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बाघिन का प्यार पाने के चक्कर में p-123 ने गवाई जॉन,, फाइटिंग में हुई टाइगर की मौत

बाघिन का प्यार पाने के चक्कर में p-123 ने गवाई जॉन,, फाइटिंग में हुई टाइगर की मौत

टेरिटोरियल फाइट में बाघ की मौत,,

केन नदी में मिला शव

अपना इलाका बढ़ाने और टाइग्रेस को कबिजियाने के चक्कर में हुई लड़ाई

7 अगस्त को सकरा के पास जंगल में लड़े थे बाग


(शिवकुमार त्रिपाठी)

मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन को लेकर दो नर बाघों के बीच हुये भीषण संघर्ष में 8 वर्ष के युवा बाघ की मौत हो गई है। मृत बाघ का शव हिनौता रेन्ज के गंगऊ बीट में पठाई कैम्प के पास केन नदी में उतराता हुआ मिला है। मामले के संबंध में जानकारी देते हुये क्षेत्र संचालक के. एस. भदौरिया ने बताया कि तीन दिन पूर्व 7अगस्त को सुबह दो मेल टाइगरो पी-431 व पी-123 के बीच बाघिन के साथ मेटिंग को लेकर लड़ाई हुई थी जिसमें युवा बाघ पी- 123 बुरी तरह से घायल हो गया था। लड़ाई में घायल हुये इस बाघ की वन कर्मियों व अधिकारियों द्वारा केन नदी में नाव से सघन तलाशी की गई। लेकिन बाघ नदी में कहीं नहीं मिला। श्री भदौरिया ने बताया कि गहरे पानी में बाघ का शव डूब गया था। चौबीस घण्टे के बाद शव जब पानी में उतरा कर बहने लगा, तब घटना स्थल से लगभग 8 किमी. दूर पठाई कैम्प के पास रविवार 9 अगस्त की शाम बाघ का शव नदी में तैरता हुआ मिला। रात्रि हो जाने के कारण बाघ का पोस्टमार्टम सोमवार को क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया व उप संचालक जरांडे ईश्वर रामाहरी की उपस्थिति में वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता द्वारा किया गया। 

 क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व श्री भदौरिया ने बताया कि 7 अगस्त को प्रातः परिक्षेत्र गहरी घाट के बीट झालर के सकरा में नदी के किनारे बाघ पी-431 एवं बाघिन टी-6 मेंटिंग में थे, तभी वहां पर नर बाघ पी -123 पहुंच गया। दूसरे नर बाघ पी- 123 के पहुंचने पर बाघ पी-431 आक्रामक हो गया। फलस्वरूप दोनों बाघों के बीच संघर्ष होने पर नर बाघ पी-123 को जान गवानी पड़ी। वनरक्षक  दिलीप सिंह द्वारा दोनों बाघों की लड़ाई देखकर तत्काल हाथी कसवा कर मौके पर पहुंचने की तैयारी की गई तथा वरिष्ठ अधिकारियों को घटना से अवगत कराया गया। सूचना प्राप्त होते ही क्षेत्र संचालक, उप संचालक व सहायक संचालक सहित परिक्षेत्र अधिकारी एवं वन्य प्राणी चिकित्सक मौके पर पहुंचे।  मौके पर नर बाघ  पी-431 एवं बाघिन टी-6 पाए गए, किंतु तीसरे बाघ  का पता नहीं चला।  तीसरे बाघ के न दिखने पर घटनास्थल के आसपास जंगलों में सर्चिंग की गई साथ ही नाव से नदी क्षेत्र में गश्ती की गई तथा जाल डालकर घटनास्थल के आसपास नदी में खोजा गया किंतु बाघ नहीं मिला। रविवार 9 अगस्त को शाम के समय नदी में तैरता हुआ बाघ का शव मिला जिसकी सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।  सूचना प्राप्त होते ही तत्काल उप संचालक एवं अन्य स्टाफ मौके पर पहुंचे। नर बाघ पी-123 एवं नर बाघ पी-431 के बीच काफी संघर्ष हुआ था तथा आपसी संघर्ष में घायल होने के कारण नर बाघ पी -123 मृत होने के पश्चात पानी में सकरा से बहकर करीब 8 किलोमीटर दूर हिनौता क्षेत्र के पठाई  कैंप के पास  नदी में तैरता हुआ पहुँच गया। पानी में रहने के कारण बाघ का शव फूल  चुका था तथा उसका सर नहीं था।  संभवतः पानी के अंदर मगरमच्छों के द्वारा खा लिया गया होगा। नर बाघ की आपसी संघर्ष में हुई मृत्यु की सूचना दूरभाष द्वारा प्रधान मुख्य वन संरक्षक मध्य प्रदेश एवं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को दी गई।  रात्रि होने के कारण प्रातः पोस्टमार्टम का निर्णय लिया गया, आज 10 अगस्त सोमवार को प्रातः मौके पर जाकर मृत बाघ का पोस्टमार्टम डॉक्टर संजीव कुमार गुप्ता वन्य प्राणी चिकित्सक पन्ना टाइगर रिजर्व द्वारा किया गया।  पोस्टमार्टम के दौरान ही नर बाघ पी -123 के रूप में बाघ की पहचान की गई। पोस्टमार्टम में बाघों के बीच आपसी संघर्ष के निशान मृत बाघ के शव पर पाए गए हैं।  बाघ की विसरा आदि  के सैंपल लिए गए।  पोस्टमार्टम उपरांत समस्त की उपस्थिति में मृत बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमार्टम एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर बाघ की मृत्यु आपसी संघर्ष में होना पाया गया है।


नर बाघों की तुलना में मादाओं की संख्या कम 

पन्ना टाइगर रिजर्व में नर बाघों की तुलना में मादाओं की संख्या कम है जो संघर्ष का कारण बन रहा है। जानकारों के मुताबिक नर बाघ की टेरिटरी में तीन से लेकर चार बाघिनों का रहवास होता है। ऐसी स्थिति में जब नर व मादा बाघों की संख्या का संतुलन बिगड़ता है तो मादा पर आधिपत्य के लिये नर बाघों के बीच संघर्ष शुरू हो जाता है। पन्ना टाइगर रिजर्व में मौजूदा समय यही हो रहा है, टेरिटोरियल फाइट की जगह नर बाघों के बीच बाघिनों के लिये जानलेवा लड़ाई होने लगी है। इस लड़ाई में कमजोर बाघ को अपनी जान तक गवानी पड़ जाती है। निश्चित ही यह नर बाघों के लिहाज से चिंताजनक बात है लेकिन इस स्थित को तब तक टाला नहीं जा सकता जब तक प्राकृतिक रूप से बाघों का सेक्स रेसियो संतुलित नहीं हो जाता। वर्ष 2009 के पूर्व भी पन्ना टाइगर रिजर्व सेक्स रेसियो की समस्या से ग्रसित था परिणाम स्वरुप जो हालात बने थे वे जगजाहिर हैं। इसकी फिर से यहाँ पर पुनरावृत्ति न हो इस दिशा में सार्थक और कारगर प्रयास होने चाहिये।   

✎ शिवकुमार त्रिपाठी (संपादक)
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