7 जनवरी तक के लिए अंतरिम राहत बच गई विधायकी
विधायकी बहाल अधिवक्ता धीरेंद्र परमार

( शिवकुमार त्रिपाठी) जबलपुर हाई कोर्ट का फैसला पवई विधायक प्रहलाद लोधी की सजा पर स्थगन आदेश प्राप्त हो गया है हाईकोर्ट ने 7 जनवरी तक के लिए अंतरिम राहत दी है 7 जनवरी को सजा की अपील पर फाइनल सुनवाई करेगा की जाएगी माननीय विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अदालत से आया फैसला कल सुनवाई के बाद आज फैसला सुनाया इस मामले की पवई विधायक के पक्ष में पूर्व महाधिवक्ता द्वय रवि नंदन सिंह और पुरुषेद्र कौरव ने की थी तीखी बहस और अपने तर्क रखे

स्पीकर ने दिखाई जल्दबाजी

हाई कोर्ट से आए फैसले में अंतिम राहत देते हुए न्यायाधीश ने पैरा क्रमांक 26 में लिखा है कि स्पीकर ने सदस्यता खत्म करने के आदेश राजपत्र में प्रकाशन में जो तत्परता दिखाई है जल्दबाजी में उठाया गया कदम लिखता है इस संबंध में प्रहलाद लोधी का पक्ष रख रहे पूर्व महाधिवक्ता पुरुषेद्र कौरव ने कहा कि न्यायालय ने यह समझा है कि राजनीतिक विद्वेष वस जल्दबाजी में हटाने के आदेश जारी किए गए हैं और अल्पमत में चल रही प्रदेश की सरकार का निजी हित दिखता है यही कारण है कि हमारे पक्ष पर फैसला आया है पुरुषेद्र कौरव ने कहा कि हमें उम्मीद है कि पवई विधायक प्रहलाद लोधी इस मामले में पूरी तरह से बरी हो जाएंगे

बच गई विधायकी

इस संबंध में जब कानून के जानकारों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि लिली थॉमस फैसले से स्पष्ट है कि जैसे ही किसी को दोषी पाया जाता है वैसी ही उनका सदस्यता खत्म हो जाती है और यदि दोष सिद्धि पर स्थगन प्राप्त हो जाता है तो स्वता ही सदस्यता बहाल हो जाती है
सुप्रीम कोर्ट के वकील और राजनीतिक मामलों में गहरी समझ रखने वाले कानून के जानकार धीरेंद्र सिंह परमार ने कहा कि चूंकि यह विधायक से जुड़ा मामला है इस कारण से विशेष अदालत ने जो फैसला सुनाया उस पर कई पक्ष तरित एक्टिव हो गए थे जनप्रतिनिधि को सजा और दोषी ठहराए जाते ही सदस्यता खत्म होने का प्रावधान है धीरेंद्र सिंह परमार ने कहा कि वैसी ही प्रावधान दोष सिद्धि पर स्थगन प्राप्त होते ही स्वतः सदस्यता बहाल होने का प्रावधान है
सुप्रीम कोर्ट के आदेश स्पष्ट है कि यदि कन्वैक्शन में स्थान प्राप्त हो जाता है सदस्यता ही बहाल हो जाएगी लिहाजा पवई विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता बहाल हो गई है

स्थगन के बाद प्रहलाद लोधी की बच गई विधायकी

पवई विधायक प्रहलाद लोधी को बहुत बड़ी राहत मिली है और भाजपा भी सुकून महसूस कर रही है क्योंकि विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 7 जनवरी तक अंतरिम स्थगन आदेश दे दिया है अब 7 जनवरी को इसकी सुनवाई कर फैसला लिया जाएगा विधायकी खत्म होने के इस बड़े निर्णय से भाजपा में हड़कंप का माहौल था

फैसला आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष शतानंद गौतम ने खुशी जाहिर की है और पवई विधायक प्रहलाद लोधी ने राहत की सांस ली

ज्ञात हो कि स्पेशल कोर्ट के फैसले के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय से भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता रद्द कर दी है। दरअसल स्पेशल कोर्ट ने भाजपा विधायक को 2 साल की सजा दी थी। गुरुवार को सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश सुरेश सिंह ने यह फैसला सुनाया था। लोधी ने तहसीलदार की जीप को रोककर उनके साथ मारपीट की थी।

पन्ना जिले की तहसील रैपुरा में पदासीन तहसीलदार आरके वर्मा ने 28 अगस्त 2014 को सिमरिया थाने में रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त करके थाने में खड़ा कर दिया था इसकी जानकारी जैसे ही भाजपा विधायक को मिली तो उन्होंने वापस लौट रहे तहसीलदार वर्मा की जीप को मंडवा गांव के पास रोककर साथियों के साथ मिलकर तहसीलदार के साथ मारपीट की और गालियां दीं।

इसी मामले में प्रहलाध लोधी सहित 12 लोगों को भोपाल की  विशेष अदालत ने दो साल की जेल और साढ़े तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश सुरेश सिंह ने दी थी। विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को इस मामले में कोर्ट के फैसले की रिपोर्ट मांगी थी। उसके बाद यह निर्णय लिया गया है। विधानसभा सचिवालय ने अब पवई विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया है।

इस फैसले के बाद भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारियों ने खुशी का इजहार किया है

मध्यप्रदेश विधानसभा के विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा था की पवई से विधायक प्रहलाद लोधी को स्पेशल कोर्ट से 2 साल की सजा उनको दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट का नियम है उनके वर्डिक्ट के अनुसार जैसे ही उनको सजा मिलती है उसी क्षण उनकी सदस्यता तत्काल ख़त्म हो जाती है। इस संबंध में सर्टिफाइड कॉपी मेरे सामने रखी गई तत संबंधी जानकारी राजपत्र में छपने के लिए और चुनाव आयोग को सूचित कर दिया गया है कि विधानसभा में 1 पद रिक्त हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के तहत 2 साल की सजा होने पर विधायक की सदस्यता रद्द की जा सकती है। इसके अलावा अगले 6 साल तक  संबंधित जन प्रतिनिधि  को अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने से भी रोका जा सकता है ।यह फैसला जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की पीठ ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(4) को असंवैधानिक करार देते हुए कहा था कि दोषी ठहराए जाने की तारीख से ही अयोग्यता प्रभावी होती है। क्योंकि इसी धारा के तहत आपराधिक रिकॉर्ड वाले जनप्रतिनिधियों को अयोग्यता से संरक्षण हासिल है।