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टाइगर के बाद अब शेरों पर संकट

टाइगर के बाद अब शेरों पर संकट

शेरों की मौत से देश में हड़कंप, अब तक 23 शेर मरे
सरिस्का और पन्ना में खत्म हो चुके है टाइगर
मध्यप्रदेश के पालपुर कूनो को गुजरात सरकार ने नहीं दिए शेर

आमतौर पर सामान्य व्यक्ति की भाषा में लोग बाघ और शेर को एक ही समझते है लेकिन बाघ यानी टाइगर सबसे ताकतवर जानवर जंगल का राजा होता है शेर यानी वह बब्बरी शेर जो भारतीय शेर है अपने परिवार और झुंड के साथ शांति से रहता है जो बहुतायत में गुजरात में पाए जाते हैं इन को विस्तार देने के लिए मध्य प्रदेश के पालपुर कूनो में बसाने की योजना थी पर गुजरात सरकार की हठधर्मिता के कारण शेरों को मध्यप्रदेश में नहीं बसाया गया वन्यजीव संस्थानों की समस्त अनुमति या मिलने के बाद भी गुजरात सरकार ने मध्यप्रदेश को शेर नहीं दिए अब उन्हीं शेरों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं यदि मध्य प्रदेश में यह शेर बसा दिए गए होते तो बहुत बड़ी चिंता या घबराहट नहीं होती

गुजरात स्थित गिर के जंगल में मंगलवार को दो और शेरों की मौत हो गई। इन मौतों के साथ ही गिर में 12 सितंबर के बाद शेरों की मौत की संख्या 23 पहुंच गई है। वन विभाग के अपर मुख्य सचिव राजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि मंगलवार सुबह दोनों शेरों को इन्फेक्शन के चलते बचाव गृह लाया गया था। जहां दोनों की मौत हो गई।
बता दें कि इसके पहले सोमवार को 7 और शेरों के शव मिले थे। अज्ञात वायरस के चलते 14 शेरों की मौत पहले ही हो चुकी थी। शेरों के एनआइवी सैंपल जांच के लिए पुणे भेजे गए हैं। एफएसएल की टीम भी जंगल का निरीक्षण कर रही है।
गुजरात के गिर में 21 पहुंची मृत शेरों की संख्या, जांच के लिए सैंपल पुणे भेजे गए
वनमंत्री गणपतसिंह वसावा ने पिछले दिनो ही जूनागढ़ के पास गिर का दौरा कर मृत शेरों के बारे में जानकारी हासिल की थी। चार शेरों में वायरस मिलने के बाद शेरों को संक्रमण से बचाने के लिए अमरीका से विशेष इंजेक्शन मंगाए जा रहे हैं।
शेरों की मौत की घटना के बाद करीब 550 वनकर्मियों की 140 टीमों ने 24 सितंबर से शेरों के निरीक्षण का काम शुरू किया था।
इस दौरान 600 शेरों में से 9 बीमार पाए गए, जिनमें से 4 का वहीं उपचार किया और 5 को उपचार के लिए बचाव गृह लाया गया था। यहां इलाज के दौरान मंगलवार को दो और की मौत हो गई।
अब आवश्यकता यह महसूस होने लगी है कि शीघ्र ही गुजरात के बाहर मध्य प्रदेश के पालपुर कूनो जैसी जगह में इन शेरों को स्थानांतरित किया जाए जिससे इनकी संख्या में वृद्धि तो होगी ही इनके अस्तित्व को जो खतरा पैदा हो रहा है उसे भी बचाया जा सकेगा

उम्मीद है सिरों को बचाने मध्यप्रदेश और गुजरात की भाजपा सरकार एक बार पुनः तारतम्य स्थापित कर पुनः शेर बसाने का प्रयास करेंगे

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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