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टाइगर रिजर्व के दो बड़े अधिकारियों में ठनी ,,, बाघ प्रबंधन खतरे में

टाइगर रिजर्व के दो बड़े अधिकारियों में ठनी ,,, बाघ प्रबंधन खतरे में

पन्ना टाईगर रिजर्व में दो अधिकारियों के बीच घमासान
बीते चार माह से दोनों के बीच नहीं हो रही बातचीत
अधिकारियों की आपसी तनातनी से कर्मचारियों की मुसीबत बढ़ी
टाईगर रिजर्व के आस-पास मंडराने लगे हैं शातिर शिकारी

पन्ना टाईगर रिजर्व में दो आला अधिकारियों के बीच चली आ रही तनातनी से यहां की व्यवस्थायें बिगड़ रही हैं। हालात ये हैं कि बीते चार माह से इन दोनों अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय और तालमेल तो दूर बातचीत तक बन्द है। नतीजतन बाघों से आबाद हो चुके पन्ना टाईगर रिजर्व की व्यवस्थायें जहां बिगड़ रही हैं, वहीं आला अधिकारियों के बीच घमासान के चलते पार्क के अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी परेशान हैं। इसका फायदा उठाने के लिये पन्ना टाईगर रिजर्व के आस-पास शातिर शिकारी मंडराने लगे हैं, जिससे पन्ना के बाघों पर खतरा बढ़ गया है। पिछले चार-पाँच माह के दौरान पवई सहित आस-पास के वन क्षेत्रों में घटित हुई शिकार की घटनायें, यह बताने के लिये काफी हैं कि हालात सामान्य नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि पन्ना टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया व डिप्टी डायरेक्टर वासु कन्नौजिया के बीच चल रही जंग की जानकारी भोपाल में बैठे वन विभाग के उच्च अधिकारियों को भी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन उच्च अधिकारियों ने क्षेत्र संचालक श्री भदौरिया व डिप्टी डायरेक्टर वासु कन्नौजिया के बीच सुलह कराने का प्रयास भी किया लेकिन सफलता नहीं मिली। बताया गया है कि पार्क के इन दोनों अधिकारियों के बीच विवाद की शुरूआत पन्ना बफर क्षेत्र में पर्यटन प्रारंभ करने की योजना को लेकर हुई थी। डिप्टी डायरेक्टर कन्नौजिया जहां बफर क्षेत्र में पर्यटन शुरू किये जाने के सख्त खिलाफ हैं, वहीं क्षेत्र संचालक श्री भदौरिया इस योजना को मूर्तरूप देने के कार्य को अपनी प्रतिष्ठा बना लिया और येन केन प्रकारेण विरोध के बावजूद उन्होंने विगत 30 जनवरी से पन्ना बफर क्षेत्र में विधिवत पर्यटन शुरू करा दिया। पन्ना बफर के अकोला गेट से पर्यटन का शुभारंभ किये जाने के अवसर पर डिप्टी डायरेक्टर वासु कन्नौलिया नहीं पहुँचीं, जो चर्चा का विषय रहा। यह भी पता चला है कि पूर्व में डिप्टी डायरेक्टर ने क्षेत्र संचालक श्री भदौरिया की एनटीसीए सहित उच्च वन अधिकारियों से शिकायत भी की है। ऐसी स्थिति में पार्क के दोनों ही अधिकारी कोई किसी से कम नहीं की तर्ज पर झुकने और समझौता करने को तैयार नहीं हैं, जाहिर है कि इसका असर बाघों की मॉनीटरिंग व सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

इस चल रहे विवाद के संबंध में जब क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व श्री भदौरिया से पूछा तो उन्होंने स्वीकार किया कि डिप्टी डायरेक्टर वासु कन्नौजिया उनकी कोई बात व निर्देश नहीं मानतीं, अपनी मनमर्जी चलाती हैं। क्षेत्र संचालक ने यह भी बताया कि डिप्टी डायरेक्टर ने बफर क्षेत्र में पर्यटन शुरू किये जाने के विरोध में एनटीसीए को लिखा है। आपने बताया कि प्रदेश के अन्य सभी टाईगर रिजर्व के बफर जोन में पर्यटन चल रहा है, सिर्फ पन्ना टाईगर रिजर्व में नहीं चल रहा था। पीसीसीएफ शहवाज अहमद के दिशा-निर्देश पर बफर क्षेत्र की सुरक्षा बेहतर बनाने की मंशा से पर्यटन शुरू किया गया है, जिसका लाभ ग्रामवासियों को भी मिलेगा। श्री भदौरिया ने बताया कि हमारी योजना बफर की सुरक्षा कोर जैसी करने की है, इसके लिये बफर क्षेत्र के जंगलों में 54 नये निगरानी कैम्प शुरू किये गये हैं।
तनातनी से बढ़ रही है गुटबाजी
पार्क के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच चल रही तनातनी और विवाद से पन्ना टाईगर रिजर्व के अधिकारियों व कर्मचारियों में भी गुटबाजी को बढ़ावा मिल रहा है। आलम यह है कि अधिकारी व कर्मचारी दो खेमों में विभाजित नजर आ रहे हैं। जो लोग इस गुटबाजी से दूरी बनाकर चल रहे हैं, उनकी मुसीबत भी कम नहीं है, क्योंकि वे जिस अधिकारी के पास जाते हैं तथा निर्देशों का पालन करते हैं, उससे दूसरा अधिकारी खफा हो जाता है। बाघों की सुरक्षा व पार्क के हित में काम करने वाले ऐसे कर्मचारी इन दो पाटों के बीच पिस रहे हैं, जिससे व्यवस्थायें छिन्न-भिन्न हो रही हैं। पन्ना के बाघों से प्रेम करने वाले तथा पर्यावरण हितैषी मौजूदा विवाद व गतिरोध से खासे क्षुब्ध हैं। उनका कहना है कि यदि बाघों से आबाद हो चुके पन्ना टाईगर रिजर्व को बचाना है, तो इन दोनों ही अधिकारियों से निजात पानी होगी। अन्यथा बाघों पर खतरा मंडराता ही रहेगा।
उच्च शिखर पर है पन्ना पार्क
जब से पन्ना टाईगर रिजर्व बना, इतने बाघ इसके पूर्व कभी नहीं थे, जितने मौजूदा समय हैं। इस लिहाज से पन्ना टाईगर रिजर्व उच्च शिखर पर है। इन हालातों में पार्क प्रबन्धन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि बेहतर तालमेल और टीम वर्क के साथ बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाये। लेकिन दुर्भाग्य से यहां ऐसा नहीं हो रहा। बाघों को आबाद करने में अहम भूमिका निभाने वाले तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर. श्रीनिवास मूर्ति ने जो सुरक्षा तंत्र व टीम वर्क की भावना कर्मचारियों में विकसित की थी, उसे कायम रखना जरूरी थी। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा, यही वजह है कि शिकारियों की सक्रियता निरंतर बढ़ रही है जो चिन्ता की बात है। मौजूदा समय पन्ना टाईगर रिजर्व में 45 से भी अधिक बाघ हैं। बाघ पुनस्र्थापना योजना शुरू होने के बाद से अब तक यहां 35 लिटर में 77 शावकों का जन्म हो चुका है। इस उपलब्धि को कायम रखना सबसे बड़ी चुनौती है

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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