कारण उनको ‘दुर्गा’ कहकर संबोधित किया। उस युद्ध में बांग्‍लादेश का उदय हुआ और पाकिस्‍तान के 93 हजार सैनिकों को भारतीय सेना ने बंधक बनाया। हालांकि बाद के वर्षों में इस पर विवाद खड़ा हुआ कि क्‍या वाजपेयी ने ऐसा कहा था या नहीं।इस संबंध में वरिष्‍ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी की किताब ‘हार नहीं मानूंगा- एक अटल जीवन गाथा’ में इस बात का जिक्र किया है। इस किताब में दावा किया गया है कि एक बैठक में वाजपेयी ने कहा था इंदिरा ने अपने बाप नेहरू से कुछ नहीं सीखा। मुझे दुख है कि मैंने उन्हें दुर्गा कहा।

अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में 10 अनसुनी बातें

-अटल बिहारी वाजपेयी पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे, जिन्‍होंने अपना कार्यकाल पूरा किया था।

-अटल बिहारी वाजपेयी 1996 में पहली बार 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बने थे।

-पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कानपुर के डीएवी कॉलेज में अपने पिता के साथ कानून की पढ़ाई की है. दोनों एक ही कमरे में रहते थे।

-प्रधानमंत्री रहते हुए नेशनल हाईवेज डेवलप प्रोजेक्‍ट (एनएचडीपी) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) जैसी बड़ी और प्रमुख योजनाएं उन्‍हीं के कार्यकाल में शरू की गईं. एनएचडीपी के तहत देश के चार प्रमुख महानगरों मुंबई, दिल्‍ली, चेन्‍नई ओर कोलकाता को आपस में सड़क से जोड़ा गया. वहीं पीएमजीएसवाई के तहत देश के गांवों को जोड़ने के लिए हर मौसम में कारगर सड़कों का जाल बिछाया जाना था।

 -प्रधानमंत्री रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की अर्थव्‍यवस्‍था को सुधारने और विश्‍व में देश की बेहतर छवि बनाने के लिए निजीकरण को लेकर अभियान भी चलाया।

-अटल बिहारी वाजपेयी 9 बार सांसद के रूप में लोकसभा पहुंचे. साथ ही दो बार राज्‍यसभा भी पहुंचे।

-1977 में अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बने. वे मंत्री बनने वाले जन संघ के पहले सदस्‍य हैं।

-वाजपेयी को 1992 में पद्मविभूषण और 1994 में बेस्‍ट पार्लियामेंटेरियन अवॉर्ड मिला।

-2014 में राष्‍ट्रपति कार्यालय ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय को देश का सर्वोच्‍च सम्‍मान देने की घोषणा की थी।

-उन्‍हें लोग प्‍यार से ‘बाप जी’ भी कहते हैं. 2005 के बाद स्‍वास्‍थ्‍य कारणों के चलते सार्वजनिक जीवन से दूर होते चले गए।

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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