पन्ना में कोरोना से पहली मौत, छुपाने में जुटा प्रशासन ,,82 वर्षीय बुजुर्ग का जबलपुर में निधन

. कोरोना संक्रमित 82 वर्षीय वृद्ध की जबलपुर में मौत

 . स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही  उजागर

  •  कलेक्टर पन्ना को देना होगा ध्यान अन्यथा बिगड़ जाएंगे हालात

 पन्ना शहर के टिकुरिया मोहल्ला मठ्या तालाब के समीप निवासी 82  वर्षीय वृद्ध की कोरोना संक्रमण की वजह से जबलपुर मेडिकल कॉलेज में गत दिवस २८-२९ अगस्त की दरम्यानी रात्री को लगभग १२.३० बजे मौत हो गई। मृतक के पुत्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार वृद्ध हृदय रोग की बीमारी से भी पीडि़त थे, जिसका उपचार कराने के लिये कुछ दिन पूर्व उनके परिजन उन्हे जबलपुर मे उपचार हेतु ले गये थे, जहां पर उनकी बीमारी के उपचार के साथ ही 23 अगस्त को कोविड-१९ की जांच के लिये सैंपल लिया गया। जबलपुर में हृदय की बीमारी का उपचार में राहत नही मिलने की स्थिति के चलते परिजनो द्वारा उन्हे बाद मे कहीं और बाहर ले जाकर दिखाना है इस समझ के साथ दिनांक २४ अगस्त की रात्री को अपने घर पन्ना वापस ले आये, लेकिन दूसरे दिन जब उनकी हालत खराब हुई तो २५ अगस्त को उन्हे जिला चिकित्सालय पन्ना उपचार के लिये भर्ती कराया गया जहां पर चिकित्सक द्वारा उनकी जांच की गई, तथा सुरक्षा की दृष्टि से चिकित्सक द्वारा पृथक से उन्हे वार्ड मे रखते हुये उपचार कार्य शुरू किया गया। इसी दौरान जबलपुर में उनके द्वारा कोविड की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव होने की जानकारी स्वास्थ्य प्रबंधन को पता चली, जिसके बाद वृद्ध की बीमारी की स्थिति गंभीर देखते हुये २५ अगस्त को ही दोपहर मे सागर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। सागर मेडिकल कॉलेज मे भर्ती होने के बाद दो दिन तक उनका सागर मेडिकल कॉलेज मे ही उपचार चला, जहां पर सागर मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन द्वारा जांच जबलपुर मे हुई है यह तथ्य सामने आने के बाद जबलपुर मेडिकल कॉलेज में २८ अगस्त की रात्रि को ८ बजे एम्बूलेंस से जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। रात्री १०.३० बजे कोरोना संक्रमित वृद्ध मेडिकल कॉलेज जबलपुर में भर्ती कराया गया, जहां पर करीब २ घंटे के उपचार के बाद उनकी मौत हो गई। वृद्ध की मौत की जानकारी मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन द्वारा उनके पुत्र को दी गई। आज सुबह दिनांक २९ अगस्त को सुरक्षित तरीके से वृद्ध का अंतिम संस्कार कोरोना की गाईड लाईन के अनुसार जबलपुर मे ही उनके पुत्र द्वारा किया गया। अंत्येष्टि के दौरान सिर्फ परिवार के 5 लोग ही उपस्थित हो सके अब परिजन अंतिम संस्कार करने के बाद पन्ना अपने घर वापस लौट रहे हैं क्योंकि यह शहर का प्रतिष्ठित और बड़ा परिवार है इनके संपर्क में बहुत से परिजन रहे हैं उनकी सैंपल भी कराएं गए हैं और बुजुर्ग के परिवार को मैं बैरिकेड लगाकर बंद भी किया गया था पर जिला प्रशासन की रिपोर्ट में अब तक जिले में कोरोना से मौत नहीं दर्ज किया गया है यानी आंकड़ों को सुधार कर बताने के प्रयास में कोरोना संक्रमण से हुई मौत को जबलपुर में हुई मौत बताकर छुपाने का प्रयास किया जा रहा है जो कोरोना के काम मे लापरवाही है

इनका कहना है –


जबलपुुुर में वृद्ध की कोरोना जांच हुई थी, जांच रिपोर्ट आने से पूर्व ही वृद्ध को उनके परिजन पन्ना ले आये थे, और तबियत ज्यादा बिगडने पर उनके द्वारा २५ अगस्त को सुबह जिला चिकित्सालय मे भर्ती किया गया। इसी दौरान जबलपुर मे वृद्ध की हुई कोरोना जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव होने की जानकारी हमें पता चली। वृद्ध चूंकि हार्ट पेंसेट थे और उनकी हालत नाजुक थी, जिसकी वजह से उन्हे पन्ना से सागर मेडिकल कॉलेज २५ अगस्त को ही दोपहर मे भेज दिया गया था। वृद्ध के संबंध मे हमें अब जानकारी प्राप्त हुई है कि उन्हे सागर से जबलपुर मेडिकल कॉलेज रिफर किया गया था और वहां उनकी मौत हुई है।  हमें अभी अधिकृत रिपोर्ट प्राप्त नहींं  हुई है ट्रू नॉट मशीन से जो सैंपल कराया गया है उसकी रिपोर्ट की भी मुझे जानकारी नहीं है पता कराऊगा

डॉ. एल.के.तिवारी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी
जिला चिकित्सालय पन्ना।

 गंभीर लापरवाही उजागर

1- 82 वर्षीय बुजुर्ग की कोरोना संक्रमण से मौत हुई पर पन्ना जिले का स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले को हल्के अंदाज में ले रहा है जब कोरोना संक्रमित बुजुर्ग को सागर रेफर किया गया था तो ट्रू नॉट  मशीन से जो जांच कराए जाने की बात कही जा रही है उसकी रिपोर्ट कहां है

 

2  ट्रू नॉट रिपोर्ट यदि पॉजिटिव है तो मौत का आंकड़ा जिले की कोरोना संक्रमण में क्यों नहीं जोड़ा जा रहा है क्या पन्ना में कोरोना को बहुत हल्के से लिया जा रहा है या गंभीर लापरवाही की जा रही है

3- जिले के  2 डॉक्टर संक्रमित पाए जा चुके हैं तो ऐसे में क्यों इस तरह की लापरवाही की जा रही है या पूरा अमला थक गया है जिसको कोरोना की परवाह ही नहीं बची जिसके गंभीर परिणाम भी सामने आयेगे ,, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ऑफिस 3 दिन के लिए बंद भी किया गया है फिर भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार लोग इतने लापरवाह क्यों है जिसका खामियाजा जिले की 10 लाख लोगों को भुगतना पड़ेगा

 

4–  ट्रू नॉट  मशीन के सैंपल की रिपोर्ट 2 घंटे के अंदर आ जाती है  4 दिन बीत जाने के बाद भी उस रिपोर्ट का अता पता क्यों नहीं है जबकि जिस व्यक्ति को बाहर रिफर किया जाता है  उसकी  कोरोना पर रिपोर्ट  साथ में भेजना अनिवार्य है  ऐसे में  4 दिन बीत जाने के बाद भी सीएमओ  कह रहे हैं हमें रिपोर्ट का पता करने दीजिए है

5-  जिले में कोरोना के मरीजों की संख्या दिन रात बहुत तेजी से बढ़ रही है करोड़ों रुपए का बजट भी सरकार ने दिया है इसके बावजूद जब जिले में इस तरह की लापरवाही  हो रही है तो जब स्पीक आएगा और गंभीर स्थिति बनेगी तब क्या होगा इसकी चिंता जिला प्रशासन को अवश्य करनी चाहिए अगर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की निगरानी नहीं की गई तो जिले के हालात बहुत बुरे हो जाएंगे

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