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श्री पद्मावती शक्तिपीठ पन्ना (बड़ीदेवी) अद्भुत है मां कलेही का दरबार (पवई),,,, आस्था,महत्व और अद्भुत चमत्कारों का पूरा वर्णन

 बुंदेलखंड की शारदा माता है पन्ना की बड़ी देवी

हर भक्त अपनी आस्था लेकर पहुंचते हैं

नवरात्र शुरू होते ही सजा देवी का दरबार

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लोग कर रहे हैं पूजा

कलेही माता में लगी भक्तों की भीड़

(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना देश दुनिया में हीरो के लिए जितना प्रसिद्ध है उससे भी कहीं ज्यादा सांस्कृतिक विरासत के लिए भी मशहूर है भगवान राम के चरण यहां पड़े थे आदि शक्ति पीठ मां पद्मावती देवी का स्थान भी पन्ना में है जहां हर भक्तों की मनोकामना को पूर्ण होती ही है बुंदेलखंड के लोग पन्ना की पद्मावती देवी को बड़ी देवी के नाम से जानते हैं और इनका स्थान मैहर की शारदा माता जैसा ही है लोग बड़ी देवी को पन्ना की शारदा माता मानते हैं मां के दर्शन करने पूरे बुंदेलखंड से लोग आते हैं
। जिसे लेकर मान्यता है कि यहां जो भी मनोकामना की जाती है उसे मां भगवती जरूर पूरा करती है। पन्ना में मां सती के पदम यानि पैर गिरे थे और इसीलिए इस शक्तिपीठ की नाम पद्मावती शक्तिपीठ पड़ा।

यहां मां का जो प्राचीन मंदिर है उसे लेकर मान्यता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में पद्मावत नाम के राजा हुए थे जो शक्ति के उपासक थे। उन्होंने अपनी आराध्य देवी मां दुर्गा को पद्मावती नाम से इस प्राचीन मंदिर में स्थापित किया। कालांतर में इस क्षेत्र का नाम इसी मंदिर के कारण पद्मावतीपुरी हुआ, जो बाद में परना और वर्तमान में पन्ना के नाम से पहचाना जाता है। पद्मावती देवी का उल्लेख भविष्य पुराण तथा विष्णु धर्मोत्तर पुराण में भी है। ये मंदिर गौण नरेशों का आराध्यस्थल भी था।
पद्मावती शक्तिपीठ के प्रति भक्तों की असीम श्रद्धा और विश्वास है। जानकार कहते हैं कि भक्त इसलिए यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं क्योंकि यहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।

मंदिर की खास बातें 

– पन्ना में किलकिला नदी के पास मां का यह प्राचीन देवी मंदिर है। इस मंदिर को स्थानीय बोली मे बड़ी देवन कहा जाता है।

– मंदिर के पुजारी राम कुमार शुक्ला के अनुसार, नवरात्रि में यहां बड़ा आयोजन होता है और देशभर से भक्त आते हैं।

– इस दौरान मां के दरबार में क्षेत्रीय बुंदेली भजन गीत गाए जाते है। मान्यता है कि देवी पद्मावती के आशीर्वाद के कारण ही पन्ना इतना समृद्ध है।

यह है मां सती के टुकड़े-टुकड़े होने की कहानी

मां सती भगवान शिव की पहली पत्नी थी। वह राजा दक्ष की बेटी थी जिसने भगवान शिव को अपनी पुत्री से शादी के लिए मना कर दिया था। उनके इंकार के बाद भी मां सती ने भगवान शिव से शादी की। एक दिन दक्ष राजा ने बड़े यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने सभी ऋषियों और देवताओ को बुलाया लेकिन भगवान शिव को नहीं आमंत्रित किया क्योंकि वे भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे।
मां सती ये अपमान नहीं सहन नहीं कर पायी। जब वे पिता से इसका उत्तर जानने यज्ञ स्थल पहुंची तो पिता ने उनका अपमान किया भगवान शिव को भला बुरा कहा। मां सती अपने पति भगवान शिव का अपमान सहन नहीं कर पायी और उन्होंने अपने आप को यज्ञ की अग्नि में भस्म कर दिया।
जब भगवान शिव को इस बारे में पता चला तो क्रोधित शिव ने यज्ञ को नष्ट कर दिया और राजा दक्ष को मार डाला। इसके बाद भगवान शिव मां सती को अपने कंधे पर बिठाकर सम्पूर्ण भूमंडल पर विचरण करने लगे। भूमंडल को स्थिर रखने के लिए भगवान विष्णु ने पीछे से अपने सुदर्शन चक्र से मां सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। जिस-जिस स्थान पर मां भगवती के शरीर के टुकड़े गिरे, उन स्थानों पर शक्तिपीठ स्थापित हुए। पन्ना में मां के दाहिना पैर गिरा था, इस कारण इस शक्तिपीठ का नाम पद्मावती शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।

पन्ना की पद्मावती देवी, मैहर की शारदा माता और पबई की कलेही माता का चमत्कारिक त्रिकोण संबंध

 

पन्ना शक्तिपीठ और मैहर की शारदा माता का मंदिर और पबई की कालिका माता का मंदिर अपने आप में समानांतर त्रिकोण बनाते हैं। पन्ना से पबई की दूरी 45 किलोमीटर और पबई से मैहर की दूरी 45 किलोमीटर है यानि ये तीनों स्थानों की आपस में दूरी 45 किलोमीटर है। इस तरह ये तीनों देवी स्थान आपस में त्रिकोणीय समानांतर कोण बनाते हैं।
पन्ना के पद्मावती शक्तिपीठ पर देश-दुनिया से लोग दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर की ये भी खास बात है कि यहां गंगा जमुनी संस्कृति की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। मंदिर में हर जाति, धर्म के लोग मां के चरणों में माथा टेकने आते हैं। बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी यहां कई मन्नत लेकर आते हैं।
नवरात्रि शुरू होते ही कन्या भोज शुरू हो जाता है भक्त प्रतिदिन मौजूद कन्याओं को श्रद्धा अनुसार दक्षिणा देकर भोज कराते हैं
ऐतिहासिक महत्व
925 ईसवी में आए तुर्क यात्री इबने कुरदान ने इस स्थान का अपने यात्रा अभिलेख में वर्णन किया है कालिंजर से आगे की यात्रा में लिखा कि परना एक स्थान है जहां गोंड राजाओं का राज्य है शहर की छोटी-छोटी गलियां है और वहां कुलपूज्य देवी मौजूद है साथ ही इस स्थान में एक शिलालेख भी मौजूद है जिसे मैं ब्राम्ही लिपि में कुछ लिखा गया है जो लोग आज पढ़कर नहीं समझ पाते संभवत इसी स्थान का महत्व या निर्माण का समय लिखा है

कलेही माता के दरबार में उमड़ा जनसैलाब

नवरात्र में हर देवी के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है लेकिन पवई में मां कलेही का दरबार निराला है यहां सुबह से ही भक्तों की भीड़ जमा हो जाती है और जो भी मनोकामनाएं मानी जाती सभी पूर्ण होती हैं अद्भुत इस स्थान का धार्मिक और पुरातन महत्व तो है ही ऐतिहासिक महत्व भी है और कई दंत कथाएं जुड़ी हुई है जिसमें कहते हैं कि कलेही माता पहले पर्वत के ऊपर विराजित ही थी और भक्तों की सहूलियत के लिए वे नीचे चली आई मां,, तभी से पतने नदी के किनारे मां की पूजा होती है जाने इस अदभुत दरबार और महत्व को ,,,
विंध्य पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसे पन्ना जिले की पवई का नाम जुबान पर आता है, तो जेहन में दिव्य शक्ति मां कलेही का दिव्य दर्शन सामने आता है। वैसे तो शक्ति स्वरूपा नारायणी के अनेक रूप है, दुर्गा सप्तशती में वर्णित नव-दैवियों में मां कलेही सप्तम देवी कालरात्रि ही हैं। अष्टभुजाओं में शंख, चक्र, गदा, तलवार तथा त्रिशूल उनके आठों हाथों में है। पैर के नीचे भगवान शिव हैं, उनके दायं भाग में हनुमान जी तथा बायं भाग में बटुक भैरव विराजमान हैं। मां हाथ में भाला लिये महिषासुर का वध कर रही हैं। यह विलक्षण प्रतिमा साढ़े तेरह सौ वर्ष पुरानी है, जिसकी स्थापना विक्रम संवत् सात सौ में हुई थी।

पर्वत से नीचे आने की दंत कथा

कहते हैं किन नगायच परिवार की एक आस्था वन महिला प्रतिदिन माता के दरबार में पूजा करने जाती थी जब वह बुजुर्ग हो गई और शरीर कमजोर होने लगा तो उन्होंने 1 दिन माता से बने कि कि मैं अब प्रतिदिन पूजा करने इतने ऊंचे पर्वत पर नहीं आ सकती तब माता ने कहा कि तुम चलो मैं आती हूं लेकिन पीछे मत देखना उस बुजुर्ग महिला ने आगे आगे चलना शुरू किया और पीछे मां कलेही पैदल चली आ रही थी जब नदी के किनारे पहुंची तो अविश्वास की भावना पैदा हुई और उस बुजुर्ग महिला ने पीछे देख लिया और जैसे ही दृष्टि पड़ी मां कलेही वही स्थिर हो गई फिर उस बुजुर्ग महिला ने आगे ले जाने की कोशिश की पर माता नहीं बड़ी तभी से इस स्थान पर यह मंदिर बना है और वही पूजा-अर्चना हो रही है और जब तक वह बुजुर्ग जीवित रही प्रतिदिन माता के दरबार में जा कर पूजा करती थी

बढोलिया परिवार है पुजारी

यूं तो सभी मंदिरों में प्राचीन काल से ही ब्राम्हण पुजारी होते रहे हैं और आज भी ब्राह्मण कुल में जन्मे लोग ही मंदिरों में पुजारी है पर इस कलेही माता मंदिर में बढोलिया परिवार कई पीढ़ियों से लगातार पूजा कर रहा है वंशानुगत इसी परिवार के लोग यहां प्रधान पुजारी होते हैं पवई निवासी बढोलिया परिवार आज भी यहां का पुजारी है बड़ी लगन और श्रद्धा के साथ पूजा करते और कराते हैं और सभी की आस्था इस मंदिर में है
पांच सौ वर्ष पुराना है यहां का मेला
मां कलेही पवई नगर से दो किलोमीटर की दूरी पर पतने नदी के तट पर विराजमान है, इस स्थान की छटा बड़ी मनोरम है। वैसे तो यहां वर्ष भर दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है, चैत्र नवरात्र में तो यहां विशाल मेला लगता है, जिसका प्रमाण तकरीबन पांच सौ वर्ष पुराना है। मेले में दूर-दूर से व्यापार करने के लिए व्यवसायी आते हैं। प्राचीन समय से अनाज, मसालों एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं का क्रय-विक्रय भी इसी मेले के माध्यम से होता रहा है। यहां सम्पूर्ण भारत के सभी अंचलों बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, मालवा, निमाड़ आदि से मां के दर्शनों के लिए लोग आते हैं। इस तथ्य का प्रमाण सिद्व स्थल श्री हनुमान भाटा की सीढ़ियां है, जिस पर उनके नाम व पते आज भी अंकित है।


अखण्ड ज्योति की भी मान्यता

लोक मान्यताओं के अनुसार मां शारदा (मैहर), मां पद्मावती (पन्ना) एवं मां कलेही (पवई) की प्रतिमायें हवा में नब्बे अंश का कोण बनाती है तथा हवा में भी इन सभी मंदिरो की आपस मे दूरियां लगभग साठ किमी है। धन-धान्य की परिपूर्णता और शक्ति के प्रतीक के रूप में मां कलेही की उपासना सदैव प्रचलित रही है। मां कलेही का मुखमण्डल सदैव विशेष चमक बिखेरता है। यह अद्वितीय पाषाण प्रतिमा भारतीय शिल्पकला का अनूठा उदाहरण है। नवरात्र के नव दिवस मां कलेही के सामने अखण्ड ज्योति भी इसी मान्यता के साथ प्रज्ज्वलित की जाती है, ताकि मां की साधना मे कोई विघ्न न आने पाये। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना मां कलेही सुनती है एवं पूर्ण करती है।

भक्त अपनी मन्नते लेकर आते हैं यहां

प्राचीन समय से अनवरत चली आ रही मां कलेही में भक्तों की आस्था आज भी कायम है। इस तथ्य का प्रमाण मंदिर परिक्रमा में लालचुनरी में बंधे हुये हजारों श्रीफल है। यहां भक्त अपनी मन्नते लेकर आते हैं और सच्चे मन से मां कलेही की आराधना करके श्रीफल को लालचुनरी में लपेट कर बांध देते हैं तथा मन्नत पूर्ण होने पर श्रीफल को छोड़कर मनोकामना पूर्ण होने का शुभ संकेत देते हैं। नवरात्र में यहां कन्या भोज कराने वालों की मनोकामनायें अवश्य पूर्ण होती हैं। श्रद्धालु यदि सच्ची श्रद्धा एवं भाव से मां कलेही की परिक्रमा पूर्ण करता है तो भी मां भक्त की पुकार सुनती है। भोर होते ही मां के भक्त नग्न पैर मंदिर में जल, फल, फूल, पत्र एवं प्रसाद लेकर पहुंचते हैं।
जवारों का विशेष महत्व
नवरात्र में यहां जवारों का विशेष महत्व है। एक समय तो मैहर की शारदा माता व पन्ना की फूला माता समेत तकरीबन 150 स्थानों के जवारे यहां आते थे। भक्त अपने सिर पर जवारों को रखकर ढोल, मंजीरों की थाप पर देवी भगतों का गायन कर हेरत अंगेज कारनामे दिखाते हैं। वे बानो एवं त्रिशूल के द्वारा जीभ एवं गले को छेदते हैं। जवारों की यह प्राचीनतम परम्परा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है जिसे पुर्नजीवित करने का अथक प्रयास मां कलेही धर्माथ समिति द्वारा किया जा रहा है। मंदिर परिसर में मां कलेही दरवार के साथ-साथ संकट मोचन श्री हनुमान जी महाराज की छ: रूद्री प्रतिमा है, साथ ही रूद्र अर्थात शिव भी शिव लिंग के रूप में विराजमान है, ऐसा शिव लिंग भारत वर्ष में अन्यत्र देखने को नही मिलता। पर्वत की तलहटी में 27 फिट के बाबा कैलाशी की विशाल प्रतिमा है, जिनकी जटाओं से गंगा बहती है। मंदिर तथा आस-पास के क्षेत्र में चन्देल कालीन मूर्तियों के अवशेष बिखरे पड़े हैं, जिन्हें सहेजने एवं संवारने की आवश्यकता है।

पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल


पुरातत्व महत्व के स्थलों और प्राचीनतम प्रतिमाओं की सुरक्षा व उनके रख-रखाव का दायित्व समाज का होता है। सिद्ध स्थल श्री हनुमान भाटा एवं मां कलेही धाम हिन्दू धर्म की महान विरासत है, इसे सहेजकर रखना सम्पूर्ण समाज की जिम्मेदारी है। यहां मौजूद प्रतिमायें बेशकीमती हैं, समय-समय पर इनका जीर्णोद्धार होना चाहिए यह मानव सभ्यता के अमूल्य धरोहर है। मां कलेही मंदिर पुरातात्विक महत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां देशी-विदेशी पर्यटक आकर शोध कर सकते हैं। मां कलेही मंदिर मप्र पर्यटन से जुड़ने के बाद पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है, जहां की खूबसूरत वादियां, पहाड़ों की चोटियां, हरे-भरे वृक्ष, नदी की कल-कल ध्वनि लोगों को बरबस ही अपने और आकर्षित करती है। मां कलेही परिक्षेत्र में ईकोटूरिज्म की गतिविधियों का संचालन किया जा सकता है। बाहर से आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के यहां आने से स्थानीय लोगो को रोजगार के साथ आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक लाभ भी हो सकता है।


धर्मार्थ समिति के प्रयासों से हुआ और बेहतर

देश-दुनिया के साथ यहां की व्यापक जानकारी देने के लिए मां कलेही धर्मार्थ समिति प्रयासरत है एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के साथ ही पुरातात्विक धरोहर के रूप में जमीनी स्तर पर संरक्षित करने की मांग कर रही है। मां की सेवा में समर्पित, मां कलेही धर्मार्थ समिति:- मां के आशीर्वाद, जन सहयोग एवं मां कलेही धर्मार्थ समिति के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि यहां विकास एवं जीर्णोद्धार का कार्य तीव्रगति से चल रहा है। धर्मार्थ समिति के प्रयासों एवं जनसहयोग से यहां शुद्ध पेयजल व्यवस्था, परिसर में ठहरने के लिए धर्मशालायें, कूप निर्माण, आनंद विहार गार्डन, 27 फिट की विषाल शिव प्रतिमा का निर्माण, नव दिवसीय नि:शुल्क भण्डारा, साफ सफाई एवं वृक्षारोपण के कार्य कराये गये है। जन सहयोग से प्राप्त होने वाली वार्षिक आय का लेखा-जोखा भी विजयादशमी के सांस्कृतिक मंच के माध्यम से पूर्ण पारदर्षिता के साथ प्रस्तुत किया जाता है। विशेष:- पंचमी की विशेष आरती, अष्टमी की महाआरती, केश मुण्डन संस्कार की व्यवस्था, भण्डारे में नि:शुल्क भोजन व्यवस्था एवं शुद्ध पेय जल व्यवस्था।

बागेश्वर धाम महाराज जी का दरबार पुरुषोत्तमपुर में आज     पूर्व bjp जिला अध्यक्ष के घर रुके पूर्व bjp जिला अध्यक्ष सतानन्द गौतन के घर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है महराज जी उनके घर मे रुके है

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सोते हुये भाई को कुल्‍हाडी से मारकर हत्‍या करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास की सजा एवं जुर्माना

 लाल्ले आदिवासी को सुनाई गई सजा 5000 का जुर्माना भी लगाया

(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश  द्वारा चिन्हित,जघन्‍य एवं सनसनीखेज प्रकरण में वीडियो कान्‍फ्रेंसिग से फैसला सुनाते हुये, कुल्‍हाडी से हमला कर हत्‍याकारित करने वाले अभियुक्‍त लाल्‍ले आदिवासी को आजीवन कारावास की सजा एवं 05 हजार रूपये के अर्थदण्‍ड से द‍ंडित किया गया।
प्रकरण के संबंध में जानकारी देते हुये ऋषिकांत द्विवेदी, मी.से.प्रभा./सहा.जि.लो.अभि.अधि. ने बताया कि,थाना-सलेहा में दिनांक 12.06.2020 को फरियादी कोमल आदिवासी पिता-बन्‍धेजा आदिवासी निवासी-बिकौरा द्वारा सूचना दी गई कि,साहब हम तीन भाई है मेरा बडा भाई दयाराम आदिवासी बकरी चराता है दिनांक 11.06.2019 रात्रि 11.00 की बात है मेरा भाई दयाराम अपने दरवाजे से व लाल्‍लेआदिवासी अपने दरवाजे पर थे जो कि,एक दूसरे से गाली-गलौच कर रहे थे तब मैने भाई दयाराम को पकडकर समझाकर चौगान में चारपाई में लिटा दिया और समझाया कि,रात्रि काफी हो गई सो जाओं और मैं वापिस घर आकर सो गया सुबह के समय भतीज बहू द्वारा मुझे आकर बताया कि,देखों भईया को क्‍या हो गया खटिया के नीचे खून पडा है तब मैंने बहू के साथ चौगान में जाकर देखा तो भाई दयाराम खटिया पर शांत लेटा था उसके सामने गर्दन व सीना में गहरे घाव थे जिससे खून निकल रहा था जिसे देख मैं चिल्‍लाया तो गाव के कुछ लोग आ गये। तब भाई जुगराज ने 100 नंबर पर फोन लगाकर सूचना दी। थाना-सलेहा में अपराध क्र. 154/2019 पर अपराध पंजीबद्ध कर अग्रिम विवेचना आरंभ की गई।प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये, उक्‍त प्रकरण शासन द्वारा चिन्हित,जघन्‍य एवं सनसनीखेज प्रकरण के रूप में चिन्हित किया गया।
प्रकरण का विचारण न्‍यायालय  जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश पन्‍ना के न्‍यायालय में हुआ।शासन की ओर से प्रकरण की पैरवी  दिनेश खरे,प्रभारी जिला लोक अभियोजन अधिकारी,पन्‍ना द्वारा करते हुये न्‍यायालय के समक्ष आरोपी के विरूद्ध अपराध संदेह से परे प्रमाणित किया गया तथा आरोपी के किए गए कृत्‍य को गंभीरतम अपराध मानते हुये अधिकतम दंड से दंडित किये जाने का निवेदन किया गया। जिसपर माननीय न्‍यायालय द्वारा अभिलेख पर आई साक्ष्‍यों,अभियोजन के तर्को तथा न्‍यायिक-दृष्‍टांतो से सहमत होते हुए अभियुक्‍त लाल्‍ले आदिवासी पिता हरभजन आदिवासी,निवासी-ग्राम बिकौरा,थाना-सलेहा,जिला-पन्‍ना,को धारा 302 भा.द.वि. में दोषी मानते हुये आजीवन कारावास और 05 हजार रूपये अर्थदण्‍ड से दंडित किया गया।

 

 

 मामले का खुलासा करते पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी तथा पीछे टीशर्ट पहने खड़ा आरोपी।

 

 

शिव कुमार त्रिपाठी,पन्ना  पन्ना जिले में 20 वर्षीय युवती की जघन्य हत्या  और नग्न्न्न अवस्था  लाश फेंक देेने की में के मामले का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर ही खुलासा कर दिया है। इस सनसनीखेज हत्या के मामले में कातिल कोई और नहीं युवती का ही मंगेतर 21 वर्षीय राजकुमार पटेल पिता रामकांत पटेल निवासी ग्राम इटहा मोहंद्रा, जिला पन्ना निकला है। पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है।

 उल्लेखनीय है कि ग्राम मड़ैयन निवासी 20 वर्षीय युवती का शव जंगल में शुक्रवार 2 अक्टूबर को सुबह गुंदलहा नाले में अर्धनग्न अवस्था में मिला था। युवती का इस हाल में शव मिलने से जिले में सनसनी फैल गई थी तथा तरह-तरह के कयास और अनुमान लगाये जाने लगे थे। लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पन्ना पुलिस ने पूरी तत्परता के साथ पड़ताल करते हुए 24 घंटे के भीतर ही कातिल को खोज निकाला। घटना के संबंध में जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने आज आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुये अज्ञात आरोपी की गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीम का गठन किया गया । उक्त पुलिस टीम द्वारा पुलिस अधीक्षक पन्ना द्वारा दिये गये निर्देशो का पालन करते हुये मृतिका के शव का पी.एम. डॉक्टर पैनल द्वारा कराया गया। थाना प्रभारी कोतवाली पन्ना द्वारा मृतिका के गाँव पहुँचकर गाँव के लोगो के कथन लिये गये एवं मृतिका के मोबाइल नम्बर की जानकारी ली गई। मृतिका द्वारा उपयोग किये जा रहे मोबाइल की जानकारी साइबर इंटेलिजेंस से प्राप्त हुई। जिसमें मृतिका द्वारा अंतिम बार राजकुमार पटेल निवासी ग्राम इटहा मोहंद्रा से बात होना पाया गया। इंटेलिजेंस जानकारी के आधार पर संदिग्ध राजकुमार पटेल की खोजबीन करने पर वह घर में नहीं मिला। यह युवक मोटरसाइकिल से कहीं बाहर भागने की फिराक में था। लेकिन पुलिस की चौतरफा नाकेबंदी और सक्रियता के चलते वह भागने में सफल नहीं हुआ। वह भाग पाता उससे पहले ही पुलिस को मुखबिर से युवक के बारे में सूचना मिल गई, फलस्वरूप पुलिस ने  घेराबंदी कर उसे बायपास रोड पन्ना में दबोच लिया। पूछताछ में आरोपी युवक ने बताया कि लॉकडाउन के पूर्व उसकी शादी मृतिका के साथ हुई थी। मैं जब उसे फोन करता तो कई बार वह मेरा फोन नहीं उठाती थी, जिससे मुझे उस पर शंका होने लगी। घटना दिनांक 27 सितंबर को आरोपी ने फोन करके युवती को नाले के पास बुलाया, जहां दोनों के बीच वाद विवाद हुआ। फल स्वरुप उसी के दुपट्टे से गला दबाकर हत्या कर दी और लाश नाले में फेंक दिया। उसके बाद मै वापस अपने घर इटहा आ गया । पुलिस द्वारा आरोपी के बताये अनुसार आरोपी के आने जाने वाले रास्तो के सी.सी.टी.व्ही. फुटेज को चेक किया गया जिसमे उक्त आरोपी घटना दिनांक को अपनी मोटर साइकिल से घटनास्थल की तरफ जाते हुये दिखा है।  पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मृतिका की पीएम रिपोर्ट में अभी बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस द्वारा आरोपी का सीमेन स्लाइड प्रजर्व कराया जाकर जाँच हेतु फारेंसिक लैब भेजा जा रहा है। जिसके अनुसार जाँच रिपोर्ट प्राप्त होने पर बलात्कार के सम्बन्ध में स्थिति स्पष्ट होगी। उसी के अनुसार अग्रिम विवेचना कार्यवाही की जावेगी । मेमोरेण्डम कथन अनुसार आरोपी द्वारा घटना कारित करने के बाद मृतिका का मोबाइल एवं घटना कारित करते समय आरोपी द्वारा पहने गये अपने कपडे कहीं छिपा देना बताया है  जिसे पुलिस रिमाण्ड में लिया जाकर जप्त किया जावेगा।   

मामले के खुलासे में इनका रहा सराहनीय योगदान

हत्या के इस संगीन और सनसनीखेज मामले के खुलासे में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अलावा इनका सराहनीय योगदान रहा। सफलता दिलाने वाली टीम में थाना प्रभारी कोतवाली अरूण सोनी, उनि जे. एम. सिहं, उनि राहुल यादव, उनि व्हीके अहिरवार, उनि जया सोनी, प्रआर. रामकृष्ण पाण्डे , शिवेन्द्र सिहं , प्रेमलाल पाण्डेय , सायबर सेल से नीरज रैकवार, आशीष अवस्थी , धर्मेन्द्र सिंह राजावत  एवं पुलिस टीम से आर. राजेश सिहं ,बीरेन्द्र कुमार, रामपाल बागरी, राजीव मिश्रा, मोहन सिंह, दीपप्रकाश , प्रदीप पाण्डेय, रविकरन , केशव , सुनील, रोहित , मुन्ना , रवि खरे  शामिल रहे। पुलिस अधीक्षक पन्ना द्वारा उक्त पुलिस टीम को नगद पुरूस्कार से  पुरुस्कृत करने की घोषणा की गई है ।

 

 

खेल का ग्राउंड बना झाड़ियों का मैदान

आवारा गधा घोड़ों और जानवरों का अड्डा बना नजरबाग स्टेडियम

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वनराज का सिर काटने वाले आरोपियों का हुआ खुलासा

 

 

 सिर कटे बाघ का शव और कार्यवाही में लगे तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर k.s. भदौरिया


पन्ना टाइगर रिजर्व में टाइगर का सिर काटे जाने के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स के दल ने तीन लोगों को पकड़ा था, जिनसे पूछताछ किये जाने पर उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। देश और प्रदेश के वन्यजीव प्रेमियों को हैरानी में डालने वाले इस सनसनीखेज मामले में लिप्त आरोपियों का उप वन संरक्षक (वन्य प्राणी) प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय भोपाल द्वारा बकायदा प्रेस नोट जारी कर गुरुवार 1 अक्टूबर को खुलासा भी कर दिया गया है। आरोपी ग्राम पलकोहा, थाना बमीठा जिला छतरपुर के निवासी बताये गये हैं। इन आरोपियों में एक कथित झोलाछाप डॉक्टर भी शामिल है।

 उल्लेखनीय है कि विगत 10 अगस्त 2020 को एक वयस्क नर बाघ का सिर कटा शव केन नदी में तैरता हुआ मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा होने पर कि बाघ का न सिर्फ सिर काटा गया है अपितु धारदार हथियार से उसके संवेदनशील अंगों को भी निकाला गया है, तो पन्ना से लेकर भोपाल तक हड़कंप मच गया। आनन-फानन 3 सितंबर को जांच दल गठित कर इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिये गये। निर्देश मिलते ही एसटीएफ की टीम सक्रिय हो गई और एक माह के भीतर ही बाघ का सिर काटने वाले आरोपियों को दबोच लिया। स्पेशल टास्क फोर्स के इस दल की कामयाबी व उत्कृष्ट कार्य की प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) आलोक कुमार ने सराहना करते हुए इस पूरी टीम को सम्मानित किए जाने की घोषणा की है।

भोपाल से आज जारी हुए प्रेस नोट में बताया गया है कि स्पेशल टास्क फोर्स वन्य प्राणी के द्वारा पीटीआर द्वारा दर्ज अपराधिक प्रकरण क्रमांक 561/22 दिनांक 9-8-20 की जांच हेतु योजनाबद्ध तरीके से कार्यवाही करते हुए मुखबिर तंत्र विकसित कर 30 सितंबर 20 को ग्राम पलकोहा थाना बमीठा जिला छतरपुर से तीन व्यक्तियों को अपनी अभिरक्षा में लिया गया। पकड़े गये आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि बाघ के अंगों को काटने के बाद पकड़े जाने के डर से केन नदी में फेंक दिया था। उक्त आरोपियों के द्वारा बाघ के अंगों को काटकर जहां गड़ा दिया गया था, उक्त स्थल से भी एसटीएफ के द्वारा कुछ अवशेष जप्त किया गया है, जिन्हें फॉरेंसिक जांच हेतु भेजा जायेगा। प्रकरण में पकड़े गये आरोपियों ने अपना नाम घनश्याम पिता रामस्वरूप कुशवाहा उर्फ डॉक्टर, अच्छे लाल पिता भूरा एवं नत्थू निवासी ग्राम पलकोहा, थाना बमीठा, जिला छतरपुर बताया है। इन तीनों आरोपियों को अग्रिम कार्यवाही हेतु पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को सौंपा गया है। मामले में अग्रिम कार्यवाही अब पन्ना टाइगर रिजर्व द्वारा की जायेगी।

 विवादों में रहा टाइगर रिजर्व

लॉकडाउन के दौरान टाइगर रिजर्व में पर्यटन पूरी तरह से बंद था ऐसे में शिकारियों ने रिजर्व को अपना अड्डा बना लिया और लगातार बाघ को निशाना बना रहे थे ऐसी में सक्रिय शिकारियों ने कई बाघों को क्षति पहुंचाई है जिसकी किरकिरी पूरे देश में हो रही थी ऐसे में इस मामले का खुलासा करना टाइगर रिजर्व प्रबंधन को बड़ी चुनौती थी इसी का परिणाम है कि रिटायरमेंट के कुछ माह पूर्व ही तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर केस भदौरिया को इसकी कीमत अपनी कुर्सी गांवा कर चुकानी पड़ी और सरकार ने इसी विवाद के चलते उन्हें यहां से हटाकर स्थानांतरण भोपाल कर दिया है अब इस खुलासे के बाद वन्यजीव प्रेमियों ने राहत की सांस ली है और पकड़े जाने के बाद जो इलाके में पोचिंग  चल रही है उस पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है

  1. पर्यटकों के भ्रमण को खुला पन्ना टाईगर रिजर्व

पर्यटकों के भ्रमण हेतु आज खोले गये मंडला प्रवेश द्वार का नजारा।

 

  1. (शिवकुमार त्रिपाठी),  कोरोना  के कारण लंबे समय से बंद पन्ना टाइगर रिजर्व टूरिस्टो के लिए  सोशल डिस्टेंसिंग के साथ खोल दिया गया  बाघों के  दीदार  के लिए  मशहूर बुंदेलखंड  का खूबसूरत  टाइगर रिजर्व  में  पहले दिन ही देशी और विदेशी सैलानी पहुंची  कोरौना गाइडलाइन लिए के साथ  टाईगर रिजर्व के दोनों प्रवेश द्वारों मड़ला एवं हिनौता में फिर से चहल पहल शुरू हो गई है। पहले दिन आज टाईगर रिजर्व के मड़ला प्रवेश द्वार पर पार्क भ्रमण हेतु  आने वाले पर्यटकों का प्रातः 6 बजे  पन्ना टाइगर रिजर्व के पंजीकृत गाइड, क्षेत्र संचालक एवं अन्य स्टाफ तथा टूर आपरेटरों के द्वारा स्वागत किया गया। आज प्रातः मड़ला गेट से 10 पर्यटक वाहनों ने प्रवेश किया है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुये पार्क प्रबंधन द्वारा सभी जरुरी तैयारियां कर ली गई थीं। पार्क भ्रमण हेतु जाने वाले पर्यटकों को कोरोना गाइड लाइन का पालन करने को कहा गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक नवागत क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व उत्तम कुमार शर्मा ने आज सुबह फीता काटकर विधिवत पर्यटक वाहनों को मंडला गेट से प्रवेश करने की इजाजत दी। बेहद खुशनुमा माहौल में आज सुबह मड़ला गेट से 10 पर्यटक वाहनों ने प्रवेश किया, जिनमें सभी भारतीय पर्यटक सवार थे। गौरतलब है कि पन्ना टाईगर रिजर्व का जंगल मौजूदा समय बाघों से गुलजार है। यहाँ के वन क्षेत्र में 27 वयस्क तथा 27 अर्धवयस्क बाघों सहित 9 शावक विचरण कर रहे हैं। जिससे पन्ना पार्क के प्रति देशी व विदेशी पर्यटकों का आकर्षण बढ़ा है। इस मौसम में टाईगर रिजर्व की हरी-भरी वादियां और गहरे सेहा भी पर्यटकों को लुभा रहे हैं। बाघों का कुनवा बढने से बाघ दर्शन की संभावनायें भी पहले के मुकाबले बढ़ी हैं, जिससे पर्यटक पन्ना टाईगर रिजर्व के भ्रमण को प्राथमिकता देने लगे हैं। कोर क्षेत्र के अलावा पन्ना टाईगर रिजर्व के बफर क्षेत्र अकोला एवं झिन्ना को पर्यटन हेतु विकसित किया गया है।

 पन्ना जिले के इतिहास में सबसे बड़ी पंजीयन शुल्क मिली

पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्र ने जेके सीमेंट से किया खनिज अनुबंध

(शिवकुमार त्रिपाठी) खनिज संसाधन विभाग मध्यप्रदेश द्वारा जे के सेंटर प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में आज जिले के अमानगंज तहसील के ग्राम ककरा,  देवरा , कमथाना ,जुड़ी , स्पतिया देवरा पुरोहित की कुल 1594 हेक्टेयर भूमि का लाइमस्टोन के खनन हेतु 50 वर्ष की अवधि के लिए लीज डीड का निष्पादन किया गया

लीज डीड की रजिस्ट्रीकरण मैं आज राज्य शासन को की ओर से संजय कुमार मिश्र कलेक्टर पन्ना मध्य प्रदेश तथा जे के सेंटर लिमिटेड के प्रतिनिधि के द्वारा उप पंजीयक कार्यालय पन्ना में  ई पंजीयन के माध्यम से कराया गया जिसमें रजिस्ट्रीकरण का कुल 21 करोड़ 40 लाख 57 हजार ₹39 तथा पंजीयन शुल्क के रूप में ₹146420706 कुल 36 करोड़ 6 लाख 77 हजार 447 रुपए का राजस्व स्टांप शुल्क के रूप में प्राप्त हुआ उक्त स्टांप ड्यूटी का भुगतान रजिस्ट्रार पन्ना रामेश्वर प्रसाद अहिरवार द्वारा ऑनलाइन मोड से कराया गया

खास बात यह रही कि इस पंजीयन की सर्विस प्रोवाइड  द्वारा जो 1.5% कमीशन प्राप्त होती है वह सर्विस प्रोवाइडर लोकेश शर्मा उर्फ लकी ने शासन के पक्ष में छोड़ दी यानी 3216855 रुपए  सर्विस प्रोवाइडर को प्राप्त होना था वह सीधे मध्यप्रदेश शासन की खजाने में जमा करा दी गई यानी आज 1 दिन में पन्ना रजिस्ट्रार कार्यालय को अब तक की सबसे बड़ी स्टांप ड्यूटी प्राप्त हुई है

अब अमानगंज क्षेत्र में सीमेंट फैक्ट्री खुलना निश्चित हो गया है सीमेंट फैक्ट्री खुलने से क्षेत्र का विकास होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्राप्त होगा वही सरकार को 36 करोड़ से अधिक का राजस्व भी आज प्राप्त हो गया

 अनलॉक के बाद  तेजी से बढ़ रहे मरीज

मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा,,हालत गंभीर

कोरोना से बचने मास्क लगाएं सोशल डिस्टेंसिंग अपनाए

 कई की हालत गंभीर

मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है

576 लोग पॉजिटिव मिले तीन की हुई मौत

(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना जिले में अनलॉक होने के साथ ही कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है अब हर रोज 2 दर्जन से अधिक मरीज आ रहे हैं आज जो स्वास्थ्य विभाग से जानकारी प्राप्त हुई है उसमें पन्ना शहर के 11 मरीजों के साथ जिले में 24 कोरोना  मरीज पाए गए हैं जिसमें कई की हालत गंभीर है जिन्हें जिला चिकित्सालय मैं उपचार के लिए भर्ती कराया गया है लगातार बढ़ रहे करोना कि मरीजों के साथ ही लोगों ने भी लापरवाही या बहुत तेजी से शुरू कर दी है शहर को देखें तो न तो लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं ना ही मास्क लगा रहे हैं प्रशासनिक अधिकारियों ने भी अब शक्ति करना कम कर दिया है इस कारण मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं जिले में अब तक 576 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं जिसमें 398 लोग स्वस्थ भी हुए हैं जिले में पौष्टिक पाए गए 3 लोगों की मृत्यु हुई है

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