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पन्ना का सौंदर्य :- पर्यटन विकास एक छलावा, राम पथ गमन की कल्पना अधूरी, संपूर्ण जानकारी

पन्ना का सौंदर्य :- पर्यटन विकास एक छलावा, राम पथ गमन की कल्पना अधूरी, संपूर्ण जानकारी

पर्यटन विकास की घोषणाओं पर नहीं हो सका अमल
वर्ष 2007 में राम वन गमन पथ के विकास का किया गया था ऐलान
मानसून पर्यटन को बढ़ावा देने की भी मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा।

पन्ना। प्राचीन मन्दिरों, ऐतिहासिक महत्व के स्थलों तथा प्रकृति प्रदत्त अनेकों अनुपम सौगातों के बावजूद पन्ना जिले में पर्यटन को बढ़ावा देकर रोजगार के नये अवसरों के सृजन की दिशा में कोई प्रभावी पहल नहीं हो सकी
है। पिछले एक दशक से पन्ना को पर्यटन के मानचित्र में जोडऩे तथा पर्यटन विकास हेतु अनेकों घोषणायें की जाती रही हैं लेकिन वे घोषणायें आज तक मूर्तरूप नहीं ले सकी हैं। नतीजतन पर्यटन विकास की विपुल संभावनाओं के बावजूद पन्ना जिले की स्थिति जस की तस बनी हुई है। मालुम हो कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पन्ना जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये बीते एक दशक के दौरान अनेकों घोषणायें की गईं लेकिन दुर्भाग्य से उन घोषणाओं को मूर्तरूप देने के लिये अभी तक कोई पहल शुरू नहीं हो सकी है।
पर्यटन विभाग द्वारा पन्ना को पर्यटन के मानचित्र में शामिल जरूर कर लिया गया है जो स्वागत योग्य कदम है। लेकिन प्रदेश के मुखिया द्वारा पूर्व में की गई घोषणाओं को भी यदि पूरा कर दिया जाये तो पर्यटन विकास की पहल को पंख लग सकते हैं। पन्ना के आस-पास स्थित प्राकृतिक मनोरम स्थलों व जल प्रपातों का विकास होने पर मानसून सीजन में भी पर्यटक यहां खिंचे चले आयेंगे। इसके अलावा चौमुखनाथ व सिद्धनाथ जैसे

अति प्राचीन पुरातात्विक महत्व के स्थलों को भी विकास की दरकार है।
उल्लेखनीय है कि वनवास के दौरान भगवान श्री राम मौजूदा मध्य प्रदेश के जिन रास्तों से होकर गुजरे थे उसे राम वन गमन पथ के रूप में विकसित करने का ऐलान साल 2007 में प्रदेश के मुखिया द्वारा किया गया था। लेकिन मुख्यमंत्री जी की यह घोषणा ठण्डे बस्ते में चली गई। पौराणिक मान्यता के अनुसार हजारों साल पहले वनवास के दौरान भगवान राम ने सीता और लक्ष्मण के
साथ चित्रकूट से मौजूदा मप्र में प्रवेश किया था और अमरकंटक होते हुये रामेश्वरम की ओर रवाना हो गये थे। 14 साल वनवास के दौरान भगवान श्री राम जिन रास्तों से वन गमन किया उसमे पन्ना जिले से 65 किमी दूर दक्षिण पश्चिम में महर्षि अगस्त आश्रम है जो सिद्धनाथ के नाम से जाना जाता है वह भी शामिल है। पावन टिहरी नदी के तट पर प्राकृतिक छटा से समृद्ध यह स्थलअनूठा है। यहां स्थित अद्वितीय शिल्पकला से सुसज्जित प्राचीन शिव मंदिर आश्रम के वैभवशाली इतिहास का गवाह है। गर्भगृह और दीवारों पर अद्भुत नक्काशीयुक्त मूर्तियां उत्कीर्ण हैं जो खजुराहो के मंदिरों की भांति
जीवन्त प्रतीत होती हैं। मंदिर परिसर में एक विशाल यज्ञशाला थी जिसका जीर्णोद्धार कर नया रूप दिया जा चुका है। भगवान श्री राम की वनवासी रूप की मूर्ति अद्वितीय है जो धनुष में प्रत्यांचा चढ़ाये हुये है। वहीं
हनुमान जी और महर्षि अगस्त की मूर्ति भी शोभायमान है। परिसर के दाहिने ओर प्राचीन सरोवर भी है जो अब अपने जीर्णोद्धार की आश में है। विशाल शिव मंदिर के साथ ही मंदिर परिसर में कभी 108 सिद्ध कुटी थीं जो अब 7-8 ही बची हैं और अस्तित्व के लिये संघर्ष कर रही हैं। मंदिर के आस-पास बेशकीमती शिल्पकला बिखरी पड़ी है जो धीरे धीरे नष्ट हो रही है। आश्रम के संरक्षण और विकास के लिये अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये जबकि इस आश्रम में प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों से दर्शनार्थी दर्शन के लिये आते हैं। दक्षिण भारत के तमिलनाडु से संत वेलकुड़ी कृष्णन स्वामी के
सानिध्य में श्री राम अनुयायी के रूप में हजारों की संख्या में तीर्थाटन करते है और इसे अपने तीर्थ के रूप में स्वीकारते हैं। आश्रम में मंदिर की दीवारों की कई अनमोल मूर्तियां सुरक्षा के अभाव में चोरी हो चुकी हैं।
अगर इस स्थल की समुचित देखरेख नहीं की गई तो विशाल शिव मंदिर के साथ प्राचीन शिल्पकला का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इसके उचित रखरखाव और प्रबंधन द्वारा जिले में पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। यह आश्रम पर्यटकों के लिये आकर्षण का केन्द्र बन सकता है। लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के चलते पन्ना जिले के सलेहा के पास स्थित सिद्धनाथ आश्रम धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को खोता जा रहा है जबकि उक्त स्थान पर पर्यटन विकास की असीम संभावनायें हैं। जिससे इस क्षेत्र का विकास भी संभव हो सकता है। जब
पर्यटकों की संख्या बढऩे लगेगी तो यहां के स्थानीय लोगों को काम-धंधा के अवसर मिलने लगेंगे जिससे यहां की गरीबी और बेरोजगारी भी दूर होगी।

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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