¢तत्कालीन डीएफओ बासु कन्नौजिया सहित पांच पर जुर्माना
अवैध रूप से पत्थर जब्त करने वाले एसडीओ, रेंजर व वनरक्षक भी भुगतेंगे खामियाजा
पन्ना जिले के उत्तर वन मंडल क्षेत्रांतर्गत ग्राम जनकपुर का मामला

प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीष वर्ग-2 ने पारित किया निर्णय

शिवकुमार त्रिपाठी पन्ना। अवैधानिक रूप से आम लोगों पर की जाने वाली कार्यवाहियों को लेकर वन विभाग सुर्खियों में बना रहता है और वन विभाग द्वारा की जाने वाली अवैध कार्यवाहियों का खामियाजा पन्ना जिले के सीधे सादे लोगों को भुगतना पड़ता है। एक इसी तरह की कार्यवाही 9 जून 2016 में सामने आई थी, जिसमें जिले के उत्तर वन मण्डल के तत्कालीन डीएफओ, एसडीओ, रेन्जर व वनरक्षकों द्वारा ग्राम जनकपुर स्थित स्वीकृत स्टाक में रखा गया फर्षी पत्थर ट्रेक्टर ट्राली से उठवा लिया गया था, जिसमें फरियादी सोनीलाल केवट निवासी ग्राम जनकपुर द्वारा न्यायालय की शरण ली गयी और वन अफसरों की कार्यवाही को गलत बताते हुए अपने वकील के माध्यम से विभिन्न तथ्य कोर्ट में प्रस्तुत किये गये। जिसके बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आकर खड़ी हो गयी। इस मामले में मान्नीय चतुर्थ व्यवहार न्यायाधीष वर्ग-2 श्री रवि कुमार वौरासी द्वारा दोषी वन अफसरों व वन कर्मियों से वसूली किये जाने का निर्णय पारित किया गया। उक्त निर्णय के विरूद्ध मान्नीय प्रथम अतिरिक्त जिला न्यायालय में अपील दायर की गयी, जिसे न्यायालय द्वारा निरस्त करते हुए दोषी वन अधिकारियों डीएफओ, एसडीओ, रेंजर व वन कर्मियों से 80 हजार रूपये की वसूली एवं दिनांक 26 सितम्बर 2016 से वसूली दिनांक तक इस राषि पर 6 प्रतिषत ब्याज सहित अपील का व्यय फरियादी सोनीलाल केवट को दिये जाने सम्बंधी निर्णय को स्थिर रखते हुए डिक्री पारित किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार


इस मामले के सम्बंध में विस्तृत जानकारी देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रामलखन त्रिपाठी ने बताया कि पन्ना जिले के उत्तर वन मण्डलाधिकारी बासु कन्नौजिया, एसडीओ नरेन्द्र सिंह, रेन्जर आर.के. गोनेकर, वनरक्षक ऋषि कपूर यादव व वनरक्षक संजय अर्गल द्वारा दिनांक 9 जून 2016 को ग्राम जनकपुर में सोनीलाल केवट के स्वीकृत खनिज व्यापारी अनुज्ञप्ति क्षेत्र में रखे हुए क्रयषुदा फर्षी पत्थर को जबरन ट्रेक्टर ट्राली में भरवाकर ले गये थे। इस सम्बंध में सोनीलाल केवट द्वारा पन्ना कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं नगर निरीक्षक कोतवाली पन्ना को लिखित षिकायत देकर बताया था कि रेन्जर आर.के. गोनेकर ने दस हजार रुपये प्रतिमाह देने की मांग की थी और मना करने पर खनिज का व्यापार न करने देने को धमकाया था व डीएफओ बासु कन्नौजिया, एसडीओ नरेन्द्र सिंह, रेन्जर आरके गोनेकर, वनरक्षक ऋषि कपूर एवं संजय अर्गल को अभिवहन पास एवं स्वीकृत खनिज व्यापारी अनुज्ञप्ति दिखाने पर भी उनके द्वारा जबरन 60 हजार रुपये का उसके द्वारा क्रय पत्थर जब्त कर लिया गया, इस पत्थर को वह 80 हजार रुपये में विभिन्न साइज तैयार करवाकर लोगों को बेंचता। लेकिन वन अफसरों व वन कर्मियों की इस कार्यवाही से उसे काफी नुकसान उठाना पड़ा। सोनीलाल केवट द्वारा सिविल न्यायालय में क्षतिपूर्ति व स्थायी निषेधाज्ञा का दावा पेष किया गया था, जिसे दिनांक 17 अप्रैल 2018 को स्वीकार किया गया। इसके विरूद्ध उक्त सभी अधिकारी व वनकर्मियों ने अपील प्रस्तुत की, जिसे निरस्त कर दिया गया है। मान्नीय प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीष वर्ग-2 श्री अनुराग द्विवेदी के इस निर्णय की सर्वत्र प्रषंसा हो रही है। सोनीलाल केवट की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता रामलखन त्रिपाठी व उनके सहायक अधिवक्ता अजय पटैरिया, नवीन शर्मा, अंजनी सिंह एवं राजकुमार सेन द्वारा पैरवी की गयी।