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ईद मुबारक,, चांद दिखा,,, पन्ना में हुई जमकर आतिशबाजी,, घर पर नमाज

ईद मुबारक,, चांद दिखा,,, पन्ना में हुई जमकर आतिशबाजी,, घर पर नमाज

चांद दिखा जमकर हुई आतिशबाजी

कल मनाया जाएगा ईद का त्योहार

घर पर ही पढ़ी जाएगी नवाज

थानों में हुई शांति समिति की बैठकों के बाद फैसला

सोशल डिस्टेंसिंग और लॉक डाउन का पालन


(शिवकुमार त्रिपाठी) पन्ना में ईद का चांद दिखते ही मुस्लिम समाज के लोगों ने शहर में जमकर आतिशबाजी की और एक दूसरे को मुबारकबाद देना शुरू कर दिया त्यौहार में सभी लोग एक दूसरे से मिलकर मुबारकबाद तो देते ही हैं घर-घर मीठी सेमैया बनाई जाती है और सामूहिक रूप से ईदगाह में नमाज पढ़ी जाती थी लेकिन कोरौना के कारण इस बार रोजेदार घर में ही नमाज पढ़ेंगे लाकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के बावजूद त्यौहार में उतना ही उत्साह देखने को मिल रहा है मुस्लिम समाज के लोगों ने तय किया है कि श्रद्धा और आस्था के साथ घर में ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नमाज अदा करेंगे हालांकि ईद की त्यौहार में जो बाजारों में रौनक रहती थी वह इस बार गायब है पर मुस्लिम समाज के लोगों में वैसा ही उत्साह बना हुआ है जिला प्रशासन एवं पुलिस की अपील में समाज के बुद्धिजीवियों ने शांति समिति की बैठकों के बाद तय किया की लाख डाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ही पन्ना जिले में सभी लोग उत्साह से ईद बनाएंगे

ईद का महत्व

ईद उल फितर इस्लाम मजहब का एक पवित्र त्योहार है। रमजान माह की समाप्ति के बाद चांद को देखकर इस त्योहार को मनाने की परंपरा है। इसलिए दुनिया के अलग-अलग देशों में ईद की तारीख अलग-अलग पड़ती है। 25 तारीख को ईद मनाई जाएगी। इस्लाम मजहब के इस पर्व को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। मीठी ईद इसलिए क्योंकि इस पर्व में खास तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हैं। आइए जानते हैं इस त्योहार से जुड़ी प्रमुख परंपराएं, महत्व और इतिहास।

ईद का पर्व खुशियों का त्योहार है। दरअसल इस पर्व से पहले रमजान के पाक महीने में इस्लाम मजहब को मानने वाले लोग पूरे एक माह रोजा रखते हैं। रमजान महीने में मुसलमानों को रोजा रखना अनिवार्य है। यह पर्व त्याग और अपने मजहब के प्रति समर्पण को दर्शाता है। यह बताता है कि इंसानियत के लिए अपनी इच्छाओं का त्याग करना चाहिए, जिससे कि एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके।


ईद-उल-फितर में मीठे पकवान (खासतौर पर सेंवईं) बनते हैं। लोग आपस में गले मिलकर अपने गिले-शिकवों को दूर करते हैं। घर आए मेहमानों की विदाई कुछ उपहार देकर की जाती है। इस्लामिक धर्म का यह त्योहार भाईचारे का संदेश देता है। ईद उल फितर के दिन लोग सुबह नए कपड़े पहनकर नमाज अदा करते हुए अमन और चैन की दुआ मांगते हैं।

ईद उल फितर के मौके पर लोग खुदा का शुक्रिया इसलिए करते हैं क्योंकि अल्लाह उन्हें महीने भर उपवास पर रहने की ताकत देते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि रमजान के पवित्र महीने में दान करने से उसका फल दोगुना मिलता है। ऐसे में लोग गरीब और जरूरतमंदों के लिए कुछ रकम दान कर देते हैं।

इस्लाम की तारीख के मुताबिक ईद उल फितर की शुरुआत जंग-ए-बद्र के बाद हुई थी। दरअसल इस जंग में मुसलमानों की फतह हुई थी जिसका नेतृत्व स्वयं पैगंबर मुहम्मद साहब ने किया था। युद्ध फतह के बाद लोगों ने ईद मनाकर अपनी खुशी जाहिर की थी।

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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