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गंभीर कुपोषित मनीष आदिवासी को पोषण पुनर्वास केंद्र panna में मिला पुनर्जीवन

गंभीर कुपोषित मनीष आदिवासी को पोषण पुनर्वास केंद्र panna में मिला पुनर्जीवन

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में कुपोषण की समस्या आज भी गंभीर बनी हुई है। भीषण गरीबी से जूझ रहे आदिवासी परिवारों के मासूम कुपोषण के सर्वाधिक शिकार हैं। कुपोषण को ख़त्म करने के लिए सरकारी प्रयासों के बावजूद अभी अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी । दूरदराज के आदिवासी बहुल इलाकों में मासूम बच्चों के साथ-साथ महिलाएं भी कुपोषण की समस्या से जूझ रही हैं।

दो माह पूर्व अप्रैल में जब बालक को पोषण पुनर्वास केंद्र पन्ना में भर्ती कराया गया था तब की है यह तस्वीर। 

 

 

 

 

(शिवकुमार त्रिपाठी) जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर स्थित मनौर गांव का गुडियाना टोला कुपोषण और सिलिकोसिस पीड़ितों के लिए जाना जाता है। इस गांव में कई लोगों की मौत सिलिकोसिस से हुई है। तकरीबन ढाई सौ घरों वाली इस आदिवासी बस्ती में 30 से अधिक विधवा महिलाएं हैं। भीषण गरीबी, कुपोषण व बेरोजगारी इस गांव की सबसे बड़ी समस्या है। मनौर गांव वर्षीय आदिवासी बालक मनीष भी गंभीर रूप से कुपोषित था, जिसे पिछले दिनों पोषण पुनर्वास केंद्र पन्ना में भर्ती कराया गया। 

पोषण पुनर्वास केंद्र पन्ना में पदस्थ रश्मि त्रिपाठी ने बताया कि जब इस बच्चे को भर्ती करने के लिए पन्ना लाया गया, उस समय वह गंभीर रूप से कुपोषित था। इसका वजन महज 4 किग्रा के आसपास था, लेकिन पोषण पुनर्वास केंद्र में समुचित देखरेख और इलाज होने पर 22 दिनों में ही इस बालक की हालत में सकारात्मक सुधार हुआ और वजन 4 किग्रा से बढ़कर 6.5 किग्रा हो गया। इस बालक की मां ने बताया कि उन्हें बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि हमारा यह बच्चा बीमारी (कुपोषण) से उबर पायेगा। हम लोग पूरी तरह से उम्मीद खो चुके थे, लेकिन पन्ना में इलाज होने और पौष्टिक खाना मिलने से मनीष अब अच्छा हो गया है।

 

 

अब हालत बेहतर

2 माह में स्वस्थ हुआ बालक

कुपोषण की यह समस्या सिर्फ मनौर गांव में हो ऐसा नहीं है, यहाँ आसपास जितने भी आदिवासी गांव हैं वहां कुपोषित बच्चे बड़ी तादाद में हैं। रश्मि त्रिपाठी ने बताया कि मनौर के अलावा पन्ना से लगे बड़ौर, मनकी, जरधोवा व सुनहरा आदि ग्रामों से भी कुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र में आते हैं। देवेंद्रनगर क्षेत्र के आदिवासी बहुल ग्रामों में भी कुपोषण की समस्या गंभीर है। आपने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र पन्ना में भर्ती कराए गए गंभीर कुपोषित बच्चे मनीष आदिवासी को पुनर्जीवन मिला है। अब मनीष पूरी तरह से स्वस्थ है और उसका वजन बढ़ने लगा है। मनीष की मां जयंती पोषण पुनर्वास केंद्र पन्ना में हुए इलाज के उपरांत बालक मनीष के पूरी तरह स्वस्थ होने पर बेहद खुश है। जो बालक कुछ दिनों पूर्व तक अत्यधिक कमजोरी के कारण लाचार और बेबस पड़ा रहता था, अब वह खेलने लगा है तथा उसका वजन भी बढ़ रहा है।

रश्मि त्रिपाठी बताती हैं कि मनौर गांव के बालक मनीष आदिवासी को अप्रैल माह में पन्ना पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया था, उस समय उसका वजन मात्र 4 किलो था। सरकार के मापदंड और पोषण पुनर्वास केंद्र की व्यवस्थाओं के अनुसार उसे डॉक्टरी इलाज और पोषित भोजन दिया गया। जिससे बालक का वजन बढ़ने लगा, अब वह पूरी तरह तंदुरुस्त है। मनीष आदिवासी का वजन बढ़ाकर 4 किलो से साढ़े 6.5 किलो हो गया है। आपने ने बताया कि जब पहली बार पोषण पुनर्वास केंद्र में मनीष को लाया गया, तब कुपोषित मनीष आदिवासी के शरीर में मात्र एक ग्राम हीमोग्लोबिन बचा था। रश्मि त्रिपाठी ने बताया कि डेढ़ वर्षीय मनीष आदिवासी को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पोषण पुनर्वास केंद्र लेकर आई थी, साथ में उसकी मां जयंती आदिवासी थी। बालक का पिता आलू गोड़ मजदूरी करने दिल्ली गया हुआ था, जब उसे खबर मिली कि उनका बच्चा मनीष स्वस्थ होकर खेलने लगा है तो पिता अपने को रोक नहीं पाया और वह दिल्ली से बच्चे को देखने मनौर पहुँच गया।

सिविल सर्जन डॉक्टर आलोक गुप्ता ने बताया कि मनीष की तरह अक्सर कुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र में आते हैं, जिन्हें हम पोषित भोजन और इलाज देते हैं। यहाँ आने वाले अधिकांश कुपोषित बच्चे तंदुरुस्त होते हैं, मनीष आदिवासी एक उदाहरण है जिसकी बीमारी दूर हुई है और वजन तेजी से बढा है। डॉ. गुप्ता ने अपील की है कि बरसात के सीजन में बीमारियों के फैलने का खतरा रहता है, लिहाजा मातायें अपने बच्चों को साफ सुथरा रखें और गंदगी से बचायें। यदि कोई भी दिक्कत होती है तो अस्पताल लाकर डॉक्टरी इलाज अवश्य करायें।


✎ शिव कुमार त्रिपाठी

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