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नंदिता पाठक बनी बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष,,,, बुंदेलखंड में खुशी का माहौल

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नानाजी देशमुख की है चाहेती

समाज सेवा के क्षेत्र में किया अतुलनीय काम

(शिवकुमार त्रिपाठी) डा० नंदिता पाठक मूलतः आन्ध्रप्रदेश की रहनें वाली हैं आपके पिता जी मलांजखण्ड में हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड में काम करते थे ,नन्दिता जी नें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के होम साइंस कॉलेज से स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की सभी परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की वे इस दौरान एन एस एस एवं एन सी सी भी जुड़ी रहीं उन्होंने एन सी सी के कैडेट के रूप में दिल्ली में होनें वाली गणतंत्र दिवस की परेड में भी भाग लिया जबलपुर में कॉलेज की पढ़ाई के समय ही विद्यार्थी परिषद से जुड़ीं पढ़ाई पूरी करनें के बाद चित्रकूट आ गईं वहाँ कुछ दिन ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रारम्भिक समय के गतिविधियों में जुड़ी रही फिर परम आदरणीय नानाजी देशमुख जी के मार्गदर्शन में कार्य करनें दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ में काम करनें लगीं

वहाँ उन्होंने फल परिरक्षण इकाई का काम सम्हाला बाद में वे धीरे-धीरे काम को समझते हुए उद्यमिता में चलनें वाली सभी इकाइयों को देखनें लगीं और उद्यमिता विद्यापीठ प्रथम निदेशक बनीं उन्होंने कार्य के अनुभवों के आधार पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया । ग्रामीण युवक युवतियों को रोज़गार उपलब्ध करानें के सफल प्रयोगों को उन्होंने देश एवं विदेश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रस्तुत किया जिसमें हारवर्ड यूनिवर्सिटी बोस्टन अमेरिका तथा भारत में अनेक आई आई टीस आई आई एम , केंद्र एवं राज्य के विश्वविद्यालय ,आई सी ए आर तथा अनेक सामाजिक संस्थान । एक प्रस्तुतिकरण विशेष है जब उन्होंने इन्दौर के आई आई एम में डा० ए पी जे अब्दुल कलाम जी के सामनें दीनदयाल शोध संस्थान के सफल प्रयोगों को उनके समक्ष रखा । डा० नन्दिता पाठक को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नें अपनें राष्ट्रीय पुरस्कार प्राध्यापक यशवंत राव केलकर पुरस्कार से सम्मानित किया । पुरस्कार में मिली राशि को विद्यार्थी परिषद द्वारा चलाए जा रहे प्रकल्पों के लिए दे दिया । इन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनानें के लिए बहुत काम किया ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए मिलन समारोह, महिला संगम का आयोजन लगातार कई वर्षों तक किया चित्रकूट में आयोजित एक समारोह में तो 2लाख से भी अधिक महिलाएँ अपनें खर्चे से चित्रकूट पहुंची । 250-300 ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्र के युवक युवतियाँ प्रति वर्ष उद्यमिता विद्यापीठ से प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वयं का रोज़गार प्रारम्भ करते थे । भारतीय शिक्षण मंडल एवं संस्कार भारती नें महारानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया ।

ये कई विश्वविद्यालयों के प्रबंध मंडल की सदस्य रहीं इन्हें देश की प्रमुख 100 महिलाओं में चयन होनें पर भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया गया ।इनका विवाह डा० भरत पाठक जी से हुआ, दो बेटियॉं हैं अपूर्वा , अनन्या । सम्पूर्ण जीवन पूज्य संत महात्माओं के साथ परम श्रद्धेय नानाजी देशमुख जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ । अभी एन आई ओ एस के प्रबंध मंडल की सदस्य हैं एवं गंगा समग्र दिल्ली प्रांत की संयोजक हैं ।

 

वंदे मातरम से हर किसी को कर देती है मंत्रमुग्ध

नंदिता पाठक चित्रकूट में समाज सेवा के क्षेत्र से जुुड़कर उन्होंने कई अविस्मरणीय कार्य किए हैं ग्रामोत्थान , स्वरोजगार व स्वाबलंबन की दिशा में कार्य करते हुए उन्होंने नई पहचान बनाई इसके अलावा एक उनकी खासियत वंदे मातरम का संपूर्ण गायन भी है जब भी अपने मधुर कंठ से वंदे गीत का गायन और उद्घोष करती है हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है राष्ट्रपति से लेकर ग्रामीण महिलाओं के बीच में हर कहीं वे वंदे मातरम गीत का गायन कर चुकी है संपूर्ण गीत के गायन में भी उनकी एक अपनी अलग पहचान है, वे लंबे समय से बुंदेलखंड खासकर खजुराहो मैं राजनीतिक रूप से भी सक्रिय है

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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