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गुरुपूर्णिमा विशेष – अपने-अपने गुरु की पूजा और दर्शन से मनाया जा रहा गुरुपूर्णिमा महोत्सव, गोविंद(भगवान) से भी बड़ा गुरु का महत्व

गुरुपूर्णिमा विशेष – अपने-अपने गुरु की पूजा और दर्शन से मनाया जा रहा गुरुपूर्णिमा महोत्सव, गोविंद(भगवान) से भी बड़ा गुरु का महत्व

गुरु के द्वार शिष्यों की भीड़

फेसबुक और व्हाट्सएप में गुरु पूर्णिमा की दृश्य

गुरु के चरणों में नतमस्तक

(शिवकुमार त्रिपाठी) गुरू पूर्णिमा उन सभी आध्यात्मिक और अकादमिक गुरूजनों को समर्पित परम्परा है जिन्होंने कर्म योग आधारित व्यक्तित्व विकास और प्रबुद्ध करने, बहुत कम अथवा बिना किसी मौद्रिक खर्चे के अपनी बुद्धिमता को साझा करने के लिए तैयार हों। इसको भारत, नेपाल और भूटान में हिन्दू, जैन और बोद्ध धर्म के अनुयायी उत्सव के रूप में मनाते हैं। यह पर्व हिन्दूबोद्ध और जैनअपने आध्यात्मिक शिक्षकों / अधिनायकों के सम्मान और उन्हें अपनी कृतज्ञता दिखाने के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हिन्दू पंचांग के हिन्दू माह आषाढ़ की पूर्णिमा (जून-जुलाई) मनाया जाता है।ऐसा भी माना जाता है कि व्यास पूर्णिमा वेदव्यास के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। 

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।

यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे। उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। भक्तिकाल के संत घीसादास का भी जन्म इसी दिन हुआ था वे कबीरदास के शिष्य थे।

शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है।अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को ‘गुरु’ कहा जाता है।

RSS ध्वज को मानता है गुरु

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में गुरु पूर्णिमा बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है देश के लिए समर्पित भाव से काम करने वाले इस संगठन अपना गुरु भगवा ध्वज को माना है सभी स्वयंसेवक दिन ध्वज पूजन करते हैं और अपनी श्रद्धा शक्ति के हिसाब से दक्षिणा देकर संगठन को मजबूत करते हैं

चित्रकूट में शिष्य पहुंचे गुरु के द्वार

भगवान राम चित्रकूट में रहे 12 वर्ष तक कठिन साधना की और शक्ति अर्जित कर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़े वैदिक काल से ही इस स्थान का धार्मिक महत्व है मंदाकिनी स्नान और कामतानाथ की परिक्रमा कर आज शिष्यों ने अपने गुरुओं की पूजा की और सुखद जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया

बागेश्वर धाम में 3 दिन का गुरु पूर्णिमा महोत्सव

बुंदेलखंड के बीते कुछ दिनों से सबसे बड़े आस्था का केंद्र बागेश्वर धाम गढ़ा गंज में आचार्य श्री धीरेंद्र कृष्ण जी महाराज के आयोजन में 3 दिन का गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया जा रहा है जिसमें पूरे देश से भक्तगण पहुंचा रहे हैं आज सामूहिक गुरु दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने गुरु दीक्षा ग्रहण की और यह कार्यक्रम 3 दिन तक चलेगा जिसमें विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया है

बागेश्वर धाम में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें दूर-दूर से प्रसिद्ध एवं सिद्धि प्राप्त संत महात्मा पहुंचे

फेसबुक से गुरु पूर्णिमा महोत्सव

सभी लोग आज अपने गुरु की आस्था के साथ पूजा कर फेसबुक में फोटो डाल रहे जो लोग प्रत्यक्ष रूप से अपने गुरु के पास नहीं पहुंच पाए उन्होंने पुरानी फोटो ही फेसबुक में पोस्ट की और अपने गुरुजनों को स्मरण किया

गृहस्थी संत पंडित देव प्रभाकर शास्त्री अब इस दुनिया में नहीं है पर उनके अनुयायियों ने फेसबुक में फोटो डालकर दद्दा को स्मरण किया

फेसबुक के माध्यम से गुरु पूर्णिमा की बधाई

शिष्यों ने अपने गुरु की पादुका पूजन किया

 

माँ ही पूर्ण गुरु 

व्यक्ति को जीवन में प्रथम शिक्षा मां से ही मिलती है यानी प्रथम गुरु मां ही है माता का महत्व पुराणों में भी बताया गया है “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” यानी मां का महत्व दुनिया में सबसे बढ़कर है मां ही व्यक्ति के जीवन में पूर्ण गुरु का दर्जा रखती है इसलिए अपनी माता का सम्मान सबसे पहले हर व्यक्ति को करना चाहिए जिसने ऐसा नहीं किया उन्हें वह सब नहीं मिला जिसके वेे हकदार है

 

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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