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प्रकृति संरक्षण :- पेड़ों में पीपल और बरगद,, जीवों में टाइगर है श्रंखला का मूल,,,, पूरी खबर जरूर पढ़े

प्रकृति संरक्षण :- पेड़ों में पीपल और बरगद,, जीवों में टाइगर है श्रंखला का मूल,,,, पूरी खबर जरूर पढ़े

वैदिक परंपरा में सबसे पवित्र माने जाते हैं पीपल और बरगदइन वृक्ष को दी गई है पूर्वजों की संज्ञाअनूठी है इनकी उत्पत्ति और संरक्षण की प्रक्रिया

सबसे अधिक ऑक्सीजन देते

पूजनीय बट वृक्ष के सामने

बरगद की  डाली में लगे फल

पीपल ओर बरगद को सनातन धर्म में पूर्वजों की संज्ञा दी गई है।क्या आपने कभी पीपल और बरगद के पौधे लगाए हैं या किसी को लगाते हुए देखा है? क्या पीपल या बरगद के बीज मिलते हैं ?इसका जवाब है…नहीं !!

ऐसा इसीलिए है क्योंकि बरगद या पीपल की कलम बहुत कोशिशों के बाद बमुश्किल लगती है। इसका कारण यह है कि प्रकृति ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है।

जब कौए इन दोनों वृक्षों के फल को खाते हैं तो उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसिंग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं।उसके पश्चात कौवे जहाँ-जहाँ बीट करते हैं, वहाँ-वहॉं पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं। इसीलिए पीपल और बरगद के वृक्ष कई बार ऊंची इमारतों एवं दीवालों की झिर्रियों में उगते मिल जाते है।

और, किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं है कि पीपल ऐसा वृक्ष है जो अधिक ऑक्सीजन देता है और वहीं बरगद के औषधि गुण अपरम्पार हैं। अगर इन दोनों वृक्षों को उगाना है तो कौवे एवं अन्य पक्षियों की मदद बिना संभव नहीं है। इसलिए कौवे को बचाना पड़ेगा।
पक्षी वैज्ञानिकों के अनुसार मादा कौआ भादों महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है।

पीपल की डाली और पत्ते

तो, इस उपयोगी पक्षी के नवजात को पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है। शायद, इसलिए ऋषि-मुनियों ने कौवों के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राद्ध के रूप में पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर दी होगी, जिससे कौवों की नई जनरेशन का पालन पोषण हो जाये।

इसीलिए श्राद्ध का तर्पण करना न सिर्फ हमारी आस्था का विषय है बल्कि यह प्रकृति के रक्षण के लिए नितांत आवश्यक है। साथ ही… जब आप पीपल के पेड़ को देखोगे तो अपने पूर्वज तो याद आयेंगे ही क्योंकि उन्होंने श्राद्ध दिया था इसीलिए यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं।

हमारे द्वारा श्रद्धा से किए गए सभी कर्म, दान आदि आध्यात्मिक ऊर्जा के रूप में हमारे पितरों तक अवश्य पहुँचते हैं।

साभार : (सुरेश जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ)

स्रोत – (डॉ नंदिता पाठक जी की फेसबुक पोस्ट से)

 

टाइगर के बराबर महत्वपूर्ण है बरगद और पीपल

देश में ऐसे दृश्य दिखे तो बचेंगे जंगल

प्राकृतिक संरचना एवं जीव जंतु श्रृंखला में टाइगर को सर्वोपरि माना गया है शाकाहारी एवं मांसाहारी जीवो में टाइगर का दर्जा सबसे श्रेष्ठ है  जिस इलाके में टाइगर रहता यानी जहां बाघ का रहवास है वहाँ संपूर्ण प्राकृतिक संरचना संतुलन में है यदि जब श्रृंखला में कोई गड़बड़ी है तो टाइगर वहां सरवाइव नहीं कर सकता यानी जंगल में पानी होगा तो घास उगेेगी, घास शाकाहारी जानवर खाएंगे जब उनकी तादाद बढ़ेगी तो उस इलाके में मांसाहारी खासकर टाइगर जैसे जानवरों की संख्या बढ़ेगी यानी बाघ कर रहवास जिस इलाके में होगा यही प्राकृतिक संतुलन के लिए सबसे जरूरी है जिस तरह का दर्जा वन्यजीवों में टाइगर का है वैसा ही दर्जा वृक्षों में बरगद और पीपल का है यह आदम कद वृक्ष दीर्घ जीवी होते हैं सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देते हैं और छांव भी इसीलिए यह वृक्ष पूजनीय है यदि इस धरती को बचाना है तो पीपल बरगद जैसे वृक्ष और टाइगर को बचाना ही होगा

(शिवकुमार त्रिपाठी)
✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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