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कहानी चित्रकूट नेत्र चिकित्सालय की — कैसे वट वृक्ष बना आंखों का अस्पताल

कहानी चित्रकूट नेत्र चिकित्सालय की — कैसे वट वृक्ष बना आंखों का अस्पताल

किसी को तारा नेत्रदान यज्ञ की याद है !?

शुरुआती दौर का छायाचित्र

पूरे विन्ध्य क्षेत्र में शहर-कस्बों में, बसों में तारा नेत्रदान यज्ञ के पोस्टर लगते और फिर चित्रकूट में इसका बड़ा आयोजन होता ! इस यज्ञ में नेत्रदान के स्वाहा लगते थे ! मोतियाबिंद के ऑपरेशनों का यह यज्ञ अब सद्गुरु जानकी कुंड अस्पताल के नाम से जाना जाता है और सतत चल रहा है !

ग्रामीण क्षेत्रों के अंधे और निर्धन लोगों की जिंदगी में रोशनी लाने की सोचने वाले देव पुरुष सद्गुरु श्री रणछोड़ दास महाराज के आव्हान पर दिवंगत उद्योगपति अरविंद भाई मफतलाल ने अपने ट्रस्ट सद्गुरु सेवा संघ से यह महादान यज्ञ शुरू किया था ! अब उनके परिवार के श्री विशद मफतलाल इसके चेयरमैन हैं ! पहले कई सालों तक यह सेवा-भावी नेत्र शिविर टैंटों में और फिर कई साल तक टीन शेडों के नीचे लगाए जाते रहे हैं ! अंधविश्वासी ग्रामीण मरीजों को इन कैंपों में समझा-बुझा कर लाना पड़ता था क्योंकि “आंख का मामला” था भाई !

    अस्पताल भवन का विशिष्ट ब्लॉक

बहुत कम लोग इस तथ्य से अवगत हैं कि इस ट्रस्ट के वर्तमान डायरेक्टर और ट्रस्टी डॉ. बी.के. जैन हमारे सतना के एक समय के महत्वपूर्ण कांग्रेसी नेता भोगी भाई के बड़े भाई हैं ! प्रसिद्ध वाणिज्यिक फर्म दलसुख लाल भोगी भाई एंड संस परिवार के युवा चिकित्सक डॉ. बी. के. जैन ने अपना संपूर्ण जीवन इस ट्रस्ट के माध्यम से असंख्य ग्रामीण नेत्र रोगियों की सेवा में खपा दिया है ! अत्यंत पिछड़े क्षेत्रों में मोतियाबिंद-जनित अंधत्व निवारण का सूत्रपात करने वाले इस सेवा कार्य ने आज एक बड़ा रूप अख्तियार कर लिया है ! सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय चित्रकूट की अब सैकड़ों शाखाएं खुल गई हैं, जहां से लाखों-करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं !

कभी ग्रामीणों के बीच नेत्र-इलाज की अलख जगाते घूमते-फिरने वाले हमारे आदरणीय आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर बुधेन्द्र कुमार ( बी. के. जैन साहब ) ने कुछ माह पहले जानकीकुंड चित्रकूट में एशिया के सबसे बड़े आई सेंटर का शुभारंभ भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता श्री अमित शाह के हाथों कराया था ! वर्तमान में डॉ.जैन के पुत्र डाॅ. इलेश जैन ने अब काफी काम सम्हाल लिया है और वर्तमान में वे ही यहां के प्रशासक हैं । उल्लेखनीय है कि अब सद्गुरु के उक्त ट्रस्ट के तहत केवल नेत्र चिकित्सालय ही नहीं वरन एक कॉमन चिकित्सालय, एक प्राथमिक विद्यालय और एक संस्कृत विद्यालय भी है।

संत रणछोड़ दास जी महाराज कहते थे कि दूसरों में आत्मीयता की प्रतीति हो तभी सेवा हो सकती है ! मानव वही है जो दूसरों के दुखों की अनुभूति कर उसका सहायक बने ! डॉक्टर जैन ने उक्त संत-वचन को जैसे आत्मसात कर लिया है ! सन 1980-82 से मैंने डॉक्टर बी.के. जैन को काफी नजदीक से जाना है ! शास्त्री चौक स्थित भूपेन्द्र जैन उर्फ़ भोगी भाई के घर में हमने एक बार उनके साथ भोजन भी किया है ! गर्व है कि उनके साथ बैठने का मौका मिला !

कई वर्षों से उनसे मिला नहीं हूं पर पिछले 36 वर्षों से उनकी एक तस्वीर मेरे पास रखी है जो इस पोस्ट के साथ चस्पा कर रहा हूं ! डॉक्टर जैन को सेवा के एक वृहद् कैनवास में काम करते हुए आज सब देख रहे हैं मगर यह यात्रा कहां से शुरू हुई थी वह इस तस्वीर को देखकर समझा जा सकता है ! (लेखक वरिष्ठ पत्रकार निरंजन शर्मा )

 

 

विशेष –  वर्तमान में जानकीकुंड नेत्र चिकित्सालय एशिया महाद्वीप का एकमात्र संस्थान है जो प्रतिवर्ष सर्वाधिक आंखों के ऑपरेशन करता है यहां बहुत कम खर्च पर अत्याधुनिक तकनीकी से मोतियाबिंद का ऑपरेशन तो होता ही है आज भी जरूरतमंदों को या निर्धन लोगों को निशुल्क  नेत्र का इलाज मिल रहा है संस्था ने अपने चिकित्सालय के अलावा पड़ोसी जिले और राज्य में गांव-गांव जाकर सेवाएं देनी शुरू कर दी हैं जानकीकुंड नेत्र चिकित्सालय की डॉक्टरों की टीम गांव में जाती है वहां कैंप लगाते है मरीजों को अस्पताल की खर्च से चित्रकूट ले जाकर आंख का ऑपरेशन एवं लेंस डाल कर वापस उनके घर पहुंचाते है यह प्रयास सतत जारी है यानी आज के समय पर पुत्र अपने मां बाप की सेवा नहीं करते उससे अधिक असहाय गरीबों की सेवा सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट की टीम कर रही है इसमें अहम योगदान मशहूर नेत्र चिकित्सक एवं ट्रस्टी डॉ बीके जैन का भी है वर्तमान में उनके पुत्र डॉ  इलेश जैन संपूर्ण व्यवस्था में देख रहे है

नानाजी देशमुख की है चाहेती

समाज सेवा के क्षेत्र में किया अतुलनीय काम

(शिवकुमार त्रिपाठी) डा० नंदिता पाठक मूलतः आन्ध्रप्रदेश की रहनें वाली हैं आपके पिता जी मलांजखण्ड में हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड में काम करते थे ,नन्दिता जी नें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के होम साइंस कॉलेज से स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की सभी परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की वे इस दौरान एन एस एस एवं एन सी सी भी जुड़ी रहीं उन्होंने एन सी सी के कैडेट के रूप में दिल्ली में होनें वाली गणतंत्र दिवस की परेड में भी भाग लिया जबलपुर में कॉलेज की पढ़ाई के समय ही विद्यार्थी परिषद से जुड़ीं पढ़ाई पूरी करनें के बाद चित्रकूट आ गईं वहाँ कुछ दिन ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रारम्भिक समय के गतिविधियों में जुड़ी रही फिर परम आदरणीय नानाजी देशमुख जी के मार्गदर्शन में कार्य करनें दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ में काम करनें लगीं

वहाँ उन्होंने फल परिरक्षण इकाई का काम सम्हाला बाद में वे धीरे-धीरे काम को समझते हुए उद्यमिता में चलनें वाली सभी इकाइयों को देखनें लगीं और उद्यमिता विद्यापीठ प्रथम निदेशक बनीं उन्होंने कार्य के अनुभवों के आधार पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया । ग्रामीण युवक युवतियों को रोज़गार उपलब्ध करानें के सफल प्रयोगों को उन्होंने देश एवं विदेश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रस्तुत किया जिसमें हारवर्ड यूनिवर्सिटी बोस्टन अमेरिका तथा भारत में अनेक आई आई टीस आई आई एम , केंद्र एवं राज्य के विश्वविद्यालय ,आई सी ए आर तथा अनेक सामाजिक संस्थान । एक प्रस्तुतिकरण विशेष है जब उन्होंने इन्दौर के आई आई एम में डा० ए पी जे अब्दुल कलाम जी के सामनें दीनदयाल शोध संस्थान के सफल प्रयोगों को उनके समक्ष रखा । डा० नन्दिता पाठक को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नें अपनें राष्ट्रीय पुरस्कार प्राध्यापक यशवंत राव केलकर पुरस्कार से सम्मानित किया । पुरस्कार में मिली राशि को विद्यार्थी परिषद द्वारा चलाए जा रहे प्रकल्पों के लिए दे दिया । इन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनानें के लिए बहुत काम किया ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए मिलन समारोह, महिला संगम का आयोजन लगातार कई वर्षों तक किया चित्रकूट में आयोजित एक समारोह में तो 2लाख से भी अधिक महिलाएँ अपनें खर्चे से चित्रकूट पहुंची । 250-300 ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्र के युवक युवतियाँ प्रति वर्ष उद्यमिता विद्यापीठ से प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वयं का रोज़गार प्रारम्भ करते थे । भारतीय शिक्षण मंडल एवं संस्कार भारती नें महारानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया ।

ये कई विश्वविद्यालयों के प्रबंध मंडल की सदस्य रहीं इन्हें देश की प्रमुख 100 महिलाओं में चयन होनें पर भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया गया ।इनका विवाह डा० भरत पाठक जी से हुआ, दो बेटियॉं हैं अपूर्वा , अनन्या । सम्पूर्ण जीवन पूज्य संत महात्माओं के साथ परम श्रद्धेय नानाजी देशमुख जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ । अभी एन आई ओ एस के प्रबंध मंडल की सदस्य हैं एवं गंगा समग्र दिल्ली प्रांत की संयोजक हैं ।

 

वंदे मातरम से हर किसी को कर देती है मंत्रमुग्ध

नंदिता पाठक चित्रकूट में समाज सेवा के क्षेत्र से जुुड़कर उन्होंने कई अविस्मरणीय कार्य किए हैं ग्रामोत्थान , स्वरोजगार व स्वाबलंबन की दिशा में कार्य करते हुए उन्होंने नई पहचान बनाई इसके अलावा एक उनकी खासियत वंदे मातरम का संपूर्ण गायन भी है जब भी अपने मधुर कंठ से वंदे गीत का गायन और उद्घोष करती है हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है राष्ट्रपति से लेकर ग्रामीण महिलाओं के बीच में हर कहीं वे वंदे मातरम गीत का गायन कर चुकी है संपूर्ण गीत के गायन में भी उनकी एक अपनी अलग पहचान है, वे लंबे समय से बुंदेलखंड खासकर खजुराहो मैं राजनीतिक रूप से भी सक्रिय है

जिला कांग्रेस कमेटी में लंबे समय बाद बदलाव
शारदा पाठक बनी कांग्रेस की जिलाध्यक्ष

( शिवकुमार त्रिपाठी ) (more…)

बागेश्वरधाम सरकार ने पन्ना में रोपे पौधे

सवा 11 लाख वृक्ष लगाने और बचाने का संकल्प

गांव गांव बागेश्वर बगीचा बनाने का दिया संदेश

बागेश्वर वाटिका में पौधा रोपते हुए महाराज श्री

(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना में आज अचानक बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर श्री धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज जेल के पास पुरुषोत्तमपुर पहुंचे और उन्होंने 51 पौधे रोपे है धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज ने पीपल और बरगद का पेड़ लगाने के बाद कहा कि कोरोना की इस भीषण महामारी में ऑक्सीजन की कमी से लोगों को कष्ट उठाना पड़ा है यह ऑक्सीजन की कमी लगातार वृक्षों की कटाई के कारण निर्मित हुई है और इसी कारण कोरोना जैसी महामारी ने गंभीर रूप धारण किया बागेश्वर धाम से शिष्य मंडल ने यह फैसला किया है कि इस वर्ष पूरे बुंदेलखंड में सवा ग्यारह लाख वृक्ष लगाए जाएंगे और सभी वृक्षों को बचाया भी जाएगा

बागेश्वर वाटिका का उद्घाटन करते हुए धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज

पन्ना जेल परिसर के बाजू में बागेश्वर वाटिका का उद्घाटन करते हुए धीरेंद्र कृष्ण महाराज जी ने पूरे विधि-विधान और पूजन पाठ के साथ सबसे पहले पीपल का वृक्ष लगाया और इसके बाद बरगद पौधा रोपा सभी शिष्यों से अपील की कि एक शिष्य इस वर्ष 5, 11 , 21 या 101 वृक्ष लगाने और इनको बचाने का संकल्प लें और हनुमान जी महाराज को साक्षी मानकर यह वादा करें कि इन सभी वृक्षों को पाल पोस कर बड़ा करेंगे और इन वृक्षों की सेवा के साथ अपने नजदीकी मित्रों और परिजनों को वृक्षों के महत्व को बताएंगे जिससे पूरे बुंदेलखंड को हरा-भरा किया जा सके महाराज श्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहां आज से 20 वर्ष पहले जंगल हुआ करता था

पौधारोपण का दृश्य

अब वह इलाका वीरान हो गया है लगातार वृक्ष कट रहे हैं ऐसे में मानव जाति के साथ प्रकृति में संकट पैदा होगा प्राकृतिक नुकसान के कारण महामारी आ रही हैं इसलिए उन्होंने अपील की कि प्रकृति को बचाना है गौ माता की भी सेवा करना है उन्होंने संकल्प दिलाया कि गौशाला नहीं उपाय एक हिंदू एक गाय के संकल्प से ही गाय को बचाया जा सकता है और वृक्ष लगाकर प्रकृति की सेवा की जा सकती है इस मौके पर बागेश्वर धाम शिष्य मंडल के भक्तगण सतानंद गौतम , मनीष मिश्रा, संविदाकार वशिष्ट उर्फ मनु चौबे, नरेंद्र शुक्ला तरुण पाठक शिवकुमार त्रिपाठी, उदय मिश्रा, विष्णु पांडे, रामअवतार उर्फ बबलू पाठक कल्लू रावत , अज्जू गर्ग, शैलेश नगायच ,बड़े बेटा यादव, अरविंद यादव संजय तिवारी उर्फ मंटू सौरव अरजरिया, दीपक रावत, गौरी शंकर गुप्ता भारतेंदु रावत सहित बड़ी संख्या में बागेश्वर धाम से जुड़े भक्तों और शिष्य गण मौजूद रहे

भविष्य की आहट

देश बन सकता है कोरोना के उपचार में सिरमौर

 

(डा. रवीन्द्र अरजरियाकोरोना महामारी का दौर मानवीय काया के लिए बेहद कठिनाई भरा है। इस कठिन दौर में जहां पूरा समाज परोपकार में लगा है वहीं कुछ लोगों लाभ कमाने के लिए मानवीयता को तार-तार करने में भी जुटे हैं। नकली दवाओं से लेकर ब्लैक मार्केटिंग तक के अनगिनत मामले सामने आ रहे हैं। अधिकांश निजी अस्पतालों में मरीजों के आर्थिक शोषण की कहानियों कही-सुनी जा रहीं हैं। वहां लाखों का बिल तो एक मामूली सी बात हो गई है। सरकारी अस्पतालों में सीमित संसाधनों के मध्य जहां चिकित्साकर्मी जी-जीन से जूझता रहा वहीं प्रबंधन तंत्र स्वनियंत्रित होकर खोखले दावे करने में कीर्तिमान की प्रतियोगिता जीतना चाहता है। सरकारें निरंतर अपेक्षित बजट उपलब्ध करा रहीं हैं परन्तु उत्तरदायी अमला अपने ढर्रे पर ही काम कर रहा है। पीपीई किट से लेकर सुरक्षा संसाधनों तक की घटिया आपूर्ति ने अनेक चिकित्साकर्मियों की हत्या कर दी। देश के बाहर से आने वाली सहायता भी सरकारी तंत्र के मनमाने क्रियाकलापों के कारण अधिकांश स्थानों पर उचित समय और मात्रा में नहीं पहुंच सकी। अन्य देशों की बात करें तो चीन ने तो कोरोना फैलाने से लेकर उसका निदान करने तक की पूरी परियोजना को पूर्व निर्धारित कर रखा है। यह उसकी व्यवसायिक नीति का महात्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में भारत यदि दूरगामी नीतियों का निर्धारण करके कोरोना का समाधान ढूंढता, तो विश्व मंच पर सर्वोच्च स्थान पा सकता था। वैदिक साहित्य में महामारी से निपटने के अनेक उपायों का उल्लेख है। यह ज्ञान आज भी विज्ञान के सीमित संसाधनों और अनुसंधानों पर भारी है परन्तु अपने ही देश में अपनी ही विरासत पर प्रश्न चिंह लगाने वालों की कमी नहीं है। देश की अपनी आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा (नेचरोपैथी) और सिध्दा जैसी चिकित्सा पध्दतियों को होम्योपैथी और यूनानी के साथ आयुष मंत्रालय के अंतर्गत दोयम दर्जे पर रखा गया है। आईएमए यानी एलोपैथी के जानकारों का समूह। चिकित्सा का अर्थ केवल एलोपैथी तक ही सीमित होकर रह गया है। शब्दों के वास्तविक मायनों का अपहरण कर लिया गया है तभी तो व्यक्तिगत दूरी रखने के निर्देशों को सोशल डिस्टैंसिंग नाम देकर सामाजिक दूरी बनाने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जब नीति निर्धारकों ने शब्दों को अर्थविहीन करके उन्हें विकृत करने का जानबूझ कर प्रयास किया है। वास्तविकता तो यह है कि परतंत्रता के दौर में इंग्लैण्ड से आई इस एलोपैथी के अनगिनत गुलाम आज भी अंग्रेजियत के पक्ष में स्वयं के गौरवशाली अतीत को कोसने से बाज नहीं आ रहे हैं। मौके की तलाश में रहने वाले ऐसे लोग जयचंदों के वर्तमान अवतार बनकर निरंतर सक्रिय रहते हैं ताकि देश आंतरिक समस्याओं के मकड जाल में निरंतर व्यस्त रखा जा सके। इन जयचंदों को अनेक देशों से न केवल आर्थिक मदद मिलती है बल्कि राजनैतिक संरक्षण भी मिलता है। स्वाधीनता के बाद भी एलोपैथी को निरंतर बढावा देना इसी षडयंत्र का एक महात्वपूर्ण हिस्सा है। मेडिकल कालेज यानी चिकित्सा महाविद्यालय का अर्थ ही एलोपैथी की बडी संस्था हो गया है। अप्रत्यक्ष रूप में अन्य पैथी को चिकित्सा पध्दतियों के बाहर कर दिया गया है। कोरोना की पहली दस्तक के बाद यदि आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा (नैचरोपैथी) और सिध्दा के जानकारों को प्रोत्साहित करके महामारी के निदान हेतु अनुसंधान में लगाया होता तो आज हमारे पास न केवल स्थाई उपचार होता बल्कि विश्व को कोरोना का सुरक्षा कवच भी उपलब्ध कराने का गौरव प्राप्त होता। वैदिक ग्रंथों में सबसे पहले स्थान पर सिध्द पध्दति को रखा गया हैं जहां तक की कल्पना भी विज्ञान के लिए संभव नहीं है। ऊर्जा हस्तांतरण पध्दति (इनर्जी ट्रांसफर मैथड) से सिध्दों ने हमेशा से ही उपचार किया है। इस पध्दति पर अमेरिका सहित अनेक देशों में तेजी से काम किया जा रहा है और वह दिन दूर नहीं जब हम उसे वहां के पेटेन्ट पर हम इसे आयातित करें। भारत का ही योग विदेशों से योगा होकर लौटता है, तब हम उसे स्वीकार करते हैं। देश की धरती पर जन्मे कृष्ण का दर्शन हमें इस्कान से ही समझ में आता है। मानसिक गुलामी से बाहर आना होगा। चंद लोगों की चालों को समझना होगा। लाशों पर राजनीति करने वाले शायद आने वाले समय में लाशों का कारोबार शुरू करके सत्ता सिंहासन पर आसीत होना चाहते हैं तभी तो मौत के इस तांडवकाल में भी पीडित मानवता पर गिध्द भोज करने में जुटे हैं। राष्ट्रीय संरक्षण के अभाव में सिध्दा के जानकारों का निरंतर अभाव होता जा रहा है। प्राकृतिक चिकित्सा के लिए संघर्ष करने वाली संस्थाओं को दस्तावेजी पैंचों के मध्य निरंतर कसा जा रहा है। सिध्दा और प्राकृतिक चिकित्सा पध्दतियों को सरकारी संरक्षण के न देकर उन्हें समाप्त करने की चालें निरंतर चली जाती रहीं है। आयुर्वेद को यद्यपि कुछ सरकारों व्दारा पोषित करने की बात कही जा रही है परन्तु आयुर्वेद के नाम पर कुछ खास लोगों और कुछ खास संस्थाओं को ही चिन्हित करके लाभ देने के मामले हमेशा ही सुर्खियां बनते रहे हैं। अंग्रेजी में सोशल डिस्टैंसिंग को व्यक्तिगत दूरी का अर्थ बताकर प्रचारित करने वाले लोग सिध्दा, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद के संस्कृत भाषा में स्थापित ज्ञान को भी मनमानी परिभाषायें देने के योजनावध्द अभियान में आज भी हैं। वास्तविकता तो यह है कि यदि कोरोना का स्थाई निदान चाहिए तो हमें अपने वैदिक ग्रंथों की ओर लौटना पडेगा। इन ग्रंथों में तात्कालिक विशेषज्ञों ने सूत्र के रूप में ज्ञान का भंडार संरक्षित कर रखा है जिसे अनुसंधान के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। इस हेतु फिलहाल आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और सिध्दा के जानकारों के अनुसंधान हेतु अलग-अलग मंच प्रदान करके यदि कोरोना के बजट का मात्र 5 प्रतिशत ही ईमानदारी से खर्च कर दिया जाये तो आज भी देश बन सकता है कोरोना के उपचार में सिरमौर। फिलहाल इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी। ( लिखके बुंदेलखंड के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

एक हिंदू एक गाय पालने से ही बचेगा गोवंश :- धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज

गाय के संरक्षण का लिया संकल्प

 बागेश्वर धाम सरकार ने पन्ना में की बैठक

 बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तगण 

 (शिवकुमार त्रिपाठी) बागेश्वर धाम बालाजी सरकार की कृपा से बागेश्वर धाम के शिष्यमंडल का लगातार विस्तार हो रहा है पन्ना में भक्त मंडल की गतिविधियों की समीक्षा करने आज श्री पद्मावती देवी बड़ी देवी मंदिर मे श्री बागेश्वर धाम सरकार श्री धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज स्वयं भक्तों की बैठक लेने आए और उन्होंने हिंदू संस्कृति की रक्षा एवं गोवंश के संरक्षण का लोगों को संकल्प दिलाया
धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज ने कहा कि गौशाला में गाय की  रक्षा उपाय नहीं है गौशाला में गाय सुरक्षित नहीं रह सकती गोवंश के संरक्षण का एक ही उपाय है कि एक हिंदू एक गाय,, यदि एक परिवार एक गाय का पालन करें या उसकी परवरिश में सहभागिता निभाएं तभी गाय को बचाया जा सकता है दोपहर में बड़ी देवी मंदिर में आयोजित सामूहिक बैठक में महाराज श्री ने पन्ना के भक्तों से अपील की
गोवंश संरक्षण  के उद्देश्य से छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में विशाल महायज्ञ का आयोजन 1 से 8 मई 2021 तक किया जा रहा है 108 कुंडीय महायज्ञ में यजमान यही रह कर हवन यज्ञ में हिस्सा लेंगे इस यज्ञ का उद्देश्य देश में गोवंश के संरक्षण को बढ़ावा देना है इसी कारण महाराज जी ने नारा दिया है की गौशाला नहीं उपाय एक हिंदू एक गाय महाराज श्री ने कहा कि जो भी भक्त इस महायज्ञ में शामिल होना चाहते हैं वह अपना सहयोग देकर पन्ना में रामबाग स्थित नरेंद्र शुक्ला के ऑफिस में रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं
इस महायज्ञ में मुख्य यजमान पन्ना के नरेंद्र शुक्ला को बनाया गया है इसके अलावा वशिष्ठ उर्फ़ मनु चौबे, संजय सेठ बबलू खरे, बीके रिछारिया, रामबाबू गौतम, विष्णु पांडे, धीरू बाजपेई, रोहित अग्रवाल, दीपक रावत, शैलेश  नगायच,  मनोज शर्मा , सोनू मिश्रा ने यज्ञ में शामिल होने का सहयोग दिया इसके अलावा बैठक में अपील की गई कि जो भक्त इस 108 कुंडी महायज्ञ में शामिल होना चाहते हैं वे रजिस्ट्रेशन करा ले उन्होंने  बागेश्वर धाम का टोल फ्री नंबर भी  जारी किया
इस बैठक से पूर्व मां पद्मावती देवी की महाआरती की गई फिर भक्तों ने अपने महाराज श्री की आरती कर बैठक का शुभारंभ किया इस बैठक में बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे पन्ना भक्त मंडल के अध्यक्ष शिवकुमार त्रिपाठी ने कहा कि जिले में भक्त मंडल को और प्रभावी बनाने के लिए सभी का एकजुट होना आवश्यक है उन्होंने इसके पूर्व की गई बैठकों की जानकारी सभी को दी आए हुए भक्तों का आभार जताया

संगत के अनुसार ही जीवन पड़ता है प्रभाव

भागवत कथा के प्रभाव से ही राजा परीक्षित को हुआ था मोक्ष प्राप्त : राम दुलारे 

पन्ना शहर के बस स्टैंड पन्ना के समीप श्रीमदभगवत महापुराण कथा दिनांक 31 जनवरी 2021 से शुभारंभ किया गया है।जिसका आज 7 फरवरी को समापन किया गया। श्रीमदभगवत महापुराण का वाचन कथा व्यास पं श्री राम दुलारे पाठक जी द्वारा किया जा रहा है।
चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा रविवार को धूमधाम से संपन्न हो गई। हरी नारायण शर्मा दादा कृष्णा बस ट्रेवल्स पिता शिव शंकर चन्सौरिया सेवा निवृत वन कर्मचारी की ओर से कराए गए धार्मिक आयोजन में कथा व्यास पं श्री राम दुलारे पाठक ने बताया कि
मोक्ष की कामना प्रत्येक मनुष्य करता है, लेकिन सभी को सही राह नहीं मिलती है। भागवत महापुराण कथा एक ऐसा मार्ग है जो प्रत्येक को मोक्ष की ओर ले जाती है। राजा परीक्षित को मिले श्राप से हुई मृत्यु के बाद भी कथा सुनने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसलिए कलयुग में मोक्ष की कामना करते है तो श्रीमद् भागवत महापुराण कथा से श्रेष्ठ मार्ग कोई नहीं है। कथावाचक श्री पाठक ने कहा कि श्रंगी ऋषि के श्राप को पूरा करने के लिए तक्षक नामक सांप भेष बदलकर राजा परिक्षित के पास पहुंचकर उन्हें डंस लेते हैं और जहर के प्रभाव से राजा का शरीर जल जाता है और मृत्यु हो जाती है। लेकिन श्री मद् भागवत कथा सुनने के प्रभाव से राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्त होता है। पिता की मृत्यु को देखकर राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय क्रोधित होकर सर्प नष्ट हेतु आहुतियां यज्ञ में डलवाना शुरू कर देते हैं जिनके प्रभाव से संसार के सभी सर्प यज्ञ कुंडों में भस्म होना शुरू हो जाते हैं तब देवता सहित सभी ऋषि मुनि राजा जनमेजय को समझाते हैं और उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। कथा वाचक श्री पाठक ने कहा कि कथा के श्रवण प्रवचन करने से जन्मजन्मांतरों के पापों का नाश होता है और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
कथा व्यास ने प्रवचन करते हुए कहा कि संसार में मनुष्य को सदा अच्छे कर्म करना चाहिए, तभी उसका कल्याण संभव है। माता-पिता के संस्कार ही संतान में जाते हैं।संस्कार ही मनुष्य को महानता की ओर ले जाते हैं। श्रेष्ठ कर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। अहंकार मनुष्य में ईष्र्या पैदा कर अंधकार की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि श्लोक कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेसु कदा चनि:। मनुष्य को सदा सतकर्म करना चाहिए। उसे फल की ¨चता ईश्वर पर छोड़ देनी चाहिए।
कथा समापन पर हरिनारायण शर्मा दादा दीपक शर्मा कृष्णा शर्मा छोटे महाराज द्वारा भागवत कथा श्रवण पान करने आए सभी श्रद्धालुओं का आभार प्रदर्शन किया गया है।

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लोकेन्द्र राजा नहीं रहे !

वे पन्ना रियासत के आखिरी महाराजा नरेन्द्र सिंह जू देव के छोटे बेटे थे मगर बढ़कर हासिल करने की अपनी फितरत और वाक्-क्षमता की वजह से वे पूर्व सांसद महाराज के राजनैतिक उत्तराधिकारी बन गए ! आपका विगत गणतंत्र दिवस के दिन देहावसान हो गया !

चित्ताकर्षक व्यक्तित्व के धनी लोकेन्द्र सिंह जी ने तीन चुनाव लड़े और तीनों जीते ! एक, पहली बार सन 77 में जनता पार्टी की टिकट से पन्ना विधानसभा का, दूसरा, भाजपा की टिकट पर सन 89 में पन्ना-दमोह लोकसभा का और तीसरा कांग्रेस की टिकट पर सन 93 में पुनः पन्ना विधानसभा का !

मैंने उनको पहली बार अमानगंज रोड में खुली जीप में लाल चश्मा और शिकारियों जैसी हैट के साथ छैला बाबू की तरह घूमते देखा ! तब वे पहली बार विधायक बने थे ! बाद में कई बार हम लोग मिले – खासकर जब वे सांसद थे तो दिल्ली से पन्ना वाया सतना होकर ही जाते थे ! पन्ना से सतना कार उनको लेने आती ! मुझे दिल्ली से फोन कर देते कि “सबेरे क़ुतुब एक्सप्रेस से आ रहा हूं यार !” मैं सतना जागरण के ब्यूरो चीफ के रूप में उनसे मिलता और बहुत दिनों तक यह बताया ही नहीं कि आपके क्षेत्र का निवासी हूं लेकिन तीसरी बार बात खुल गई !

हुआ यह कि लोकेन्द्र सिंह ने सांसदी के अपने आखिरी दौर में माधवराव सिंधिया के कहने पर दलबदल कर लिया और भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए ! उनके पिता नरेन्द्र सिंह जी ने भी कांग्रेस से जनसंघ में दलबदल किया था ! मुझे दोनों की राजनैतिक कुंडली मालूम थी तो मैंने इस दलबदल के तीन दिनों के भीतर लोकेन्द्र सिंह की पूरी खड़ी फोटो के साथ जनसत्ता दिल्ली के लिए एक स्टोरी लिख दी जो “लोकेन्द्र सिंह के खानदान में दलबदल की परंपरा” शीर्षक से छपी ! जनता पार्टी के अपने पहले विधायकी काल में वे इतने गंभीर नहीं थे ! एक-दो विवादित मसले भी थे ! खबर में वह भी छपे !

लोकेन्द्र सिंह के कांग्रेस में जाते ही राष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ी खबर छपना – उनको अच्छा नहीं लगा ! खबर हमारे नाम से छपी थी ! तभी उन्हें किसी ने बताया कि यह लिखने वाला निरंजन शर्मा तो यहीं अपनी ककरहटी का है ! कचहरी में जो वकालत करते हैं ओम शर्मा, उनका चचेरा भाई है ! वे सीधे कचहरी पहुंचे और ओम भाई साहब से पूंछा – काये ओम, बो सतना दैनिक जागरण में तुमाओ भैयाय है ! यह बताने पर कि हां ; लोकेन्द्र राजा बोले – “बहुत बदमास है यार बो ! तीन बार मेरे साथ खाया-पिया, बैठा और एक भी बार नहीं बताया कि मैं ककरहटी का हूं ! हमाई कहानी बना के दिल्ली के अखबार में अलग छाप दई !”

दरअसल मुझे आनंद आया करता था, जब वे पन्ना-खजुराहो और वहां के जंगल-जनवार के बारे में ऐसे बताया करते जैसे मेरे लिए वह कहीं दूर देश की बात हो ! वे बताते-बताते धाराप्रवाह अंग्रेजी में शुरू हो जाते और मैं मुंह बाए सुनता रहता !

बहरहाल ! लोकेन्द्र राजा एक जिंदादिल इंसान थे और जो कहना होता था मुंह पर कह देते थे ! सन 93 में कांग्रेसी विधायक बने पर उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अक्षमताओं पर खुलकर आक्षेप किये ! स्वभाव भी अच्छा था उनका ! वास्तव में अगर ठक्काठाईं की बात कहने वाले और लोगों को उनकी गलती पर आइना दिखाने वाले और फटकारने वाले व्यक्ति ना होते तो पन्ना की राजनीति में उनका बर्चस्व बना रहता ! वे मंत्री भी बनते !

मानवेन्द्र सिंह उनके बड़े भाई थे ! औपचारिक राजा की पदवी उन्हीं के पास थी जो कि आजकल उनके पुत्र राघवेन्द्र सिंह धारण करते हैं ! संपत्ति को लेकर राज-परिवार में विवाद भी चला ! मानवेन्द्र सिंह के एक पुत्र और एक पुत्री जबकि लोकेन्द्र सिंह के दो पुत्रियाँ थीं जिनमें से बड़ी पुत्री का एक अरसे पहले देहांत हो गया था ! नागौद नगरपालिका अध्यक्ष रहीं श्रीमती कामाख्या सिंह जी लोकेन्द्र राजा की छोटी और अब इकलौती पुत्री हैं ! आप नागौद राजपरिवार के बिटलू हुजूर (नागेन्द्र सिंह जी) की भतीज-बहू हैं ! आपने ही मंगलवार को अपने पिता को मुखाग्नि दी !

अपने साथ लोकेन्द्र जी की सन 90-91 की एक पुरानी तस्वीर और दिवंगत आत्मा के प्रति दिल से विनम्र श्रद्धांजलि के साथ यह पोस्ट शेयर कर रहा हूँ !

(वरिष्ठ पत्रकार निरंजन शर्मा)

पन्ना राजपरिवार के वरिष्ठ सदस्य लोकेंद्र सिंह का निधन

फेफड़े की इंफेक्शन से पीड़ित महाराज ने पन्ना में ली अंतिम  सांस

(शिवकुमार त्रिपाठीपन्ना राज परिवार के  वरिष्ठ सदस्य  महाराज लोकेंद्र सिंह  का  बीमारी  के चलते आज निधन हो गया  वह  75 वर्ष के थे  पन्ना राजपरिवार  को हमेशा सुर्खियों में लाने वाले  लोकेंद्र सिंह  बाल्यकाल से ही  कुशाग्र बुद्धि,  रंगीन मिजाज  एवं  तीव्र शिकारी थे  उन्होंने कई बार  एक से अधिक बाघो का शिकार किया  पर जब उन्हें समझ आई  तो उनके हृदय में  वन्यजीव प्रेमियों के लिए  प्रेम  उत्पन्न हो गया और उन्होंने अपना पूरा जीवन  वन्यजीवों की रक्षा के लिए गुजार दिया  पन्ना टाइगर रिजर्व के संस्थापक सदस्य  लोकेंद्र सिंह हमेशा पन्ना के बाघों के प्रति चिंतित रहते थे  और हर उतार-चढ़ाव देखा  अपना राजनीतिक नुकसान  होने के बावजूद भी  प्रकृति  को बचाने के लिए  हमेशा लगे रहे  जंगल की  रक्षा के लिए  कुछ भी कर गुजरने को  तैयार थे बचपन से ही  स्मार्ट पर्सनालिटी  महाराज लोकेंद्र सिंह को  फिल्मों से भी लगाव था  यही कारण है कि उनके  प्रयास से पांडव फॉल में पहली फिल्म की शूटिंग हुई  हॉलीवुड की फिल्म की शूटिंग के लिए मशहूर विदेशी अभिनेत्री हेलन मिचैल  भी यहां  शूटिंग करने आई

 राजनीतिक सफर

महाराज लोकेंद्र सिंह 1977 में जनता पार्टी से विधायक चुने गए इसके बाद 1989भारतीय जनता पार्टी से पन्ना दमोह संसदीय क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए 1993 में कांग्रेश पार्टी से विधायक बने  हमेशा ही वे ताकतवर राजनीतिक शख्स का विरोध करते थे सत्ता से उनका लगाव नहीं था यही कारण है कि विद दिग्विजय सिंह सरकार में विधायक रहते हुए भी उनका विरोध करते रहे माधवराव सिंधिया से नजदीकी होने के कारण उन्हीं के कहने में पर भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी थी और कांग्रेस में शामिल हो गए थे वे हमेशा ही राजनैतिक ताकतवर व्यक्ति का विरोध करते रहे लोगों से मिलकर रहना और हमेशा मजाकिया अंदाज में मिलना उनका एक अच्छा गुण था

परिवार

लोकेंद्र सिंह की बेटी कामाख्या देवी उर्फ लकी राजा  हैै उनकी शादी नागौद में हुई है उनकी पत्नी महारानी इंदिरा कुमारी से उनका 36 का आंकड़ा रहता था इस कारण वे खजुराहो में निवास करती रही लेकिन बीते कुछ वर्षों से पारिवारिक सुलह हो गई थी जिससे इनका जीवन बेटी और पत्नी के साथ गुजरा हालांकि राज परिवार हमेशा विवादों में रहता है इसलिए भाभी, भतीजी भतीजा और बहू से नहीं बनती थी संपत्ति विवाद के कारण यह राज परिवार  हमेशा ही विवादों में रहता रहा है  और  वे  हमेशा ऐसे विवादों को हवा देते रहे  लेकिन बीते कुछ वर्षों से  उन्होंने विवाद छोड़ सभी के साथ अच्छे संबंध विकसित करने शुरू कर दिए थे 

दोपहर बाद अंतिम संस्कार

पन्ना राजपरिवार के वरिष्ठ सदस्य की अंतिम यात्रा राजमहल से निकली और दोपहर बाद उनका अंतिम संस्कार छत्रसाल पार्क में किया गया उनकी बेटी कामाख्या देवी उर्फ लकी राजा ने मुखाग्नि दी अंतिम संस्कार में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक और आमजन उपस्थित थे 

पूरी रात विषयबद्ध जवाबी कीर्तन से मना नया वर्ष

बागेश्वर धाम में बुंदेलखंड के नामी कीर्तन मंडली

 छतरपुर जिले की गड़ागंज में स्थित प्रसिद्ध चमत्कारी स्थान बागेश्वर धाम मैं 1 जनवरी 2021 को नव वर्ष का आयोजन साहित्य साधना के साथ किया गया ईसवी कैलेंडर के नव वर्ष के उपलक्ष में बागेश्वर धाम सरकार श्री धीरेंद्र कृष्ण जी ने यह आयोजन किया जिसमें सभी भक्तों मंडल के सदस्यों को आयोजित किया गया था बुंदेलखंड की कीर्तन विधा को प्रोत्साहित करने के लिए महाराज श्री ने विषयबद्ध जवाबी कीर्तन का आयोजन किया जिसमें उत्तर प्रदेश के हमीरपुर की लाल चंद्र  दीक्षित की कीर्तन मंडली आई और दूसरी कीर्तन मंडली छतरपुर के मातादीन विश्वकर्मा की थी जिसे राम और परशुराम संवाद की दो विषयों पर तात्कालिक विषय बंद सूची के तहत कीर्तन के लिए विषय दिए गए महाराज श्री ने ट्रांस कराया और टास जीतने के बाद मातादीन विश्वकर्मा ने भक्ति साधना की शुरुआत की और उन्हें परशुराम का संवाद दिया गया था जिस तरह से रामायण में भगवान परशुराम का चरित्र है उसी को तत्काल कीर्तन और भजन के माध्यम से गाया जाना था

इसी तरह उत्तर प्रदेश की कीर्तन मंडली  लालचंद दीक्षित को लक्ष्मण का विषय दिया गया था जिसमें कड़ाके की ठंड के बीच जबरदस्त प्रस्तुतियां दी गई पूरी रात श्रोता बुंदेली कीर्तन विधा का आनंद उठाते रहे महाराज श्री धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज ने बताया कि बुंदेलखंड में बहुत ही साधना और राग के साथ जवाबी कीर्तन गाई जाती है धीरे-धीरे यह विधा विलुप्त होने की स्थिति में पहुंच रही है इसलिए इन्हें संरक्षित करने के उद्देश्य यह आयोजन किया गया है 31 मार्च 2021 को पुनः विषय बंद कीर्तन का आयोजन किया जाएगा महाराज श्री ने बताया कि इस आयोजन के पूर्व आश्रम के प्रबंधन मंडल की बैठक हुई और इसमें तय किया गया कि जिले का सबसे बड़ा यज्ञ मई के महीने में आश्रम में आयोजित किया जाएगा जिसमें 108 कुंडी हवन और पुराण के साथ रासलीला और भागवत कथा का एक साथ आयोजन किया जाएगा जिसकी तैयारियां आश्रम से जुड़े और भक्त मंडल ने प्रारंभ कर दी है

महाराज श्री ने सभी से अपील की कि गरीब कन्याओं के विवाह में मदद करें गायों की सेवा करें एवं भारतीय संस्कृति की रक्षा के साथ नशा जैसे व्यवसायों से दूर रहकर नव वर्ष का स्वागत करें उम्मीद है 2021 सभी भक्तों को शुभ होगा सभी तरक्की करेंगे एवं भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए सभी भक्तगण अपनी शक्ति के अनुसार सहयोग कर धर्मानुसार आचरण करेंगे यही कामना बागेश्वर धाम सरकार से नित्य प्रति करते हैं

ज्ञात हो कि बागेश्वर धाम मैं इन दिनों हजारों का समुदाय एकत्र होता है दैहिक ,दैविक और भौतिक कष्ट से मुक्ति मिलती है इस कारण बागेश्वर आश्रम की प्रसिद्धि दिनों दिन पूरी दुनिया में बढ़ती जा रही है इस अवसर पर महाराज श्री का सानिध्य प्राप्त करने गुन्नौर विधायक शिवदयाल बागरी पन्ना से नरेंद्र शुक्ला ठेकेदार मनु चौबे पवई से प्रदीप मिश्रा छतरपुर से नितिन चौबे अंकित  सहित  बड़ी संख्या में महिला पुरुष  भक्तगण मौजूद रहे