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टीकमगढ़ में हो रहा रेत का अवैध उत्खनन, धसान नदी में मशीनों से अवैध उत्खनन का आरोप,,

टीकमगढ़ में हो रहा रेत का अवैध उत्खनन, धसान नदी में मशीनों से अवैध उत्खनन का आरोप,,

नियम विरुद्ध मशीनों से हो रहा रेत का अवैध उत्खनन

टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश)।

जिले में अवैध रेत खनन का कारोबार बेलगाम होता जा रहा है। पलेरा ब्लॉक से होकर बहने वाली धसान नदी में रेत माफिया नदी का सीना चीरकर लिफ्टर मशीनों के जरिए खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं। सनातन धर्म में नदी को मां का दर्जा दिया गया है, लेकिन यहां मां समान नदी के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार टीकमगढ़ जिले में रेत खनन का ठेका महालक्ष्मी ग्रुप को दिया गया है, लेकिन कंपनी द्वारा स्वीकृत घाटों की सीमा को दरकिनार कर पलेरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत गोना के मजरा कुटन घाट पर अवैध रूप से लिफ्टर लगाकर रेत निकाली जा रही है। यह घाट खनन के लिए स्वीकृत नहीं है, इसके बावजूद कई लिफ्टर मशीनें नदी के भीतर उतार दी गई हैं, जो सीधे तौर पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के निर्देशों का उल्लंघन है।

गांव के निवासी राजकुमार ने बताया कि पिछले करीब एक महीने से लगातार लिफ्टर मशीनें धसान नदी में चल रही हैं। उनका आरोप है कि प्रतिदिन लगभग 500 ट्रक रेत का अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से नष्ट हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि भारी मशीनों के कारण नदी का जलस्तर प्रभावित हो रहा है और भविष्य में जल संकट की आशंका बढ़ गई है।

वहीं इस पूरे मामले पर जतारा एसडीएम संजय दुबे ने बताया कि प्रशासन द्वारा पहले भी अवैध खनन को लेकर कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अब फिर से सूचना मिली है, जिस पर खनिज विभाग के साथ मिलकर संयुक्त छापामार कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में नदी के अंदर लिफ्टर मशीनें नहीं लगाई जा सकतीं, क्योंकि यह एनजीटी के नियमों का खुला उल्लंघन है।

अब देखना यह है कि प्रशासन की कार्रवाई जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या धसान नदी को रेत माफिया के चंगुल से बचाया जा सकेगा।


✎ शिव कुमार त्रिपाठी

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