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बहुचर्चित नहरपट्टी जमीन मामले में ग्रीनट्रिब्यूनल (NGT) का फैसला, याचिका खारिज, 25हजार का जुर्माना, जारी रहेगा पथ बिहार का निर्माण

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष दिव्या रानी सिंह के कब्जे से छुड़ाकर प्रशासन कर रहा है पथ विहार का निर्माण

हाईकोर्ट से भी लगा था जुर्माना

सभी न्यायिक बाधाएं दूर हुई

नगरपालिका कर रही है पथ विहार का निर्माण

(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना शहर के सिविल लाइन की बेशकीमती जमीन एवं नहरपट्टी के बहुचर्चित मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी का फैसला आया है जिसमें फरियादी की याचिका खारिज करते हुए ₹25000 कास्ट लगाई है प्रशासन से नियमानुसार वसूलने करने का आदेश दिया गया है साथ ही सभी बाधाएं दूर हो गई, अब नगर पालिका परिषद पन्ना बे रोकटोक इस बहुचर्चित जमीन मैं पथ बिहार का निर्बाध गति से निर्माण कर सकेगा अड़ंगे लगाए जाने के सभी प्रयास विफल हो गए हैं

ज्ञात हो कि करोड़ों रुपए की इस बेशकीमती जमीन में कांग्रेश पार्टी की पूर्व जिला अध्यक्ष दिव्या रानी सिंह एवं उनकी मां का फलदार वृक्ष लगाने के नाम पर कब जा था जबकि मौके पर एक भी फलदार वृक्ष नहीं है इस बहुचर्चित जमीन मामले में जब जिला प्रशासन ने कार्यवाही की तो बड़ा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था कांग्रेस की पूर्व जिलाध्यक्ष दिव्या रानी ने प्रशासन द्वारा लगाई बोर्ड फाड़ कर फेंक दिए थे, कांग्रेस पार्टी ने दिव्या रानी के पक्ष में प्रयास किया पर कानूनी रूप से दिव्या रानी ही गलत साबित हुई और आखिर उनका कब्जा हट गया प्रशासन को भी एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा, यह पन्ना शहर की पॉश इलाके की बेशकीमती करोड़ों रुपए की जमीन का पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की कार्यकाल में फलदार वृक्ष लगाने के नाम पर पट्टा दिया गया था दिव्या रानी सिंह ने न्यायालय का सहारा लिया हर कोई कहीं से राहत नहीं मिली फिर उन्होंने पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद विष्णु दत्त शर्मा फिर मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री अपने रिश्ते के देवर बृजेंद्र प्रताप सिंह पर भी आरोप लगाए थे पर पूरी लड़ाई स्पोट और न्यायालयों के दाव पेच जुटाकर लड़ी गई पर जमीन बचा पाने में सफल नहीं हुई ,

एसडीएम से तीखी बहस नोकझोंक

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में फरियादी महेश पाल की याचिका आवेदन क्रमांक 83/2021 मैं दावा किया गया था की आराजी क्रमांक 387, 388, 389 मैं प्रशासन पथ बिहार का निर्माण कर रहा है जिसमें बड़ी संख्या में फलदार वृक्ष काटे गए हैं और पर्यावरण को क्षति पहुंचाई जा रही है जबकि यहां वन्यजीवों का रहवास है इस पर संज्ञान लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल खंडपीठ ने सुनवाई की और कई स्तर पर जांच कराई, वरिष्ठ अधिकारियों से मौके पर जांच कर जांच करने और पेड़ों का विवरण देने को कहा था पेड़ों के काटे जाने की संख्या भी पूछी थी पर संपूर्ण सुनवाई के बाद एक भी पेड़ काटे जाने का तथ्य सामने नहीं आया साथ ही मौके पर फलदार वृक्ष भी नहीं मिले पथ विहार के निर्माण के लिए झाड़ियां हटाने और उनकी सफाई की बात सुनवाई के दौरान सिद्ध हुई कुछ पेड़ किनारे  उखडे पड़े होने का तथ्य जरूर प्रकाश में आया इस तरह याचिका आवेदन में जो आरोप लगाए गए थे वह निराधार पाए गए जिस पर एनजीटी ने अपना फैसला देते हुए याचिका आवेदन खारिज किया और मुकदमे बाजी की खर्च वसूली का आदेश दिया है लागत 25000 की कास्ट लगाते हुए वसूली करने का आदेश सुनाया है, 

पूरे फैसले को डिटेल से पढ़ें

मद संख्या 4
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष
सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल
(वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से)
मूल आवेदन संख्या 83/2021 (सीजेड)
(आईए नंबर 19/2022)
महेश पाल आवेदक

बनाम
मध्य प्रदेश राज्य प्रतिवादी

सुनवाई की तिथि: 08.04.2022
कोरम: माननीय श्रीमान। न्यायमूर्ति एसएचओ कुमार सिंह, न्यायिक सदस्य
माननीय डॉ. अरुण कुमार वर्मा, विशेषज्ञ सदस्य
आवेदक(ओं) के लिए: श्री संजय उपाध्याय, अधिवक्ता।
प्रतिवादी (ओं) के लिए: श्री सचिन के वर्मा, अधिवक्ता।
गण
1. इस आवेदन में उठाया गया मुद्दा खसरा नं. 387,
388 और 389 जैसा कि जिला पन्ना में आवेदन में उल्लिखित है, बिना किसी के
सक्षम अधिकारियों से वैधानिक अनुमति और जैसा कि आरोप लगाया गया है
प्रशासन हरित पट्टी क्षेत्र में पथ निर्माण कर रहा है।
2. आवेदक का तर्क है कि हाल ही में जिला प्रशासन
इस वन क्षेत्र के साथ और जब यह था तब विभिन्न बैरिकेड्स स्थापित किए
संबंधित अधिकारी से पूछताछ की तो बताया गया कि प्राकृतिक नाला
इस हरित पट्टी क्षेत्र में मौजूद कंक्रीट को पक्का किया जा रहा है और आगे एक सड़क की संभावना है
हरित पट्टी क्षेत्र के मध्य में निर्माण किया जाना है।
3. इस हरित पट्टी क्षेत्र के भीतर 2 स्टॉप . के साथ विरासती जल निकाय मौजूद हैं
बांध और एक प्राकृतिक नाला / जल निकाय जो पूर्ण विकसित के लिए फीडर के रूप में कार्य करता है
आस-पास मौजूद पेड़ और इस क्षेत्र में रहने वाले वन्यजीवों के आवास। गीदड़ों
और जंगली सूअर इस हरे रंग में वन्यजीवों की सबसे आम प्रजातियों में से हैं

4. इस ट्रिब्यूनल और एक संयुक्त द्वारा मामले को 08 नवंबर, 2021 को उठाया गया था समिति गठित की गई थी (i) कलेक्टर, पन्ना, (ii) संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ), (iii) राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक प्रतिनिधि, और (iv) मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगर पालिका परिषद, पन्ना निदेश सहित साइट का दौरा करने और तथ्यात्मक और की गई कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए। समिति ने साइट का दौरा किया और रिपोर्ट प्रस्तुत की जो इस प्रकार है:

5. संयुक्त समिति की रिपोर्ट के जवाब में, आवेदक ने कुछ दायर किया था
आपत्तियां कि सत्य तथ्यों को इस ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया था
संयुक्त समिति और तथ्य कि पेड़ बड़ी संख्या में काटे गए हैं और
जेसीबी जैसी भारी मशीनरी का उपयोग करके भूमि को साफ नहीं किया गया है
रिपोर्ट में दर्शाया गया है। आगे यह भी निवेदन किया गया है कि जिस क्षेत्र में
नाला एस्टेट टाइम्स के दौरान बनाया गया था, एक स्टॉप-डैम था, जिसे के लिए बनाया गया था
भूजल पुनर्भरण का उद्देश्य पन्ना में हमेशा पानी की कमी रही है
क्षेत्र, और नाली कभी भी किल-किला नदी या भरने के लिए फीडर नहीं थी
धर्मसागर।
6. प्रतिवादी क्रमांक 1 एवं 2 की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ताओं ने परिवाद दाखिल किया है
जवाब दिया और तर्क दिया कि याचिका को हथियाने के लिए दुर्भावनापूर्ण रूप से दायर किया गया है
सार्वजनिक भूमि और आगे प्रस्तुत किया कि मामला माननीय के समक्ष उठाया गया था
मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय ने रिट याचिका संख्या 22808 of 2021 में
आदेश दिनांक 28.10.2021 का आदेश दिया गया, जो इस प्रकार है:
“जबलपुर, दिनांक : 28-10-2021″
श्री हिमांशु मिश्रा के साथ श्री शशांक शेखर दुगवेकर,
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता।
श्री प्रशांत सिंह, विद्वान महाधिवक्ता
प्रतिवादी/राज्य।
यह याचिका दायर कर निर्देश देने की मांग की गई है
प्रतिवादी/राज्य को उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए
याचिकाकर्ता और अन्य परिणामी राहतें। के तहत एक आवेदन
सी.पी.सी. का आदेश 6 नियम 17 की भी मांग की गई है
वादों में संशोधन।
मुख्य रूप से, यह तर्क दिया जाता है कि उत्तरदाताओं/राज्य में
याचिकाकर्ता की संपत्ति का आड़ जो आंशिक रूप से किया गया है
अधिग्रहित कुछ संरचनाओं को ध्वस्त करने का प्रयास कर रहा है जिन पर
राज्य के पास कोई अधिकार नहीं है।
की ओर से उपस्थित विद्वान महाधिवक्ता
प्रतिवादी/राज्य का निवेदन है कि राज्य कोई कार्रवाई नहीं करेगा

जो इसे करने के लिए कानून में अधिकृत नहीं है और कुछ हद तक भूमि पहले ही अधिग्रहित किया जा चुका है और पुरस्कार पारित किया जा चुका है। इसलिए, राज्य उसके साथ कानून के अनुसार कार्य करने का हकदार है भूमि की सीमा जिस पर उसका पूर्ण अधिकार क्षेत्र है। इन परिस्थितियों में, हमें कोई आधार नहीं मिलता है इसके साथ हस्तक्षेप करें सिवाय यह देखने के कि की सभी क्रियाएं राज्य कानून के दायरे में होगा। रिट याचिका का निपटारा किया जाता है।” 7. प्रतिवादी के विद्वान अधिवक्ता ने आगे तर्क दिया है कि भूमि का कुछ भाग पहले ही अधिग्रहित किया जा चुका है और पुरस्कार पारित किया जा चुका है। इसलिए, राज्य है जनहित में कानून के अनुसार कार्य करने के लिए कार्यवाही करना। एक अन्य याचिका नं. 2021 का 22287 माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष दायर किया गया था जबलपुर एवं न्यायालय ने दिनांक 18.10.2021 के आदेश द्वारा यह आदेश पारित किया इस प्रकार है: “तारीख: 18.10.2021 : श्री शशांक शेखर, विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता श्री . के साथ याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा। श्री पुष्पेन्द्र यादव, विद्वान अपर। एडवोकेट जनरल के लिए /राज्य। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुना। याचिकाकर्ता ने वर्तमान याचिका दायर कर निर्देश देने की मांग की है प्रभाव है कि उसे निपटाने के लिए संयमित किया जाए खसरा संख्या 387 क्षेत्र 1.113 हेक्टेयर वाली भूमि से; खसरा नं। 388 क्षेत्रफल 1.044 हेक्टेयर; और खसरा नं.389 क्षेत्र 0.930 हेक्टेयर। पन्ना जिले में स्थित है। याचिकाकर्ता के अनुसार, एक पट्टा उपरोक्त सरकार आदेश के तहत वृक्षारोपण के लिए दी गई जमीन दिनांक 7.4.1994 को तहसीलदार द्वारा पारित किया गया और उसके बाद याचिकाकर्ता ने विभिन्न पेड़ लगाए थे। इसमें जल निकाय हैं और अब नगर परिषद पन्ना पेड़ों को काटने की कोशिश कर रही है

राजस्व अधिकारियों की मदद, इसलिए वे होने के लिए उत्तरदायी हैं
संयमित।
याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता ने प्रस्तुत किया
कि राजस्व बोर्ड द्वारा पारित आदेश दिनांक 7.12.2016 द्वारा
मामला संख्या 2759/2013 के तहत कार्यवाही शुरू की गई। के 248(1)
एमपी। भू-राजस्व संहिता को अलग रखा गया था।
दूसरी ओर, Addl सीखा। पेश हो रहे महाधिवक्ता
उत्तरदाताओं/राज्य के लिए, प्रस्तुत करता है कि याचिकाकर्ता ने दबा दिया है
भौतिक तथ्य यह है कि उसी राहत के लिए, दीवानी मुकदमा – RCSA
संख्या 41/2021 पहले ही याचिकाकर्ता द्वारा द्वितीय . से पहले दायर किया जा चुका है
सिविल जज, पन्ना और जिसमें अस्थाई के लिए आवेदन
निषेधाज्ञा खारिज कर दी गई है। सीखा महाधिवक्ता
आगे प्रस्तुत करता है कि संशोधन संख्या 2759/2013 के खिलाफ दायर किया गया था
भूमि धारित सर्वेक्षण संख्या 280 के संबंध में आदेश दिनांक 10.07.2013,
281, 282 और 286/1। विचाराधीन भूमि के लिए अर्थात सर्वेक्षण संख्या 387,
388 और 389, जिसके विरुद्ध अलग-अलग कार्यवाही शुरू की गई
संशोधन संख्या 1889/2013 राजस्व बोर्ड के समक्ष दायर किया गया था और
इसे आदेश दिनांक 10.07.2013 द्वारा खारिज कर दिया गया है।
इसलिए, याचिकाकर्ता ने इस न्यायालय से सफाई के साथ संपर्क नहीं किया है
हाथ और अलग-अलग मामले में पारित आदेश पर भरोसा करना।
वह इस याचिका में उन सभी आदेशों को दाखिल करने के लिए समय की प्रार्थना करता है।
विद्वान अतिरिक्त को अनुमति प्रदान की जाती है। एडवोकेट जनरल टू
उपरोक्त सभी दस्तावेजों को फाइल करें।
याचिकाकर्ता को एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया जाता है कि क्यों
इस याचिका में उपरोक्त तथ्यों का खुलासा नहीं किया गया है। अगर यह है
पाया कि यह याचिका सामग्री को दबा कर दायर की गई है
तथ्यों के साथ-साथ गलत दस्तावेज, तो उचित लागत होगी
याचिकाकर्ता पर लगाया गया।
चूंकि इस याचिका के रख-रखाव के बारे में एक मुद्दा है
और तथ्यों को छिपाने के आरोप की जांच की जानी है, नहीं
इस स्तर पर अंतरिम राहत प्रदान करने का मामला बनता है। अंतरिम

का जवाब और हलफनामा दाखिल करने के बाद राहत पर विचार किया जाएगा
याचिकाकर्ता।
22.10.2021 को सूची।”
8. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 22.10.2021 को मामले को फिर से उठाया गया
मध्य प्रदेश जबलपुर में और अंत में बर्खास्त के रूप में निपटाया गया था
इस प्रकार है:
“जबलपुर, दिनांक : 22-10-2021″
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुना।
श्री शशांक शेखर, श्री नवीन दुबे के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता,
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता।
श्री पुष्पेन्द्र यादव, अपर महाधिवक्ता
/राज्य।
दहलीज पर, याचिकाकर्ता निविदाओं के विद्वान वकील
याचिकाकर्ता द्वारा की गई गलती के लिए बिना शर्त माफी।
उन्होंने आग्रह किया कि गलती वास्तविक थी, इसलिए, यह हो सकता है
माफ़ किया। उन्होंने टेंडरिंग याचिका को वापस लेने की भी मांग की
सामग्री जानकारी को दबाने के लिए बिना शर्त माफी
इस न्यायालय के समक्ष।
दूसरी ओर, विद्वान अतिरिक्त महाधिवक्ता उठा
गंभीर आपत्ति और प्रस्तुत करता है कि मौजूदा परिस्थितियों में,
याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती
और यदि इसे प्रदान किया जाना है, तो एक अनुकरणीय लागत होनी चाहिए
याचिकाकर्ता पर लगाया गया।
मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और
विद्वान द्वारा दी गई बिना शर्त माफी के लिए देख रहे हैं
याचिकाकर्ता के वकील ने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसे
गलती दोबारा न हो, वापस लेने की अनुमति
2,000/- रुपये की लागत के भुगतान के अधीन याचिका मंजूर की जाती है।
(रुपये दो हजार) याचिकाकर्ता द्वारा जमा किया जाना है
एमपी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर ने स्पष्ट किया कि
याचिका वापस लेने से बर्खास्तगी अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी

याचिकाकर्ता का यदि किसी अन्य उपाय का लाभ उठाकर बचाव किया जाता है।
याचिका खारिज की जाती है।”

9. विद्वान अधिवक्ता की विषयवस्तु यह है कि मामला
वृक्षारोपण या अधिग्रहण या कब्जे के मुकदमे के संबंध में या
जनता के लिए सड़क निर्माण के लिए राज्य के अधिकारियों की कार्रवाई
पानी के उचित निर्वहन के लिए नाले का मार्ग या प्रबंधन उठाया गया है
माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष वादियों/याचिकाकर्ता द्वारा और अंतत:
सुना, निर्णय लिया और खारिज कर दिया, इस प्रकार, मामले को पहले फिर से नहीं उठाया जा सकता है
इस ट्रिब्यूनल.
10. यह आगे की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया है
प्रतिवादी कि जिस भूमि पर अतिक्रमण और कब्जा है
अनधिकृत व्यक्ति, द्वारा अतिक्रमण हटाने के अधीन होना चाहिए
अनधिकृत व्यक्ति और राज्य द्वारा ध्यान में रखा जाना चाहिए
सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए प्रशासन।
11. आगे यह निवेदन किया जाता है कि मध्यप्रदेश शासन विभाग
शहरी विकास एवं आवास विभाग ने जारी किए निर्देश को हटाया है
सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए भूमि का अतिक्रमण और उपयोग निम्नानुसार है: –
i) यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एक बार भूमि को मुक्त कर दिया जाए
अतिक्रमण/अतिक्रमण यह नहीं होगा
अतिक्रमण/अवैध रूप से फिर से कब्जा कर लिया गया है, यह होगा
आवश्यक है कि उक्त भूमि को उठाकर सुरक्षित किया जाए
बाड़ या चारदीवारी और इसे नीचे रखा जाना चाहिए
निरंतर निगरानी।
ii) खाली भूमि पर पुनः अतिक्रमण की संभावना है
अत: इन भूमियों का उपयोग करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए
के लिए भूमि का आवंटन और विशेष वरीयता दी जानी चाहिए
शहरी क्षेत्र में समाज के कमजोर वर्ग की आवासीय योजनाएं
क्षेत्र।
iii) शहरी उपयोगिता सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता के अनुसार
सार्वजनिक पार्किंग, सार्वजनिक शौचालय, स्थानीय निकायों के अधिकारी या कोई भी
अन्य विशेषताएं जो शहरी सुविधाओं को बढ़ा सकती हैं

iv) यह देखा गया है कि नगरों के विकास के साथ
शहरी क्षेत्रों में हरित पट्टी में भारी कमी,
इसलिए, जिन भूमियों को मुक्त किया गया है
अतिक्रमणों/अतिक्रमणों पर विशेष ध्यान दिया जाए
इन जमीनों पर सार्वजनिक पार्क विकसित करें। की कॉपी
परिपत्र दिनांक 22.12.2021 को चिह्नित और दायर किया जाता है।
12. इसके अनुपालन में स्थानीय/जिला प्रशासन ने हटाने की पहल की
अतिक्रमणकारियों/माफियाओं से सार्वजनिक भूमि के अतिक्रमण के रूप में कहा गया है
ऊपर।
13. मध्य प्रदेश राज्य द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 22.12.2021 को पुन: प्रस्तुत किया जाता है

14. दिनांक 25.01.2022 को सुनवाई के दौरान, आवेदक ने यह उठाया
सवाल है कि जनता द्वारा बड़ी संख्या में हरे पेड़ों को काटा जा रहा है
प्रशासन और वन विभाग के सक्षम/उच्च अधिकारी
तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। ऊपर के प्रकाश में
विवाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मध्य प्रदेश था
यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं कि नियमों का उल्लंघन कर किसी भी प्रकार के वृक्षों की कटाई नहीं की जायेगी
पर्यावरणीय मानदंड या वैधानिक अनुमति के रूप में प्रदान किया गया था और कहा गया था
वरिष्ठ अधिकारी को दौरा करने और तथ्यात्मक और की गई कार्रवाई को प्रस्तुत करने के लिए नामित करें
रिपोर्ट good। इसके अनुपालन में, रिपोर्ट निम्नानुसार प्रस्तुत की गई है:

15. प्रतिवादी के विद्वान अधिवक्ता नं. 1 ने आगे रिपोर्ट जमा कर दी है
दिनांक 07.04.2022 इस तथ्य के साथ कि 60% विकास कार्य पहले से ही है
सब्जेक्टिव साइट पर किया गया है और शेष कार्य प्रगति पर है।
16. आवेदक के विद्वान अधिवक्‍ता ने निवेदन किया है कि चूंकि वृक्ष
बिना किसी अधिकार के कटौती की जाती है, इस प्रकार कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए
तथ्यों का उत्तर देते समय पर्यावरण मानदंड राज्य के विद्वान अधिवक्ता
ने प्रस्तुत किया है कि विकास कार्य के अनुसार लिया गया है
प्रशासन द्वारा प्रस्तुत नीति और योजना के साथ। यह है
आगे यह तर्क दिया गया कि वे पेड़ या पौधे जो के विषय थे
यह याचिका पेड़ की परिभाषा और आवश्यक के दायरे में नहीं आ रही है
सक्षम प्राधिकारी से नियमानुसार अनुमति ली गई है। में
उपरोक्त तर्कों और प्रधान प्रमुख द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को देखते हुए
वन संरक्षक और राज्य द्वारा प्रस्तुत उत्तर और के मद्देनजर
मध्य प्रदेश के माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश नहीं है
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन और कुछ भी नहीं पाया गया है
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन या पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन।
17. राज्य के वकील ने आगे यह तर्क दिया है कि मुकदमेबाजी
उपरोक्त तथ्यों के संबंध में पार्टी को न केवल उसके समक्ष उठाया गया था
माननीय उच्च न्यायालय लेकिन पहले राजस्व मुकदमेबाजी का विषय था

मामला संख्या 2759/2013 में राजस्व न्यायालय (धारा के तहत कार्यवाही शुरू)
मध्यप्रदेश भू-राजस्व अधिनियम, 1959 की धारा 248(1) और मामला था
आगे सिविल कोर्ट के समक्ष दायर किया, जिसमें निषेधाज्ञा के लिए आवेदन किया गया था
अदालत ने खारिज कर दिया और पीड़ित व्यक्ति ने पुनरीक्षण किया, जो था
सक्षम न्यायालय द्वारा भी सुना और निर्णय लिया गया।
18. तदनुसार, आवेदन में कोई सार और योग्यता नहीं है और इस प्रकार
2021 का मूल आवेदन संख्या 83 आई.ए. 2022 के नंबर 19 हैं
मुकदमेबाजी की लागत (पच्चीस हजार रुपये) के साथ खारिज कर दिया गया जो कर सकता है
राज्य प्रशासन द्वारा नियमों के अनुसार वसूल किया जाएगा।

शिव कुमार सिंह, जेएम
डॉ. अरुण कुमार वर्मा, ईएम

 

 

पन्ना गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई –विष्णु दत्त शर्मा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद खजुराहो

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – बृजेंद्र प्रताप सिंह मंत्री मध्य प्रदेश शासन

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – शारदा पाठक अध्यक्ष कांग्रेस पार्टी पन्ना

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – अंकुर त्रिवेदी संचालक वैष्णो देवी महाविद्यालय

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – सतानंद गौतम पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई — विशिष्ट कुमार चौबे उर्फ (मनुचौबे) संविदाकार

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – राम बिहारी चौरसिया अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी पन्ना

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – रवि राज सिंह यादव (अध्यक्ष जिला पंचायत पन्ना)

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं श्रीकांत दीक्षित वरिष्ठ कांग्रेसी नेता

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं – स्वतंत्र प्रभाकर अवस्थी अध्यक्ष युवक कांग्रेस

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं — अमिता बागरी वरिष्ठ भाजपा नेता गुनौर विधानसभा

पन्ना गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – मनोज गुप्ता वरिष्ठ कांग्रेस नेता 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – तरुण पाठक उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – ध्रुव चौबे अध्यक्ष आईटी सेल भाजपा

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई– ग्राम पंचायत बेहरासर

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – नीरज राजा बुंदेला ग्राम पंचायत श्रीरामपुर

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – माधवेंद्र सिंह उपाध्यक्ष जिला पंचायत

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – संजय नगायच वरिष्ठ भाजपा नेता पूर्व कॉपरेटिव बैंक अध्यक्ष

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – आस्था दीपक तिवारी

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई — श्रीमती नंदिता पाठक प्रदेश उपाध्यक्ष महिला मोर्चा मध्य प्रदेश

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई — राम अवतार उर्फ बबलू पाठक भाजपा नेता

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई– रवि पटेल खनिज अधिकारी

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं — डॉक्टर LK तिवारी सिविल सर्जन पन्ना

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई– शशीकांत दिक्षित अध्यक्ष किसान कांग्रेस पन्ना

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई –  शिवम चनपुरिया

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – सुशील त्रिपाठी उपाध्यक्ष भाजपा 

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई — अरुण सोनी टीआई कोतवाली पन्ना

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – एसपी पन्ना धर्मराज मीणा एवं थाना प्रभारी सुधीर बेगी

 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई –अरविंद कुजुर थाना प्रभारी अमानगंज

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई — हरि सिंह ठाकुर थाना प्रभारी अजयगढ़ एवं समस्त स्टाफ

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई — धर्मेंद्र कुमार सिंह थाना प्रभारी पवई

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई – अभिषेक पांडे थाना प्रभारी देवेंद्रनगर समस्त स्टाफ

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं – मृगेंद्र सिंह गहरवार युवक कांग्रेस पन्ना

 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं –  राजकुमार वर्मा भाजपा नेता

 

 

(शिवकुमार त्रिपाठी )पन्ना पुलिस परेड ग्राउंड में आज 73 वें गणतंत्र दिवस के शुभअवसर पर प्रदेश के आयुष एवं जल संसाधन राज्य मंत्री तथा पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री रामकिशोर ’’नानो’’ कावरे ने गणतंत्र दिवस के मौके पर ध्वजारोहण किया।ध्वजारोहण के उपरांत मंत्री कॉवरे ने परेड की सलामी ली ।औऱ फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री का संदेश वाचन किया। उन्होंने पन्ना में जिला स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होते हुए गणतंत्र दिवस पर जनता को बधाई दी।

 

मंत्री कॉवरे ने शांति औऱ राष्ट्रीय तिरंगे के प्रतीक गुब्बारों को आकाश में छोड़ा।इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्षष राम बिहारी चौरसिया जिला पंचायत अध्यक्षष रवि राज सिंह यादव उपाध्यक्षष सुशील त्रिपाठी   पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्रा,पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा,जिला पंचायत सीईओ बालगुरु के, कमल लालवानी सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता पदाधिकारी एवं आमजन मौजूद रहे  कोविड गाइड लाइन का पालन करते इस वर्ष गणतंत्र दिवस सीमित संख्या अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों एवं नगर गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी मनाया गया ।

सुप्रीम कोर्ट से आया फैसला,

पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर जनरल केटेगरी में होंगे चुनाव

चुनाव प्रक्रिया यथावत संपन्न होगी,

कुछ माध्यमों ने चुनाव स्थगित की बातें की

(शिवकुमार त्रिपाठी) मध्यप्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज की चुनाव प्रक्रिया संपन्न हो रही है इसे रोकने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया जा रहा है सरकार जहां चुनाव कराने में आमादा है वही कुछ लोग आरक्षण रोटेशन लागू करने की दबाव बना रहे हैं इसके लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जोर अजमाये से चल रही है बीते 10 दिन से पूरी चुनाव प्रक्रिया चुनाव की वजह न्यायालय की दरवाजे पर है कल जब हाईकोर्ट ने जब तुरंत सुनवाई से मना कर दिया तो आज फिर सुप्रीम कोर्ट मामला पहुंचा और 2020 में पिछड़ा वर्ग आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू नहीं किए जाने का मामला उठाकर चुनाव प्रक्रिया को उलझा दिया आज फ्रंट फुट पर थे कांग्रेस नेता एवं कद्दावर वकील विवेक तंखा और उन्होंने पिछड़ा वर्ग की सीटों की निर्वाचन प्रक्रिया पर बहस की और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों जनरल कैटेगरी में चुनाव कराने की सहमति दे दी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव प्रक्रिया यथावत संपन्न होगी पर पिछड़ा वर्ग के लिए जो भी सीटें आरक्षित होंगी उन्हें जनरल कैटेगरी मानकर चुनाव कराया जाएगा यानी इन सीटों पर सभी वर्ग के लोग चुनाव लड़ सकते हैं जबकि कुछ अन्य समाचार माध्यम पूरी चुनाव प्रक्रिया को स्थगित करने की समाचार प्रसारित कर रहे हैं जिससे भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई है और चुनाव लड़ने वाले लोग सच्चाई  जानने की कोशिश में जगह-जगह फोन टनटना रहे हैं

 

कई माध्यमों ने चुनाव स्थगित होने के समाचार चलाएं

अन्य समाचार माध्यमों के अंश

मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव पर स्टे लगा दिया है. ओबीसी आरक्षण को आधार बनाकर फैसला लिया है. महाराष्ट्र केस को बेस बनाकर रोक लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने सूचना आयोग को कड़ी फटकार भी लगाई. आज विवेक तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी.

महाराष्ट्र में भी ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर ही निकाय चुनाव पर रोक लगी है. सुप्रीम कोर्ट में दलील महाराष्ट्र में लोकल बॉडी चुनाव  में ओबीसी को आरक्षण नहीं है. इसी मुद्दे को लेकर मध्यप्रदेश पंचायत चुनाव पर रोक लगी है. आज रोटेशन को मुद्दा ही नहीं बनाया गया, यानी आज सिर्फ महाराष्ट्र के ओबीसी आरक्षण का पेंच फंसाकर MP पंचायत चुनाव पर रोक लगवाई गई है. आज से पहले रोटेशन को लेकर बहस हो रही थी.

मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार फैसला सुना दिया है. शुक्रवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव पर रोक लगा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और सरकार से जवाब लिया है. कोर्ट में पंचायत चुनाव को लेकर कड़ा रुख अपनाया. विवेक तन्खा ने याचिका लगाई और खुद पैरवी की.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर हाईकोर्ट को पूरे मामले की फिर से सुनवाई करने का निर्देश दिए था. लेकिन अचानक लगी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ही सुनवाई कर दी. बता दें कि इससे पहले हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव में रोटेशन के आधार पर आरक्षण न देने के खिलाफ कांग्रेस नेता सैयद जाफर और जया ठाकुर द्वारा पंचायत चुनाव को लेकर दायर रिट याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी. उसके बाद आज विवेक तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी.

तब तक यथावत होते रहेंगे चुनाव

3 जनवरी को सुनवाई के बाद होगा फैसला

तब तक आधी चुनाव प्रक्रिया संपन्न हो चुकी होगी

(शिवकुमार त्रिपाठी) पंचायत चुनाव मामले  मैंं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अर्जेंट हियरिंग से इंकार कर दिया है चीफ जस्टिस कीीी बेंच में आज याचिकाकर्ता मध्य प्रदेश में चुनाव प्रक्रििया रोकने के लिए पहुंचे पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को मामूलीी सा कहां इस मामले में हम त्वरित सुनवाई नहीं कर सकतेेेे इस कारण आप अगली तारीख दी जाती है और सुनवाई के लिए 3 जनवरी की अगली तारीख निर्धारित कर दी गई तब तक चुनाव प्रक्रिया रोकने से भी इनकार किया है लिहाजा मध्य प्रदेश के पंचायत चुनाव में जो त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनाव हो रहे हैं उसकी प्रक्रिया यथावत जारी रखें रहेगी और जब तक हाई कोर्ट में सुनवाई होगी तब तक आधी से अधिक चुनाव प्रक्रिया संपन्न हो चुकी होगी लिहाजा अब उम्मीद जताई जा रही हैै जो  कि जो 2014 की पुरानी आरक्षण के तहत चुनाव कराए जा रहे हैं उसी तरह चुनाव संपन्न हो जाएंगे 

ज्ञात हो कि कल सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव नोटिफिकेशन में इंटरफेयर करने से मना कर दिया था और कहा था कि हाईकोर्ट जाए और हाईकर्ट ही इन याचिकाओं को सुनकर फैसला लेगा

 

चीफ जस्टिस की बेंच ने याचिकाओं पर त्वरित सुनवाई से किया इंकार…

HC ने 3 जनवरी को तय की याचिकाओं पर सुनवाई..

याचिकाओं में पंचायत चुनाव आरक्षण को दी गई है चुनौती..

SC के आदेश के बाद फिर HC की शरण मे हैं याचिकाकर्ता

 

प्रोफेसर भरत मिश्रा ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति बने

नवनियुक्त वाइस चांसलर भरत मिश्रा

(शिवकुमार त्रिपाठी) चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना के समय से ही अपनी सेवाएं दे रहे प्रोफेसर भरत मिश्रा को आज राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है मूलतः सतना जिले के रहने वाले भरत मिश्रा ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना के समय से ही साइंस फैकल्टी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं भरत मिश्रा भौतिक विज्ञान के योग्य प्रोफ़ेसर हैं उन्हें राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने 4 वर्ष के लिए विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है

11 अक्टूबर 1966 में जन्मे भरत मिश्रा शुरुआत से ही होनहार रहे हैं इनकी प्रारंभिक शिक्षा हर सेकेंडरी स्कूल बिजुरी से हुई 1993 से ही ग्रामोदय विश्वविद्यालय से जुड़ गए उन्होंने भारत रत्न  प्रसिद्ध समाजसेवी नानाजी देशमुख के सानिध्य में रहकर समाज एवं ग्रामोत्थान के काम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया संघ पृष्ठभूमि के भरत मिश्रा कर्मठ स्वयंसेवक है वर्तमान में चित्रकूट मध्य प्रदेश की स्थाई निवासी है भरत मिश्रा ग्रामोदय विश्वविद्यालय की कई प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं

नियुक्ति के बाद से ही भरत मिश्रा को उनके चाहने वालों ग्रामोदय विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों एवं उनके संबंधियों ने बधाई दी है उम्मीद जताई है भरत मिश्रा के वाइस चांसलर बनने के बाद से ग्रामोदय विश्वविद्यालय नित नई ऊंचाइयों छुए गा उनकी कार्यकाल में विश्वविद्यालय की प्रगति होगी भरत मिश्रा को वाइस चांसलर नियुक्त होने पर हार्दिक शुभकामनाएं बधाई

कहानी चित्रकूट नेत्र चिकित्सालय की — कैसे वट वृक्ष बना आंखों का अस्पताल

किसी को तारा नेत्रदान यज्ञ की याद है !?

शुरुआती दौर का छायाचित्र

पूरे विन्ध्य क्षेत्र में शहर-कस्बों में, बसों में तारा नेत्रदान यज्ञ के पोस्टर लगते और फिर चित्रकूट में इसका बड़ा आयोजन होता ! इस यज्ञ में नेत्रदान के स्वाहा लगते थे ! मोतियाबिंद के ऑपरेशनों का यह यज्ञ अब सद्गुरु जानकी कुंड अस्पताल के नाम से जाना जाता है और सतत चल रहा है !

ग्रामीण क्षेत्रों के अंधे और निर्धन लोगों की जिंदगी में रोशनी लाने की सोचने वाले देव पुरुष सद्गुरु श्री रणछोड़ दास महाराज के आव्हान पर दिवंगत उद्योगपति अरविंद भाई मफतलाल ने अपने ट्रस्ट सद्गुरु सेवा संघ से यह महादान यज्ञ शुरू किया था ! अब उनके परिवार के श्री विशद मफतलाल इसके चेयरमैन हैं ! पहले कई सालों तक यह सेवा-भावी नेत्र शिविर टैंटों में और फिर कई साल तक टीन शेडों के नीचे लगाए जाते रहे हैं ! अंधविश्वासी ग्रामीण मरीजों को इन कैंपों में समझा-बुझा कर लाना पड़ता था क्योंकि “आंख का मामला” था भाई !

    अस्पताल भवन का विशिष्ट ब्लॉक

बहुत कम लोग इस तथ्य से अवगत हैं कि इस ट्रस्ट के वर्तमान डायरेक्टर और ट्रस्टी डॉ. बी.के. जैन हमारे सतना के एक समय के महत्वपूर्ण कांग्रेसी नेता भोगी भाई के बड़े भाई हैं ! प्रसिद्ध वाणिज्यिक फर्म दलसुख लाल भोगी भाई एंड संस परिवार के युवा चिकित्सक डॉ. बी. के. जैन ने अपना संपूर्ण जीवन इस ट्रस्ट के माध्यम से असंख्य ग्रामीण नेत्र रोगियों की सेवा में खपा दिया है ! अत्यंत पिछड़े क्षेत्रों में मोतियाबिंद-जनित अंधत्व निवारण का सूत्रपात करने वाले इस सेवा कार्य ने आज एक बड़ा रूप अख्तियार कर लिया है ! सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय चित्रकूट की अब सैकड़ों शाखाएं खुल गई हैं, जहां से लाखों-करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं !

कभी ग्रामीणों के बीच नेत्र-इलाज की अलख जगाते घूमते-फिरने वाले हमारे आदरणीय आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर बुधेन्द्र कुमार ( बी. के. जैन साहब ) ने कुछ माह पहले जानकीकुंड चित्रकूट में एशिया के सबसे बड़े आई सेंटर का शुभारंभ भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता श्री अमित शाह के हाथों कराया था ! वर्तमान में डॉ.जैन के पुत्र डाॅ. इलेश जैन ने अब काफी काम सम्हाल लिया है और वर्तमान में वे ही यहां के प्रशासक हैं । उल्लेखनीय है कि अब सद्गुरु के उक्त ट्रस्ट के तहत केवल नेत्र चिकित्सालय ही नहीं वरन एक कॉमन चिकित्सालय, एक प्राथमिक विद्यालय और एक संस्कृत विद्यालय भी है।

संत रणछोड़ दास जी महाराज कहते थे कि दूसरों में आत्मीयता की प्रतीति हो तभी सेवा हो सकती है ! मानव वही है जो दूसरों के दुखों की अनुभूति कर उसका सहायक बने ! डॉक्टर जैन ने उक्त संत-वचन को जैसे आत्मसात कर लिया है ! सन 1980-82 से मैंने डॉक्टर बी.के. जैन को काफी नजदीक से जाना है ! शास्त्री चौक स्थित भूपेन्द्र जैन उर्फ़ भोगी भाई के घर में हमने एक बार उनके साथ भोजन भी किया है ! गर्व है कि उनके साथ बैठने का मौका मिला !

कई वर्षों से उनसे मिला नहीं हूं पर पिछले 36 वर्षों से उनकी एक तस्वीर मेरे पास रखी है जो इस पोस्ट के साथ चस्पा कर रहा हूं ! डॉक्टर जैन को सेवा के एक वृहद् कैनवास में काम करते हुए आज सब देख रहे हैं मगर यह यात्रा कहां से शुरू हुई थी वह इस तस्वीर को देखकर समझा जा सकता है ! (लेखक वरिष्ठ पत्रकार निरंजन शर्मा )

 

 

विशेष –  वर्तमान में जानकीकुंड नेत्र चिकित्सालय एशिया महाद्वीप का एकमात्र संस्थान है जो प्रतिवर्ष सर्वाधिक आंखों के ऑपरेशन करता है यहां बहुत कम खर्च पर अत्याधुनिक तकनीकी से मोतियाबिंद का ऑपरेशन तो होता ही है आज भी जरूरतमंदों को या निर्धन लोगों को निशुल्क  नेत्र का इलाज मिल रहा है संस्था ने अपने चिकित्सालय के अलावा पड़ोसी जिले और राज्य में गांव-गांव जाकर सेवाएं देनी शुरू कर दी हैं जानकीकुंड नेत्र चिकित्सालय की डॉक्टरों की टीम गांव में जाती है वहां कैंप लगाते है मरीजों को अस्पताल की खर्च से चित्रकूट ले जाकर आंख का ऑपरेशन एवं लेंस डाल कर वापस उनके घर पहुंचाते है यह प्रयास सतत जारी है यानी आज के समय पर पुत्र अपने मां बाप की सेवा नहीं करते उससे अधिक असहाय गरीबों की सेवा सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट की टीम कर रही है इसमें अहम योगदान मशहूर नेत्र चिकित्सक एवं ट्रस्टी डॉ बीके जैन का भी है वर्तमान में उनके पुत्र डॉ  इलेश जैन संपूर्ण व्यवस्था में देख रहे है

नानाजी देशमुख की है चाहेती

समाज सेवा के क्षेत्र में किया अतुलनीय काम

(शिवकुमार त्रिपाठी) डा० नंदिता पाठक मूलतः आन्ध्रप्रदेश की रहनें वाली हैं आपके पिता जी मलांजखण्ड में हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड में काम करते थे ,नन्दिता जी नें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के होम साइंस कॉलेज से स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की सभी परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की वे इस दौरान एन एस एस एवं एन सी सी भी जुड़ी रहीं उन्होंने एन सी सी के कैडेट के रूप में दिल्ली में होनें वाली गणतंत्र दिवस की परेड में भी भाग लिया जबलपुर में कॉलेज की पढ़ाई के समय ही विद्यार्थी परिषद से जुड़ीं पढ़ाई पूरी करनें के बाद चित्रकूट आ गईं वहाँ कुछ दिन ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रारम्भिक समय के गतिविधियों में जुड़ी रही फिर परम आदरणीय नानाजी देशमुख जी के मार्गदर्शन में कार्य करनें दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ में काम करनें लगीं

वहाँ उन्होंने फल परिरक्षण इकाई का काम सम्हाला बाद में वे धीरे-धीरे काम को समझते हुए उद्यमिता में चलनें वाली सभी इकाइयों को देखनें लगीं और उद्यमिता विद्यापीठ प्रथम निदेशक बनीं उन्होंने कार्य के अनुभवों के आधार पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया । ग्रामीण युवक युवतियों को रोज़गार उपलब्ध करानें के सफल प्रयोगों को उन्होंने देश एवं विदेश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रस्तुत किया जिसमें हारवर्ड यूनिवर्सिटी बोस्टन अमेरिका तथा भारत में अनेक आई आई टीस आई आई एम , केंद्र एवं राज्य के विश्वविद्यालय ,आई सी ए आर तथा अनेक सामाजिक संस्थान । एक प्रस्तुतिकरण विशेष है जब उन्होंने इन्दौर के आई आई एम में डा० ए पी जे अब्दुल कलाम जी के सामनें दीनदयाल शोध संस्थान के सफल प्रयोगों को उनके समक्ष रखा । डा० नन्दिता पाठक को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नें अपनें राष्ट्रीय पुरस्कार प्राध्यापक यशवंत राव केलकर पुरस्कार से सम्मानित किया । पुरस्कार में मिली राशि को विद्यार्थी परिषद द्वारा चलाए जा रहे प्रकल्पों के लिए दे दिया । इन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनानें के लिए बहुत काम किया ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए मिलन समारोह, महिला संगम का आयोजन लगातार कई वर्षों तक किया चित्रकूट में आयोजित एक समारोह में तो 2लाख से भी अधिक महिलाएँ अपनें खर्चे से चित्रकूट पहुंची । 250-300 ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्र के युवक युवतियाँ प्रति वर्ष उद्यमिता विद्यापीठ से प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वयं का रोज़गार प्रारम्भ करते थे । भारतीय शिक्षण मंडल एवं संस्कार भारती नें महारानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया ।

ये कई विश्वविद्यालयों के प्रबंध मंडल की सदस्य रहीं इन्हें देश की प्रमुख 100 महिलाओं में चयन होनें पर भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया गया ।इनका विवाह डा० भरत पाठक जी से हुआ, दो बेटियॉं हैं अपूर्वा , अनन्या । सम्पूर्ण जीवन पूज्य संत महात्माओं के साथ परम श्रद्धेय नानाजी देशमुख जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ । अभी एन आई ओ एस के प्रबंध मंडल की सदस्य हैं एवं गंगा समग्र दिल्ली प्रांत की संयोजक हैं ।

 

वंदे मातरम से हर किसी को कर देती है मंत्रमुग्ध

नंदिता पाठक चित्रकूट में समाज सेवा के क्षेत्र से जुुड़कर उन्होंने कई अविस्मरणीय कार्य किए हैं ग्रामोत्थान , स्वरोजगार व स्वाबलंबन की दिशा में कार्य करते हुए उन्होंने नई पहचान बनाई इसके अलावा एक उनकी खासियत वंदे मातरम का संपूर्ण गायन भी है जब भी अपने मधुर कंठ से वंदे गीत का गायन और उद्घोष करती है हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है राष्ट्रपति से लेकर ग्रामीण महिलाओं के बीच में हर कहीं वे वंदे मातरम गीत का गायन कर चुकी है संपूर्ण गीत के गायन में भी उनकी एक अपनी अलग पहचान है, वे लंबे समय से बुंदेलखंड खासकर खजुराहो मैं राजनीतिक रूप से भी सक्रिय है

जिला कांग्रेस कमेटी में लंबे समय बाद बदलाव
शारदा पाठक बनी कांग्रेस की जिलाध्यक्ष

( शिवकुमार त्रिपाठी ) (more…)

बागेश्वरधाम सरकार ने पन्ना में रोपे पौधे

सवा 11 लाख वृक्ष लगाने और बचाने का संकल्प

गांव गांव बागेश्वर बगीचा बनाने का दिया संदेश

बागेश्वर वाटिका में पौधा रोपते हुए महाराज श्री

(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना में आज अचानक बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर श्री धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज जेल के पास पुरुषोत्तमपुर पहुंचे और उन्होंने 51 पौधे रोपे है धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज ने पीपल और बरगद का पेड़ लगाने के बाद कहा कि कोरोना की इस भीषण महामारी में ऑक्सीजन की कमी से लोगों को कष्ट उठाना पड़ा है यह ऑक्सीजन की कमी लगातार वृक्षों की कटाई के कारण निर्मित हुई है और इसी कारण कोरोना जैसी महामारी ने गंभीर रूप धारण किया बागेश्वर धाम से शिष्य मंडल ने यह फैसला किया है कि इस वर्ष पूरे बुंदेलखंड में सवा ग्यारह लाख वृक्ष लगाए जाएंगे और सभी वृक्षों को बचाया भी जाएगा

बागेश्वर वाटिका का उद्घाटन करते हुए धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज

पन्ना जेल परिसर के बाजू में बागेश्वर वाटिका का उद्घाटन करते हुए धीरेंद्र कृष्ण महाराज जी ने पूरे विधि-विधान और पूजन पाठ के साथ सबसे पहले पीपल का वृक्ष लगाया और इसके बाद बरगद पौधा रोपा सभी शिष्यों से अपील की कि एक शिष्य इस वर्ष 5, 11 , 21 या 101 वृक्ष लगाने और इनको बचाने का संकल्प लें और हनुमान जी महाराज को साक्षी मानकर यह वादा करें कि इन सभी वृक्षों को पाल पोस कर बड़ा करेंगे और इन वृक्षों की सेवा के साथ अपने नजदीकी मित्रों और परिजनों को वृक्षों के महत्व को बताएंगे जिससे पूरे बुंदेलखंड को हरा-भरा किया जा सके महाराज श्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहां आज से 20 वर्ष पहले जंगल हुआ करता था

पौधारोपण का दृश्य

अब वह इलाका वीरान हो गया है लगातार वृक्ष कट रहे हैं ऐसे में मानव जाति के साथ प्रकृति में संकट पैदा होगा प्राकृतिक नुकसान के कारण महामारी आ रही हैं इसलिए उन्होंने अपील की कि प्रकृति को बचाना है गौ माता की भी सेवा करना है उन्होंने संकल्प दिलाया कि गौशाला नहीं उपाय एक हिंदू एक गाय के संकल्प से ही गाय को बचाया जा सकता है और वृक्ष लगाकर प्रकृति की सेवा की जा सकती है इस मौके पर बागेश्वर धाम शिष्य मंडल के भक्तगण सतानंद गौतम , मनीष मिश्रा, संविदाकार वशिष्ट उर्फ मनु चौबे, नरेंद्र शुक्ला तरुण पाठक शिवकुमार त्रिपाठी, उदय मिश्रा, विष्णु पांडे, रामअवतार उर्फ बबलू पाठक कल्लू रावत , अज्जू गर्ग, शैलेश नगायच ,बड़े बेटा यादव, अरविंद यादव संजय तिवारी उर्फ मंटू सौरव अरजरिया, दीपक रावत, गौरी शंकर गुप्ता भारतेंदु रावत सहित बड़ी संख्या में बागेश्वर धाम से जुड़े भक्तों और शिष्य गण मौजूद रहे

भविष्य की आहट

देश बन सकता है कोरोना के उपचार में सिरमौर

 

(डा. रवीन्द्र अरजरियाकोरोना महामारी का दौर मानवीय काया के लिए बेहद कठिनाई भरा है। इस कठिन दौर में जहां पूरा समाज परोपकार में लगा है वहीं कुछ लोगों लाभ कमाने के लिए मानवीयता को तार-तार करने में भी जुटे हैं। नकली दवाओं से लेकर ब्लैक मार्केटिंग तक के अनगिनत मामले सामने आ रहे हैं। अधिकांश निजी अस्पतालों में मरीजों के आर्थिक शोषण की कहानियों कही-सुनी जा रहीं हैं। वहां लाखों का बिल तो एक मामूली सी बात हो गई है। सरकारी अस्पतालों में सीमित संसाधनों के मध्य जहां चिकित्साकर्मी जी-जीन से जूझता रहा वहीं प्रबंधन तंत्र स्वनियंत्रित होकर खोखले दावे करने में कीर्तिमान की प्रतियोगिता जीतना चाहता है। सरकारें निरंतर अपेक्षित बजट उपलब्ध करा रहीं हैं परन्तु उत्तरदायी अमला अपने ढर्रे पर ही काम कर रहा है। पीपीई किट से लेकर सुरक्षा संसाधनों तक की घटिया आपूर्ति ने अनेक चिकित्साकर्मियों की हत्या कर दी। देश के बाहर से आने वाली सहायता भी सरकारी तंत्र के मनमाने क्रियाकलापों के कारण अधिकांश स्थानों पर उचित समय और मात्रा में नहीं पहुंच सकी। अन्य देशों की बात करें तो चीन ने तो कोरोना फैलाने से लेकर उसका निदान करने तक की पूरी परियोजना को पूर्व निर्धारित कर रखा है। यह उसकी व्यवसायिक नीति का महात्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में भारत यदि दूरगामी नीतियों का निर्धारण करके कोरोना का समाधान ढूंढता, तो विश्व मंच पर सर्वोच्च स्थान पा सकता था। वैदिक साहित्य में महामारी से निपटने के अनेक उपायों का उल्लेख है। यह ज्ञान आज भी विज्ञान के सीमित संसाधनों और अनुसंधानों पर भारी है परन्तु अपने ही देश में अपनी ही विरासत पर प्रश्न चिंह लगाने वालों की कमी नहीं है। देश की अपनी आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा (नेचरोपैथी) और सिध्दा जैसी चिकित्सा पध्दतियों को होम्योपैथी और यूनानी के साथ आयुष मंत्रालय के अंतर्गत दोयम दर्जे पर रखा गया है। आईएमए यानी एलोपैथी के जानकारों का समूह। चिकित्सा का अर्थ केवल एलोपैथी तक ही सीमित होकर रह गया है। शब्दों के वास्तविक मायनों का अपहरण कर लिया गया है तभी तो व्यक्तिगत दूरी रखने के निर्देशों को सोशल डिस्टैंसिंग नाम देकर सामाजिक दूरी बनाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जब नीति निर्धारकों ने शब्दों को अर्थविहीन करके उन्हें विकृत करने का जानबूझ कर प्रयास किया है। वास्तविकता तो यह है कि परतंत्रता के दौर में इंग्लैण्ड से आई इस एलोपैथी के अनगिनत गुलाम आज भी अंग्रेजियत के पक्ष में स्वयं के गौरवशाली अतीत को कोसने से बाज नहीं आ रहे हैं। मौके की तलाश में रहने वाले ऐसे लोग जयचंदों के वर्तमान अवतार बनकर निरंतर सक्रिय रहते हैं ताकि देश आंतरिक समस्याओं के मकड जाल में निरंतर व्यस्त रखा जा सके। इन जयचंदों को अनेक देशों से न केवल आर्थिक मदद मिलती है बल्कि राजनैतिक संरक्षण भी मिलता है। स्वाधीनता के बाद भी एलोपैथी को निरंतर बढावा देना इसी षडयंत्र का एक महात्वपूर्ण हिस्सा है। मेडिकल कालेज यानी चिकित्सा महाविद्यालय का अर्थ ही एलोपैथी की बडी संस्था हो गया है। अप्रत्यक्ष रूप में अन्य पैथी को चिकित्सा पध्दतियों के बाहर कर दिया गया है। कोरोना की पहली दस्तक के बाद यदि आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा (नैचरोपैथी) और सिध्दा के जानकारों को प्रोत्साहित करके महामारी के निदान हेतु अनुसंधान में लगाया होता तो आज हमारे पास न केवल स्थाई उपचार होता बल्कि विश्व को कोरोना का सुरक्षा कवच भी उपलब्ध कराने का गौरव प्राप्त होता। वैदिक ग्रंथों में सबसे पहले स्थान पर सिध्द पध्दति को रखा गया हैं जहां तक की कल्पना भी विज्ञान के लिए संभव नहीं है। ऊर्जा हस्तांतरण पध्दति (इनर्जी ट्रांसफर मैथड) से सिध्दों ने हमेशा से ही उपचार किया है। इस पध्दति पर अमेरिका सहित अनेक देशों में तेजी से काम किया जा रहा है और वह दिन दूर नहीं जब हम उसे वहां के पेटेन्ट पर हम इसे आयातित करें। भारत का ही योग विदेशों से योगा होकर लौटता है, तब हम उसे स्वीकार करते हैं। देश की धरती पर जन्मे कृष्ण का दर्शन हमें इस्कान से ही समझ में आता है। मानसिक गुलामी से बाहर आना होगा। चंद लोगों की चालों को समझना होगा। लाशों पर राजनीति करने वाले शायद आने वाले समय में लाशों का कारोबार शुरू करके सत्ता सिंहासन पर आसीत होना चाहते हैं तभी तो मौत के इस तांडवकाल में भी पीडित मानवता पर गिध्द भोज करने में जुटे हैं। राष्ट्रीय संरक्षण के अभाव में सिध्दा के जानकारों का निरंतर अभाव होता जा रहा है। प्राकृतिक चिकित्सा के लिए संघर्ष करने वाली संस्थाओं को दस्तावेजी पैंचों के मध्य निरंतर कसा जा रहा है। सिध्दा और प्राकृतिक चिकित्सा पध्दतियों को सरकारी संरक्षण के न देकर उन्हें समाप्त करने की चालें निरंतर चली जाती रहीं है। आयुर्वेद को यद्यपि कुछ सरकारों व्दारा पोषित करने की बात कही जा रही है परन्तु आयुर्वेद के नाम पर कुछ खास लोगों और कुछ खास संस्थाओं को ही चिन्हित करके लाभ देने के मामले हमेशा ही सुर्खियां बनते रहे हैं। अंग्रेजी में सोशल डिस्टैंसिंग को व्यक्तिगत दूरी का अर्थ बताकर प्रचारित करने वाले लोग सिध्दा, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद के संस्कृत भाषा में स्थापित ज्ञान को भी मनमानी परिभाषायें देने के योजनावध्द अभियान में आज भी हैं। वास्तविकता तो यह है कि यदि कोरोना का स्थाई निदान चाहिए तो हमें अपने वैदिक ग्रंथों की ओर लौटना पडेगा। इन ग्रंथों में तात्कालिक विशेषज्ञों ने सूत्र के रूप में ज्ञान का भंडार संरक्षित कर रखा है जिसे अनुसंधान के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। इस हेतु फिलहाल आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और सिध्दा के जानकारों के अनुसंधान हेतु अलग-अलग मंच प्रदान करके यदि कोरोना के बजट का मात्र 5 प्रतिशत ही ईमानदारी से खर्च कर दिया जाये तो आज भी देश बन सकता है कोरोना के उपचार में सिरमौर। फिलहाल इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी। ( लिखके बुंदेलखंड के वरिष्ठ पत्रकार हैं)