पन्ना में कब बनेगा डायमंड पार्क, कलेक्टर की अध्यक्षता में फिर हुई मीटिंग,,, पूरा समाचार जरूर पढ़ें
आश्वासन मीटिंग और घोषणा हो तक सीमित है डायमंड पार्क
20 वर्ष से डायमंड पार्क निर्माण की बाट जोह रहा है पन्ना
कामगारों को मिलेगा रोजगार
सांसद एवं मंत्री को करनी होगी सकारात्मक पहल

बीडी की परखी नजरें
(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना में हीरा कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराने डायमण्ड पार्क की स्थापना की चर्चा बीते 20 साल से हो रही है हमेशा डायमंड पार्क का लॉलीपॉप पन्ना के लोगों को पकड़ाया जाता रहा है लेकिन परिणाम यह कि कभी इंदौर में डायमंड पार्क बना तो कभी खजुराहो में बनाने की चर्चा हुई पन्ना में डायमंड मिलता है कटिंग पॉलिशिंग यही हो इसके लिए जो डायमंड पार्क बना है उसका परिणाम ढाक के तीन पात है कलेक्टर पन्ना संजय कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में फिर जिले के हीरा कारीगरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिये डायमण्ड पार्क स्थापित करने बैठक आयोजित की गई। बैठक में हीरा व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों ने डायमण्ड पार्क स्थापित करने के सुझाव दिये
बताया गया कि वर्तमान में हीरा व्यवसाय में बहुत बड़ा बदलाव आया है। अब इस व्यवसाय को संचालित करने के लिये आधुनिक मशीने, सर्टिफिकेशन यूनिट आदि की आवश्यकता होती है। अब इसके लिये डायमण्ड पार्क को आधुनिक मशीनों के साथ स्थापित करने पर ही सफलता मिल सकेगी। इसके लिये अधोसंरचना विकास के साथ ट्रेडिंग सेन्टर, बैलेंस मशीन यूनिट, हीरा कटिंग-पॉलसिंग, अभूषण बनाने आदि के लिये बडे-बडे हॉल की आवश्यकता होगी। इसके अलावा एक सो-रूम स्थापित करना होगा। डायमण्ड पार्क में विद्युत, पेयजल, सुरक्षा, पार्किंग स्थल व्यवस्थित पहुंच मार्क की आवश्यकता पेट्रोल पम्प के अलावा बाहर से आने वाले व्यवसायियों के ठेहरने आदि की व्यवस्था करनी होगी।

डायमंड पार्क के लिए आयोजित बैठक का दृश्य
कलेक्टर श्री मिश्र ने बैठक में उपस्थित व्यवसायियों को बताया कि पन्ना वर्तमान में आवागमन के विभिन्न साधनों से जुड़ गया है। पड़ोसी जिले छतरपुर के खजुराहो में रेल लाईन, हवाई अड्डा होने के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जुुड़ गया है। वहीं थोडे ही दिनों में पन्ना का सकरिया हवाई अड्डा बनकर तैयार हो जायेगा। अगामी समय में पन्ना तक रेलवे लाईन पहुंचने वाली है। इसलिए पन्ना में डायमण्ड पार्क स्थापित कर यहॉ के उत्पादित हीरे के अभूषण तैयार कर विक्रय करने का कार्य सफलता पूर्वक किया जा सकता है। यहॉ के हीरा कारोवारियों को काम की तलाश में महानगरों की ओर नही जाना पड़ेगा। उन्होंने हीरा व्यवसायिओं से कहा कि डायमण्ड पार्क के साथ सर्वसुविधा युक्त कॉलोनी का निर्माण कराने के साथ पांच सितारा होटल के अलावा हीरा व्यवसायियों के लिये सभी तरह की सुविधायें उपलब्ध कराने के लिये अधोसंरचना विकास किया जाना होगा। इसके लिये स्थानीय व्यवसायी उपयुक्त भूमि की जानकारी दें। जिससे अगामी आने वाले समय में डायमण्ड पार्क का कार्य प्रारम्भ किया जा सकें
शहर के मध्य स्थित महेंद्र भवन है उपयुक्त स्थान

खूबसूरत महेंद्र भवन
हीरा को रखना और इस व्यापार से जुड़े लोगों के आवागमन मैं सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा होता है भले ही 20 वर्षों से डायमंड पार्क के लिए जमीन न तलाशी गई हो पर पुराने कलेक्ट्रेट यानी महेंद्र भवन के परिसर में जो जमीन उपलब्ध है वह डायमंड पार्क के लिए सबसे उपयुक्त उपयुक्त जगह है यदि यहां डायमंड पार्क बनाता है तो हीरा कामगारों व्यापारियों को आवागमन में सुविधा होगी और सुरक्षित वातावरण रहेगा
सांसद एवं मंत्री को करनी होगी सकारात्मक पहल

एनएमडीसी हिनौता में आयोजित कार्यक्रम में सांसद एवं मंत्री
वैदिक परंपरा में सबसे पवित्र माने जाते हैं पीपल और बरगदइन वृक्ष को दी गई है पूर्वजों की संज्ञाअनूठी है इनकी उत्पत्ति और संरक्षण की प्रक्रिया
सबसे अधिक ऑक्सीजन देते

पूजनीय बट वृक्ष के सामने

बरगद की डाली में लगे फल
पीपल ओर बरगद को सनातन धर्म में पूर्वजों की संज्ञा दी गई है।क्या आपने कभी पीपल और बरगद के पौधे लगाए हैं या किसी को लगाते हुए देखा है? क्या पीपल या बरगद के बीज मिलते हैं ?इसका जवाब है…नहीं !!
ऐसा इसीलिए है क्योंकि बरगद या पीपल की कलम बहुत कोशिशों के बाद बमुश्किल लगती है। इसका कारण यह है कि प्रकृति ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है।
जब कौए इन दोनों वृक्षों के फल को खाते हैं तो उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसिंग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं।उसके पश्चात कौवे जहाँ-जहाँ बीट करते हैं, वहाँ-वहॉं पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं। इसीलिए पीपल और बरगद के वृक्ष कई बार ऊंची इमारतों एवं दीवालों की झिर्रियों में उगते मिल जाते है।
और, किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं है कि पीपल ऐसा वृक्ष है जो अधिक ऑक्सीजन देता है और वहीं बरगद के औषधि गुण अपरम्पार हैं। अगर इन दोनों वृक्षों को उगाना है तो कौवे एवं अन्य पक्षियों की मदद बिना संभव नहीं है। इसलिए कौवे को बचाना पड़ेगा।
पक्षी वैज्ञानिकों के अनुसार मादा कौआ भादों महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है।

पीपल की डाली और पत्ते
तो, इस उपयोगी पक्षी के नवजात को पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है। शायद, इसलिए ऋषि-मुनियों ने कौवों के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राद्ध के रूप में पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर दी होगी, जिससे कौवों की नई जनरेशन का पालन पोषण हो जाये।
इसीलिए श्राद्ध का तर्पण करना न सिर्फ हमारी आस्था का विषय है बल्कि यह प्रकृति के रक्षण के लिए नितांत आवश्यक है। साथ ही… जब आप पीपल के पेड़ को देखोगे तो अपने पूर्वज तो याद आयेंगे ही क्योंकि उन्होंने श्राद्ध दिया था इसीलिए यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं।
हमारे द्वारा श्रद्धा से किए गए सभी कर्म, दान आदि आध्यात्मिक ऊर्जा के रूप में हमारे पितरों तक अवश्य पहुँचते हैं।
साभार : (सुरेश जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ)
स्रोत – (डॉ नंदिता पाठक जी की फेसबुक पोस्ट से)
टाइगर के बराबर महत्वपूर्ण है बरगद और पीपल

देश में ऐसे दृश्य दिखे तो बचेंगे जंगल
प्राकृतिक संरचना एवं जीव जंतु श्रृंखला में टाइगर को सर्वोपरि माना गया है शाकाहारी एवं मांसाहारी जीवो में टाइगर का दर्जा सबसे श्रेष्ठ है जिस इलाके में टाइगर रहता यानी जहां बाघ का रहवास है वहाँ संपूर्ण प्राकृतिक संरचना संतुलन में है यदि जब श्रृंखला में कोई गड़बड़ी है तो टाइगर वहां सरवाइव नहीं कर सकता यानी जंगल में पानी होगा तो घास उगेेगी, घास शाकाहारी जानवर खाएंगे जब उनकी तादाद बढ़ेगी तो उस इलाके में मांसाहारी खासकर टाइगर जैसे जानवरों की संख्या बढ़ेगी यानी बाघ कर रहवास जिस इलाके में होगा यही प्राकृतिक संतुलन के लिए सबसे जरूरी है जिस तरह का दर्जा वन्यजीवों में टाइगर का है वैसा ही दर्जा वृक्षों में बरगद और पीपल का है यह आदम कद वृक्ष दीर्घ जीवी होते हैं सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देते हैं और छांव भी इसीलिए यह वृक्ष पूजनीय है यदि इस धरती को बचाना है तो पीपल बरगद जैसे वृक्ष और टाइगर को बचाना ही होगा
(शिवकुमार त्रिपाठी)
सिंधिया घराने की संपत्ति जानकर उड़ जाएंगे होश, कई राज्यों के बजट से भी ज्यादा है महाराज की दौलत
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कितने की संपत्ति के मालिक हैं… इस सवाल का जवाब मुश्किल है, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुनाव के लिए आवेदन में 2 अरब से ज्यादा की संपत्तियां बताई थीं, लेकिन जिन संपत्तियों को लेकर कई अदालतों में मामले चल रहे हैं, उनकी अनुमानित कीमत ही करीब 40 हजार करोड़ यानी 400 अरब रुपये है….चलिए जानते हैं इसकी असल सच्चाई क्या है.

ज्ञात हो कि राजमाता सिंधिया ने अपने पुत्र माधवराव सिंधिया एवं पोता ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक वसीयत के माध्यम से अपनी संपत्ति के उत्तराधिकार से बेदखल कर दिया था उनकी तीन पुत्रियां उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे को संपत्ति का बारिश बताया है तीन हिस्सा अपनी पुत्रियों को दे दिया और एक हिस्सा ट्रस्ट के माध्यम से चैरिटी के लिए दिया है जिसका विवाद न्यायालयों में चल रहा है मुंबई हाई कोर्ट एवं ग्वालियर हाई कोर्ट में इन संपत्तियों के बारिश का विवाद चल रहा है जो माधवराव सिंधिया ने अपनी मां से संपत्ति पाने के लिए ग्वालियर के न्यायालय में दावा दायर किया था जिसका अभी परीक्षण ही चल रहा है पूरी संपत्ति के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया दावा करते हैं वहीं इनकी बुआ अपना अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं है जिससे इस राजशाही खानदान में संपत्ति का विवाद चल रहा है पर राज परिवार के लोग सार्वजनिक जीवन में राजनीति कर रहे हैं कई बार इनसे यह प्रश्न पूछे गए पर कोई भी सदस्य अपने संपत्ति विवाद की कभी सार्वजनिक चर्चा नहीं करते यानी विवाद आपस में खूब तेज है पर संपत्ति के दावे अधिकार को लेकर सार्वजनिक चर्चाएं करने से बचते हैं
*पुलिस अधीक्षक पन्ना ने चलाया मास्क के प्रति जागरूकता अभियान*
*सड़कों पर आने जाने वाले राहगीरों व दुकान संचालकों को वितरित किए गए मास्क*
दिनांक को पुलिस अधीक्षक पन्ना धर्मराज मीना द्वारा कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुये पन्ना शहर के दुकान संचालको एवं सड़क पर निकलने वालो व्यक्तियों को मास्क वितरित किये जाकर मास्क लगाने हेतु जागरूक किया गया एवं मास्क न लगाने वाले अथवा कोविड गाइड-लाइन का उल्लंघन करते पाये गये लोगो के विरूद्ध पुलिस द्वारा चालानी कार्यवाही भी की गई। पुलिस अधीक्षक पन्ना द्वारा लोगो को समझाइस देते हुये कोरोना से बचाव हेतु लोगों को मास्क लगाने, वैक्सीन लगवाने एवं सामाजिक दूरी का पालन करने की समझाइ दी गई । उक्त जागरूकता कार्यक्रम एवं चालानी कार्यवाही में अनु0 अधि0 पुलिस पन्ना बी.एस. बरीबा, डी.एस.पी. महिला प्रकोष्ठ अजय वाघमारे, थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक अरूण कुमार सोनी, थाना प्रभारी यातायात निरीक्षक अमरदास कनारे एवं पुलिस बल उपस्थित रहा ।
बधाई देने तक सीमित न रहे पर्यावरण दिवस,,
स्वच्छ वातावरण ही अच्छे स्वास्थ्य का आधार
( शिवकुमार त्रिपाठी) आज पूरी दुनिया पर्यावरण दिवस मना रही है 1972 में पर्यावरण के महत्व को समझा और उसे बचाने की प्रयास शुरू किए गए पर भारतीय संस्कृति पुरातन समय से ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती रही है यही कारण है कि हिंदू धर्म में वृक्ष को देवता के समान माना गया है कई त्योहारों में वृक्षों की पूजा की जाती है बट सावित्री में बरगद की पूजा, अक्षय तृतीया ऑवला के पेड़ की पूजा , हरछठ मैं पलाश और बेरी के पेड़ की पूजा जैसे यह त्यौहार है जिनमें वृक्षों की ही पूजा की जाती है और इन्हीं के आशीर्वाद से सुखद जीवन और समृद्धि की कल्पना लोग करते हैं लेकिन जिस तरीके से भौतिकवादी सोच और बलात दोहन ने पर्यावरण को क्षति पहुंचाई है अब बेहद खतरनाक स्थितियां निर्मित हो रही है ग्लोबल वार्मिंग , प्राकृतिक आपदाओं , बढ़ते तापमान जैसी घटनाएं तो सामने दिख ही रही है पृथ्वी में ऐसी हल चल होती हैं जो चिंताजनक है लेकिन यदि भारतीय संस्कृति के अनुसार जीवन पद्धति को लोग अपना ले तो पर्यावरण को संरक्षित ही नहीं स्वच्छ बनाकर चिंरजीवी किया जा सकता है भौतिक सुख सुविधाओं और लग्जरी सोच ने पर्यावरण पर कुठाराघात किया है आज फेसबुक, व्हाट्सएप , टि्वटर के माध्यम से लोग पर्यावरण दिवस की बधाइयां दे रहे हैं यह मात्र 5 जून तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए अगर सुखमय जीवन जीना है तो पृथ्वी, नदी , जल , पेड़ सभी को स्वच्छ बनाना होगा और हर व्यक्ति को स्वयं की जिम्मेदारी का एहसास करना होगा

प्रकृति को नजदीक से निहारते ,,, पन्ना टाइगर रिजर्व
पर्यावरण संरक्षण की संस्थाएं भी गैर जिम्मेदार
पर्यावरण संरक्षण के लिए देश में कई वैधानिक संस्थानो का निर्माण किया गया है जिसमें सरकार करोड़ों रुपए प्रतिवर्ष खर्च करती है पर इन संस्थाओं पर बैठे जिम्मेदार लोग अपने मूल कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर रहे यही कारण है की नदियों में बढ़ते प्रदूषण , रेत का अवैध उत्खनन , पेड़ों की कटाई , अवैध खनन तमाम मामले सामने आने के बावजूद इन संस्थाओं द्वारा कोई कठोर कदम नहीं उठाए जाते इस कारण पर्यावरण और अधिक क्षति होती हैं नदियां सूख रही है धरती बंजर होती जा रही पर्यावरण संरक्षण संस्थाएं शांत दिख रही है

पूजनीय बट वृक्ष के सामने
भारतीय हिंदू संस्कृति में पीपल बरगद जैसे पेडो की लकड़ियां आज भी लोग नहीं काटते न ही जलाऊ में इसका उपयोग करते हैं मतलब साफ है कि हिंदू संस्कृति पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार रही है अब लोगों को स्वयं की जिम्मेदारी का एहसास भी करना होगा तभी सच्चे मायने में पर्यावरण दिवस की सफलता होगी
पर्यावरण दिवस

देश में ऐसे दृश्य दिखे तो बचेंगे जंगल
अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में मनाया जाता है जो प्रत्येक वर्ष 5 जून को, विश्वभर में पर्यावरण के नकारात्मक प्रभावों को रोकने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। इस अभियान की शुरुआत करने का उद्देश्य वातावरण की स्थितियों पर ध्यान केन्द्रित करने और हमारे ग्रह पृथ्वी के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव का भाग बनने के लिए लोगों को प्रेरित करना है।
विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

प्रदूषण रहित सदानीरा केन नदी,, जिस पर अब हो रहा है आघात
विश्व पर्यावरण दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा मानव पर्यावरण के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अवसर पर 1972 में हुई थी। हालांकि, यह अभियान सबसे पहले 5 जून 1973 को मनाया गया। यह प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है और इसका कार्यक्रम विशेषरुप से, संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किए गए वार्षिक विषय पर आधारित होता है। 1987 में इसके केंद्र को बदलते रहने का सुझाव सामने आया और उसके बाद से ही इसके आयोजन के लिए अलग अलग देशों को चुना जाता है। इसमें हर साल 143 से अधिक देश हिस्सा लेते हैं और इसमें कई सरकारी, सामाजिक और व्यावसायिक लोग पर्यावरण की सुरक्षा, समस्या आदि विषय पर बात करते हैं
एमपी में 12वीं की परीक्षाएं रद्द
श्रेणी सुधार के लिए दोबारा दे पाएंगे परीक्षा
Cm शिवराज ने की घोषणा

फाइल फोटो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
(शिवकुमार त्रिपाठी) – भोपाल मध्य प्रदेश में इस साल 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएगी प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज इस बात का ऐलान किया है मुख्यमंत्री ने कहा है कि बच्चों की जिंदगी अनमोल है केरियर की चिंता बाद में कर लेंगे।इस समय जब सभी कोरोना का संकट झेल रहे है। बच्चो पर परीक्षा का बोझ डालना उचित नही है। 12 का रिजल्ट कैसे बने इसके लिए मंत्रियों का एक समूह बनाया गया है।जो विशेषग्यों से चर्चा कर यह तय करेगा कि रिजल्ट के लिए आंतरिक मूल्यांकन हो या अन्य कोई आधार अपनाया जाए। उस आधार पर तय करेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 वी की परीक्षा पहले ही न करने का फैसला किया गया है। उनके रिजल्ट आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर होगा।
सीएम ने की घोषणा, श्रेणी सुधार की परीक्षा दे सकेंगे छात्र

फोटो – CM शिवराज
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12वीं की परीक्षाएं निरस्त करने के बाद यह भी बयान जारी किया है कि जो छात्र बेहतर रिजल्ट के लिए दोबारा परीक्षा देना चाहते हैं उन्हें कोरोना की समप्ति के बाद दोबारा अवसर दिया जाएगा यानी श्रेणी सुधार की परीक्षा छात्र दोबारा दे सकते हैं ज्ञात हो कि कल सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं रद्द की गई थी तभी से उम्मीद लगाई जा रही थी कि मध्यप्रदेश में अपने बोर्ड की सभी परीक्षाएं निरस्त कर देगा
26 मई को चंद्रग्रहण पूर्वी भारत में 18 मिनट दिखाई देगा।
20 जुलाई के बाद देश की स्थिति सुधरेगी :- ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री
(शिवकुमार त्रिपाठी) 26 मई 2021 वैशाख शुक्ल पूर्णिमा 20 जुलाई के बाद देश की स्थिति सुधरेगी :- ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री खग्रास चंद्रग्रहण भारतीय समय अनुसार 3:15 से 6: 23 तक होगा। समाप्त होते हुए ग्रहण भारत के पूर्वी संभागों में चंद्रोदय होने पर सायंकाल मात्र 18 मिनट के लिए, केवल अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में देखा जा सकेगा इस ग्रहण को अमेरिका, हिंद महासागर, ब्राज़ील, कनाडा, श्रीलंका, चीन रूस, आस्ट्रेलिया आदि देशों में देखा जा सकेगा इस आशय की जानकारी अजय शास्त्री ने दी उनके अनुसार केवल पूर्वी भारत में 26 मई को चंद्रग्रहण वृश्चिक राशि अनुराधा नक्षत्र के तृतीय चरण नू अक्षरोंपरी होने वाला है अतः इन राशि नक्षत्र वाले जातकों को हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड आदि का पाठ करना चाहिए।
शनिदेव 141 दिनों तक चलेंगे उल्टी चाल
ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार 23 मई 2021 को शनि वक्री हो चुके हैं 11 अक्टूबर 2021 तक वक्री रहेंगे। 5 राशियों पर रहेगी शनि की विशेष दृष्टि वर्तमान समय में धनु राशि, मकर राशि, कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती तथा मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैया चल रही है। इसलिए शनि वक्री होने पर इन राशियों के जातकों को सावधानी बरतनी चाहिए। शनि देव के उपाय व हनुमान आराधना करनी चाहिए।
*शनि वक्री से बन सकते हैं युद्ध जैसे हालात*
ज्योतिषीय गणना के अनुसार शनि ग्रह के इस परिवर्तन से 59 साल बाद ऐसी स्थिति बन रही है। जब मंगल और शनि आमने सामने आने वाले हैं पिछली बार ऐसा 1962 भारत-चीन युद्ध के समय हुआ था। शनि मकर राशि में वक्री हो गए हैं वहीं मंगल 2 जून से 20 जुलाई तक कर्क(नीचराशि) में मंगल गोचर करेंगे, शनि व मंगल की सप्तम ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय देश और दुनिया के लिए काफी मुश्किलों भरा रहेगा।
इस समय भीषण प्राकृतिक,विमान विस्फोटक, जीवहानी या अन्य बड़ी घटनाओं होने की आशंका रहेगी। 20 जुलाई के बाद कुछ हालातों में सुधार आएगा।
संपर्क करे
“महाविद्याक्षरा ज्योतिष संस्थान”
*ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री*
“धारूहेड़ा चुंगी रेवाड़ी”
मो•7206549883
पूरी हुई मजदूरों की तमन्ना
पन्ना में फिर गूंजा पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए


हीरा अधिकारी रवि कुमार पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि युवक भगवानदास कुशवाहा को गत शनिवार किटहा हीरा खदान में एक ही दिन में दो हीरे मिले हैं, जिनका वजन 7.94 कैरेट और 1.93 कैरेट है। जेम क्वालिटी वाले इन हीरो की अधिकृत कीमत नहीं बताई गई लेकिन जानकारों का कहना है कि इन हीरो की कीमत 25 से 30 लाख रुपये तक हो सकती है। हीरा मिलने के दूसरे दिन आज इस युवक ने नियमानुसार कलेक्ट्रेट स्थित हीरा कार्यालय में पहुंचकर दोनों हीरे जमा किए हैं, जिन्हें बिक्री के लिए आगामी हीरों की नीलामी में रखा जायेगा। हीरा अधिकारी ने बताया कि युवक मुंबई में काम करता है। अपने गृह ग्राम किटहा आने पर बीते माह उसने खदान का पट्टा बनवाया था। उसकी किस्मत ने साथ दिया और उसे एक ही दिन में दो हीरे मिल गये। हीरा मिलने पर युवक भगवानदास कुशवाहा अत्यधिक खुश है।
कलेक्टर ने दी मजदूरों को शुभकामनाएं

मजदूर की हुई तमन्ना पूरी

एक हिंदू एक गाय पालने से ही बचेगा गोवंश :- धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज
गाय के संरक्षण का लिया संकल्प
बागेश्वर धाम सरकार ने पन्ना में की बैठक
बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तगण






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लोकेन्द्र राजा नहीं रहे !
वे पन्ना रियासत के आखिरी महाराजा नरेन्द्र सिंह जू देव के छोटे बेटे थे मगर बढ़कर हासिल करने की अपनी फितरत और वाक्-क्षमता की वजह से वे पूर्व सांसद महाराज के राजनैतिक उत्तराधिकारी बन गए ! आपका विगत गणतंत्र दिवस के दिन देहावसान हो गया !
चित्ताकर्षक व्यक्तित्व के धनी लोकेन्द्र सिंह जी ने तीन चुनाव लड़े और तीनों जीते ! एक, पहली बार सन 77 में जनता पार्टी की टिकट से पन्ना विधानसभा का, दूसरा, भाजपा की टिकट पर सन 89 में पन्ना-दमोह लोकसभा का और तीसरा कांग्रेस की टिकट पर सन 93 में पुनः पन्ना विधानसभा का !

मैंने उनको पहली बार अमानगंज रोड में खुली जीप में लाल चश्मा और शिकारियों जैसी हैट के साथ छैला बाबू की तरह घूमते देखा ! तब वे पहली बार विधायक बने थे ! बाद में कई बार हम लोग मिले – खासकर जब वे सांसद थे तो दिल्ली से पन्ना वाया सतना होकर ही जाते थे ! पन्ना से सतना कार उनको लेने आती ! मुझे दिल्ली से फोन कर देते कि “सबेरे क़ुतुब एक्सप्रेस से आ रहा हूं यार !” मैं सतना जागरण के ब्यूरो चीफ के रूप में उनसे मिलता और बहुत दिनों तक यह बताया ही नहीं कि आपके क्षेत्र का निवासी हूं लेकिन तीसरी बार बात खुल गई !
हुआ यह कि लोकेन्द्र सिंह ने सांसदी के अपने आखिरी दौर में माधवराव सिंधिया के कहने पर दलबदल कर लिया और भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए ! उनके पिता नरेन्द्र सिंह जी ने भी कांग्रेस से जनसंघ में दलबदल किया था ! मुझे दोनों की राजनैतिक कुंडली मालूम थी तो मैंने इस दलबदल के तीन दिनों के भीतर लोकेन्द्र सिंह की पूरी खड़ी फोटो के साथ जनसत्ता दिल्ली के लिए एक स्टोरी लिख दी जो “लोकेन्द्र सिंह के खानदान में दलबदल की परंपरा” शीर्षक से छपी ! जनता पार्टी के अपने पहले विधायकी काल में वे इतने गंभीर नहीं थे ! एक-दो विवादित मसले भी थे ! खबर में वह भी छपे !
लोकेन्द्र सिंह के कांग्रेस में जाते ही राष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ी खबर छपना – उनको अच्छा नहीं लगा ! खबर हमारे नाम से छपी थी ! तभी उन्हें किसी ने बताया कि यह लिखने वाला निरंजन शर्मा तो यहीं अपनी ककरहटी का है ! कचहरी में जो वकालत करते हैं ओम शर्मा, उनका चचेरा भाई है ! वे सीधे कचहरी पहुंचे और ओम भाई साहब से पूंछा – काये ओम, बो सतना दैनिक जागरण में तुमाओ भैयाय है ! यह बताने पर कि हां ; लोकेन्द्र राजा बोले – “बहुत बदमास है यार बो ! तीन बार मेरे साथ खाया-पिया, बैठा और एक भी बार नहीं बताया कि मैं ककरहटी का हूं ! हमाई कहानी बना के दिल्ली के अखबार में अलग छाप दई !”
दरअसल मुझे आनंद आया करता था, जब वे पन्ना-खजुराहो और वहां के जंगल-जनवार के बारे में ऐसे बताया करते जैसे मेरे लिए वह कहीं दूर देश की बात हो ! वे बताते-बताते धाराप्रवाह अंग्रेजी में शुरू हो जाते और मैं मुंह बाए सुनता रहता !
बहरहाल ! लोकेन्द्र राजा एक जिंदादिल इंसान थे और जो कहना होता था मुंह पर कह देते थे ! सन 93 में कांग्रेसी विधायक बने पर उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अक्षमताओं पर खुलकर आक्षेप किये ! स्वभाव भी अच्छा था उनका ! वास्तव में अगर ठक्काठाईं की बात कहने वाले और लोगों को उनकी गलती पर आइना दिखाने वाले और फटकारने वाले व्यक्ति ना होते तो पन्ना की राजनीति में उनका बर्चस्व बना रहता ! वे मंत्री भी बनते !

मानवेन्द्र सिंह उनके बड़े भाई थे ! औपचारिक राजा की पदवी उन्हीं के पास थी जो कि आजकल उनके पुत्र राघवेन्द्र सिंह धारण करते हैं ! संपत्ति को लेकर राज-परिवार में विवाद भी चला ! मानवेन्द्र सिंह के एक पुत्र और एक पुत्री जबकि लोकेन्द्र सिंह के दो पुत्रियाँ थीं जिनमें से बड़ी पुत्री का एक अरसे पहले देहांत हो गया था ! नागौद नगरपालिका अध्यक्ष रहीं श्रीमती कामाख्या सिंह जी लोकेन्द्र राजा की छोटी और अब इकलौती पुत्री हैं ! आप नागौद राजपरिवार के बिटलू हुजूर (नागेन्द्र सिंह जी) की भतीज-बहू हैं ! आपने ही मंगलवार को अपने पिता को मुखाग्नि दी !
अपने साथ लोकेन्द्र जी की सन 90-91 की एक पुरानी तस्वीर और दिवंगत आत्मा के प्रति दिल से विनम्र श्रद्धांजलि के साथ यह पोस्ट शेयर कर रहा हूँ !
(वरिष्ठ पत्रकार निरंजन शर्मा)